
गहरा उफनता समंदर, तेज हवाएं, सीमित दृश्यता और हजारों टन खतरनाक रसायनों (Chemicals) से भरा एक विशालकाय व्यापारिक जहाज—ऐसी विकट परिस्थितियों में जब जहाज का इंजन अचानक जवाब दे जाए और वह लहरों के सहारे बहने लगे, तो तबाही का मंजर कितना भयानक हो सकता है, इसका केवल अंदाजा ही लगाया जा सकता है। लेकिन भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के जांबाज जवानों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय समुद्री सीमा में कोई भी संकट उनके साहस से बड़ा नहीं हो सकता।
खुले समुद्र में अनियंत्रित होकर संकट में फंसे इस केमिकल टैंकर पर मौजूद 23 क्रू मेंबर्स की जान सांसत में थी। एक छोटी सी चूक या चिंगारी जहाज पर लदे रसायनों के कारण भयावह विस्फोट या पर्यावरणीय त्रासदी (Ecological Disaster) का रूप ले सकती थी। किंतु सूचना मिलते ही भारतीय तटरक्षक बल ने अपनी आधुनिक नौकाओं और उन्नत हेलीकॉप्टरों के साथ जो त्वरित बचाव अभियान छेड़ा, उसने सभी 23 नाविकों को सकुशल मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया।
अचानक ठप हुआ प्रोपल्शन, समुद्र में अनियंत्रित हुआ जहाज
घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से गुजर रहे एक मर्चेंट वेसल (केमिकल टैंकर) के मुख्य इंजन और स्टीयरिंग गियर में अचानक गंभीर तकनीकी खराबी आ गई। जहाज ‘डेड शिप’ की स्थिति में आ गया, यानी उसका न तो इंजन काम कर रहा था और न ही उसे किसी दिशा में मोड़ा जा सकता था।
समुद्र में उठ रही 3 से 4 मीटर ऊंची तूफानी लहरों के बीच बेकाबू हुआ यह जहाज तेजी से ड्रिफ्ट करने लगा। जहाज के कैप्टन ने हालात हाथ से निकलते देख ‘डिस्ट्रेस कॉल’ (SOS) जारी किया। यह संदेश मिलते ही भारतीय तटरक्षक बल के समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (MRCC) में अलर्ट जारी कर दिया गया। स्थिति इसलिए और भी ज्यादा गंभीर थी क्योंकि जहाज पर भारी मात्रा में ज्वलनशील और जहरीले केमिकल लदे हुए थे, जिससे उसके चट्टानों से टकराने या पलटने की स्थिति में बड़े पैमाने पर समुद्री प्रदूषण का खतरा भी मंडरा रहा था।
ICG ने तुरंत झोंकी पूरी ताकत: ‘ऑपरेशनल रेडिनेस’ का मुजाहिरा
संकट की गंभीरता को भांपते हुए कोस्ट गार्ड हेडक्वार्टर ने तुरंत अपना अत्याधुनिक अपतटीय गश्ती पोत (Offshore Patrol Vessel) और नजदीकी एयर स्टेशन से एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH Mk-III) को ऑपरेशन के लिए रवाना किया:
-
लहरों से मुकाबला: रात का समय होने और तेज हवाओं के बावजूद आईसीजी का गश्ती जहाज कुछ ही घंटों में उस संकटग्रस्त केमिकल टैंकर के करीब पहुंच गया।
-
रेडियो संपर्क और ढांढस: तटरक्षक अधिकारियों ने तुरंत जहाज के मास्टर (कैप्टन) और घबराए हुए नाविकों से संचार संपर्क स्थापित किया और उन्हें घबराने के बजाय आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने के निर्देश दिए।
-
केमिकल लीकेज पर नजर: बचाव दल ने सबसे पहले थर्मल और सेंसर कैमरों के जरिए यह सुनिश्चित किया कि जहाज के कार्गो होल्ड से किसी केमिकल का रिसाव तो नहीं हो रहा है, ताकि ऑपरेशन के दौरान किसी रासायनिक आग या विषैली गैस के खतरे को पहले ही टाला जा सके।
वो रोंगटे खड़े कर देने वाले पल: रेस्क्यू और टोइंग का साहसिक तालमेल
जहाज को डूबने या उथले पानी में फंसने से बचाने के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण काम था भारी समुद्र में उस विशाल टैंकर को रस्सी (Tow Line) से बांधना। उफनती लहरों के बीच दो जहाजों को इतने करीब लाना अपने आप में जान जोखिम में डालने जैसा था।
भारतीय तटरक्षक बल के प्रशिक्षित मरीन कमांडोज और तकनीकी दल ने अत्यधिक सूझबूझ का परिचय दिया:
-
टोइंग ऑपरेशन शुरू: प्रचंड लहरों के थपेड़ों के बीच आईसीजी के पोत ने बेहद सटीकता से उस विशालकाय केमिकल टैंकर को मजबूत केबल्स के जरिए अपने साथ जोड़ा और उसे उथले पानी व चट्टानी इलाके से खींचकर गहरे और सुरक्षित जलक्षेत्र की ओर ले जाना शुरू किया।
-
सभी 23 क्रू मेंबर्स सुरक्षित: जहाज पर मौजूद सभी 23 क्रू सदस्यों को प्राथमिक चिकित्सा, जरूरी खाद्य सामग्री और तकनीकी सहायता पहुंचाई गई। किसी भी नाविक को कोई गंभीर शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचा।
टल गया बड़ा पर्यावरणीय और मानवीय संकट
भारतीय तटरक्षक बल के इस समय पर किए गए हस्तक्षेप से न केवल 23 नाविकों की अनमोल जिंदगी बचाई गई, बल्कि देश के समुद्री तट पर होने वाली एक बड़ी पर्यावरणीय दुर्घटना भी टल गई। यदि यह केमिकल टैंकर अनियंत्रित होकर तट या किसी रीफ से टकरा जाता, तो समुद्री जीवों और स्थानीय तटीय पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती थी।
तटरक्षक बल की इस जांबाजी और पेशेवर दक्षता की नौवहन जगत (Shipping Industry) और वैश्विक मैरीटाइम एजेंसियों ने भूरी-भूरी प्रशंसा की है। जहाज को अब सुरक्षित रूप से नजदीकी बंदरगाह के आउटर एंकरेज तक पहुंचा दिया गया है, जहां तकनीकी विशेषज्ञ उसकी मरम्मत और आगे की सुरक्षा जांच में जुटे हैं।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया