पैसों की तंगी से हैं परेशान? रोज सुबह तुलसी में जल चढ़ाते समय करें इस चमत्कारी मंत्र का जाप

हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में तुलसी के पौधे को केवल एक वनस्पति नहीं, बल्कि साक्षात मां लक्ष्मी का स्वरूप और भगवान विष्णु की परम प्रिया यानी ‘हरिवल्लभा’ माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि जिस घर के आंगन या बालकनी में तुलसी का पौधा हरा-भरा रहता है और प्रतिदिन उसकी सेवा-आराधना की जाती है, उस घर में दरिद्रता, नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष कभी टिक नहीं पाते। आज के भागदौड़ भरे जीवन में कई लोग कड़ी मेहनत करने के बावजूद आर्थिक संकट, कर्ज के बोझ और धन के लगातार बह जाने की समस्या से जूझते रहते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि तुलसी को जल अर्पित करते समय शास्त्रों में बताए गए एक विशेष गुप्त मंत्र का नियमित उच्चारण किया जाए, तो कुंडली के अशुभ ग्रह शांत होते हैं और धन आगमन के नए व अचूक मार्ग खुलते हैं।

तुलसी में जल चढ़ाते समय किस महामंत्र का करें जाप?

तुलसी को जल देते समय बिना किसी मंत्र के केवल पानी डाल देना पूर्ण फल नहीं देता। जब आप जल की धारा अर्पित कर रहे हों, तब मन ही मन या धीमे स्वर में इस अत्यंत कल्याणकारी मंत्र का उच्चारण करें:

“महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोऽस्तुते।” इसके अलावा, मां लक्ष्मी को शीघ्र प्रसन्न करने और धन वृद्धि के लिए इस एकाक्षरी व शक्तिशाली मंत्र का जाप भी कर सकते हैं: “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वृंदावन्यै स्वाहा।” इन मंत्रों का अर्थ है कि हे समस्त सौभाग्य को बढ़ाने वाली, संपूर्ण व्याधियों व रोगों को हरने वाली और भगवान श्रीहरि को परम प्रिय तुलसी देवी, हम आपको बारंबार प्रणाम करते हैं। इस भाव के साथ जल चढ़ाने से व्यक्ति की आंतरिक ऊर्जा शुद्ध होती है और घर में बरकत का वास होने लगता है।

तुलसी में जल अर्पित करने की सही शास्त्रीय विधि

तुलसी जी को जल चढ़ाने का भी एक विशेष नियम और समय निर्धारित है। हमेशा सूर्योदय के समय या सुबह स्नान करने के तुरंत बाद स्वच्छ और सात्विक वस्त्र पहनकर ही जल अर्पित करना चाहिए। जल अर्पित करने के लिए हमेशा तांबे या पीतल के लोटे का ही प्रयोग करें, स्टील या प्लास्टिक के बर्तनों का इस्तेमाल वर्जित माना गया है। लोटे के जल में थोड़ा सा गंगाजल, कच्चा दूध और चुटकी भर रोली व अक्षत मिला लेना अत्यंत शुभ फलदायी होता है। जल चढ़ाते समय इस बात का ध्यान रखें कि जल की पतली धारा सीधे जड़ में गिरे और आपके पैरों पर पानी के छींटे न आएं। जल देने के बाद तीन बार तुलसी के पौधे की परिक्रमा करें और अपनी मनोकामना व्यक्त करें।

शाम के समय दीपक जलाने का चमत्कारी नियम

सिर्फ सुबह जल चढ़ाना ही काफी नहीं होता, बल्कि शाम के समय प्रदोष काल में तुलसी के पास शुद्ध गाय के घी का दीपक प्रज्वलित करना अत्यंत फलदायी माना गया है। दीपक को कभी भी सीधे जमीन पर न रखें, बल्कि उसके नीचे थोड़े से अक्षत (चावल) का आसन अवश्य दें। दीपक जलाते समय ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का स्मरण करें। ऐसा करने से घर के भीतर मौजूद सभी नकारात्मक शक्तियां नष्ट हो जाती हैं और गृह क्लेश से मुक्ति मिलती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, शाम को तुलसी के पास जलने वाला दीपक घर में धन-धान्य और सकारात्मक ऊर्जा को अपनी ओर आकर्षित करने का सबसे शक्तिशाली माध्यम है।

भूलकर भी इन दिनों में न चढ़ाएं तुलसी को जल

तुलसी पूजा के नियमों में कुछ सख्त निषेध भी बताए गए हैं जिनका पालन करना हर गृहस्थ के लिए अनिवार्य है। शास्त्रों के अनुसार, प्रत्येक रविवार, एकादशी तिथि और सूर्य ग्रहण व चंद्र ग्रहण के दिनों में तुलसी में जल अर्पित नहीं करना चाहिए और न ही उनके पत्तों को स्पर्श करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन तुलसी माता भगवान श्रीहरि विष्णु के निमित्त निर्जला व्रत रखती हैं, ऐसे में जल चढ़ाने से उनका व्रत खंडित माना जाता है। इसके अलावा सूर्यास्त के बाद कभी भी तुलसी के पत्तों को नहीं तोड़ना चाहिए। यदि इन सरल नियमों और मंत्रों का निष्ठापूर्वक पालन किया जाए, तो कुछ ही हफ्तों में पैसों की तंगी दूर होती है और जीवन में स्थायित्व आने लगता है।

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