
अक्सर रात को सोने के बाद जब कमरे में तेज खर्राटों की गूंज उठती है, तो ज्यादातर लोग इसे सिर्फ एक सामान्य परेशानी या चिढ़ का कारण मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार लोग पार्टनर के खर्राटे लेने पर तकिए से कान ढंक लेते हैं या फिर करवट बदलकर सोने की कोशिश करते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों और न्यूरोलॉजिस्ट्स की मानें तो खर्राटे लेने वाले से ज्यादा इसका गंभीर और खतरनाक असर साथ सोने वाले पार्टनर (Bed Partner) की सेहत पर पड़ता है।
चिकित्सा विज्ञान में इसे ‘सेकंड-हैंड स्नोरिंग’ (Second-Hand Snoring) कहा जाता है। अध्ययन बताते हैं कि अगर आपका पार्टनर नियमित रूप से तेज खर्राटे लेता है, तो आपकी नींद में हर रात 1 से 2 घंटे की कटौती हो जाती है, जो धीरे-धीरे कई जानलेवा बीमारियों की जड़ बन सकती है।
क्या है सेकंड-हैंड स्नोरिंग और यह सेहत को कैसे खोखला करती है?
जब कोई व्यक्ति खर्राटे लेता है, तो उसकी आवाज की तीव्रता (डेसिबल लेवल) कई बार 60 से 80 डेसिबल तक पहुंच जाती है। यह शोर किसी व्यस्त सड़क पर चल रहे ट्रैफिक या मिक्सर ग्राइंडर चलने जितना तेज होता है। लगातार इस शोर के बीच सोने से बगल में लेटे पार्टनर की गहरी नींद (REM Sleep) बार-बार टूटती है।
नींद पूरी न होने से शरीर का सर्कैडियन रिदम बिगड़ जाता है और शरीर को रिपेयर होने का समय नहीं मिलता, जिससे शारीरिक और मानसिक दोनों स्वास्थ्य पर सीधा हमला होता है।
पार्टनर के खर्राटों से आपको हो सकती हैं ये 5 गंभीर समस्याएं
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हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियां: जब रात भर रुक-रुक कर नींद टूटती है, तो शरीर में तनाव हार्मोन ‘कोर्टिसोल’ (Cortisol) का स्तर तेजी से बढ़ता है। इसके कारण नसों में खिंचाव आता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर, अनियमित दिल की धड़कन (Arrhythmia) और भविष्य में कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ जाता है।
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क्रॉनिक फटीग और दिन भर चिड़चिड़ापन: आधी-अधूरी नींद के साथ जागने पर दिन भर सिर में भारीपन, थकान और सुस्ती बनी रहती है। इसका असर ऑफिस के काम, फोकस और याददाश्त पर पड़ता है।
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डिप्रेशन और एंग्जायटी का रिस्क: महीनों तक लगातार स्लीप डिप्राइव्ड (नींद की कमी का शिकार) रहने वाले लोगों में डिप्रेशन, मूड स्विंग्स और एंग्जायटी डिसऑर्डर होने की संभावना तीन गुना अधिक बढ़ जाती है।
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इम्यूनिटी का कमजोर होना: पर्याप्त नींद न मिलने पर शरीर में व्हाइट ब्लड सेल्स और एंटीबॉडीज का उत्पादन घट जाता है, जिससे आप मौसमी संक्रमण, सर्दी-जुकाम और फ्लू की चपेट में जल्दी आ जाते हैं।
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रिश्तों में कड़वाहट और स्लीप डिवॉर्स: रात को चैन की नींद न मिलने के कारण पार्टनर्स के बीच आपसी चिड़चिड़ापन बढ़ता है। कई जोड़ों में यह स्थिति ‘स्लीप डिवॉर्स’ (Sleep Divorce) यानी अलग-अलग कमरों में सोने की नौबत तक ला देती है।
पार्टनर के लिए भी यह ‘स्लीप एपनिया’ का हो सकता है संकेत
खर्राटे लेना केवल आपके लिए ही नहीं, बल्कि आपके पार्टनर के लिए भी किसी बड़ी बीमारी की घंटी हो सकता है। इसे सिर्फ एक आदत समझने की भूल न करें।
अक्सर तेज और रुक-रुक कर आने वाले खर्राटे ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) का संकेत होते हैं। इसमें सोते समय सांस लेने वाली नली कुछ सेकंड्स के लिए पूरी तरह बंद हो जाती है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर अचानक गिर जाता है। यदि समय रहते इसका इलाज न कराया जाए, तो यह खर्राटे लेने वाले व्यक्ति के लिए स्ट्रोक, टाइप-2 डायबिटीज और हार्ट फेलियर का कारण बन सकता है।
इस समस्या से बचने के लिए क्या करें?
अगर पार्टनर के खर्राटों से आपकी सेहत बिगड़ने लगी है, तो बिना झिझक के कुछ जरूरी कदम उठाएं:
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स्लीप पोजिशन बदलें: पार्टनर को पीठ के बल (सीधे) सोने के बजाय करवट लेकर (साइड स्लीपिंग) सोने के लिए कहें। इससे गले के टिश्यू पीछे नहीं गिरते और वायुमार्ग खुला रहता है।
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ईएनटी (ENT) या स्लीप स्पेशलिस्ट को दिखाएं: यदि समस्या पुरानी है, तो डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर स्लीप टेस्ट (Polysomnography) की मदद से कारण जानकर CPAP मशीन या ओरल अप्लायंसेज की सलाह दे सकते हैं।
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जीवनशैली में बदलाव: वजन घटाना, सोने से कम से कम 3-4 घंटे पहले शराब और स्मोकिंग से दूरी बनाना तथा रात को हल्का भोजन करना खर्राटों को काफी हद तक कम कर देता है।
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इयरप्लग्स और व्हाइट नॉइज: जब तक पार्टनर का इलाज चल रहा है, अपनी सेहत बचाने के लिए आप अच्छी क्वालिटी के इयरप्लग्स या कमरे में ‘व्हाइट नॉइज मशीन’ का इस्तेमाल कर सकते हैं।
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