
बंगाल की खाड़ी में उठे भीषण चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों में लैंडफॉल की प्रक्रिया पूरी करने के साथ ही पूरे देश के मौसम चक्र को पूरी तरह से बदल दिया है। 130 से 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तूफानी हवाओं और मूसलाधार बारिश के चलते दक्षिण और पूर्वी भारत के तटीय जिलों में भारी तबाही तो हुई ही है, साथ ही इसके व्यापक प्रभाव से देश के मध्य और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भी पारे में तेजी से गिरावट दर्ज की जाने लगी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, अर्नब तूफान से उठने वाली नमी और ऊपरी वायुमंडल में बनने वाले डिप्रेशन के चलते अगले एक हफ्ते के भीतर तापमान सामान्य से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस नीचे लुढ़क सकता है, जिससे समय से पहले ही कड़ाके की ठंड की शुरुआत होने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं।
आमतौर पर अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में गुलाबी ठंड की हल्की दस्तक होती है, लेकिन इस बार चक्रवात अर्नब के कारण बनी मौसमी प्रणालियों ने वातावरण में अचानक नमी और ठंडी हवाओं का दबाव कई गुना बढ़ा दिया है। जमीन से टकराने के बाद यह तूफान अब धीरे-धीरे कमजोर होकर गहरे दबाव (Deep Depression) में तब्दील हो रहा है और उत्तर-उत्तर-पूर्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से अगले 7 दिनों तक देश के कई राज्यों में बादलों का डेरा रहेगा, रुक-रुक कर आंधी-तूफान के साथ बारिश होगी और दिन तथा रात के तापमान में भारी अंतर देखने को मिलेगा।
अगले 7 दिन कैसा रहेगा मौसम? चक्रवात और पश्चिमी विक्षोभ का दोहरा प्रभाव
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय मौसम पर दोहरी मौसमी प्रणाली एक साथ असर डाल रही है। एक तरफ जहां दक्षिण और पूर्वी भारत में चक्रवात अर्नब की बची हुई नामी और चक्रवाती हवाएं बारिश करवा रही हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तर-पश्चिम भारत में एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) भी सक्रिय हो रहा है। इन दोनों मौसमी प्रणालियों के आपस में टकराने के कारण अगले एक हफ्ते का मौसम बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है:
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शुरुआती 48 घंटे (28-30 अक्टूबर): आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी रहेगा। इस दौरान 50 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलेंगी। उत्तर प्रदेश और बिहार के दक्षिणी हिस्सों में भी बादलों की आवाजाही के साथ हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जाएगी।
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मध्य के 3 दिन (31 अक्टूबर – 2 नवंबर): जैसे-जैसे तूफान की प्रणाली पूर्वी हिमालय और पूर्वोत्तर भारत की ओर खिसकेगी, उत्तर भारत के मैदानी इलाकों—दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी यूपी—में पश्चिमी विक्षोभ का असर दिखाई देगा। इन इलाकों में आसमान में आंशिक बादल छाए रहेंगे, कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी हो सकती है और उत्तरी दिशा से आने वाली ठंडी हवाओं की गति बढ़ जाएगी।
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हफ्ते का आखिरी चरण (3-5 नवंबर): देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का सिलसिला थम जाएगा, लेकिन बारिश के बाद आसमान साफ होते ही ‘रेडिएशन कूलिंग’ के चलते रात का न्यूनतम तापमान तेजी से गिरेगा। सुबह और शाम के समय घना कोहरा और धुंध (Fog & Mist) देखने को मिलेगी, जिससे पहली बार ठंड का वास्तविक अहसास लोगों को अपनी गिरफ्त में लेगा।
किन राज्यों में बारिश और ठंड का सबसे ज्यादा अलर्ट?
चक्रवात अर्नब के प्रभाव से देश के 10 से अधिक राज्यों में मौसम का मिजाज बदला हुआ है। मौसम विभाग ने अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों के लिए विस्तृत चेतावनी जारी की है:
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आंध्र प्रदेश और ओडिशा: विशाखापट्टनम, काकीनाडा, अनकापल्ली, बालासोर और गोपालपुर जैसे तटीय जिलों में अगले 24 से 36 घंटे तक अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है। निचले इलाकों में जलभराव और नदियों के उफान पर रहने का खतरा बना हुआ है।
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उत्तर प्रदेश और बिहार: यूपी के प्रयागराज, वाराणसी, मिर्जापुर, सोनभद्र और बुंदेलखंड के इलाकों के साथ-साथ दक्षिण बिहार के गया, नवादा, रोहतास और औरंगाबाद में चक्रवात की नमी से आंधी-बारिश की संभावना बनी रहेगी। दिन के तापमान में 3 से 5 डिग्री की गिरावट आएगी, जिससे उमस भरी गर्मी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
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मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़: रीवा, सतना, सीधी, शहडोल, बिलासपुर और रायपुर संभाग में मूसलाधार बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। बारिश के कारण कटनी और पन्ना बेल्ट में रात का पारा 14 डिग्री के नीचे आ चुका है, जो आगे और लुढ़केगा।
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पहाड़ी राज्य (उत्तराखंड, हिमाचल व कश्मीर): चक्रवात और पश्चिमी विक्षोभ के संयुक्त असर से केदारनाथ, बद्रीनाथ, लाहौल-स्पीति और किन्नौर की ऊंची चोटियों पर हल्की से मध्यम बर्फबारी का नया दौर शुरू हो रहा है। पहाड़ों पर हो रही इस बर्फबारी की सीधी ठंडी हवाएं पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के मैदानों को तेजी से ठंडा करेंगी।
खेती-किसानी पर असर: किसानों के लिए दोहरी चुनौती
अक्टूबर के अंत में होने वाली यह अप्रत्याशित आंधी और बारिश किसानों के लिए गंभीर चिंता का सबब बन गई है। इस समय देश भर के खेतों में धान की पकी हुई फसल या तो कटाई के चरण में है या फिर मंडियों में खुले आसमान के नीचे रखी हुई है। चक्रवाती हवाओं के साथ तेज बारिश होने से धान की खड़ी फसल के खेतों में बिछ जाने (लॉजिंग) की भारी आशंका है, जिससे दानों की चमक और पैदावार दोनों प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा, जिन किसानों ने रबी की मुख्य फसल यानी सरसों, आलू, मटर और दलहन की अगेती बुवाई कर दी थी, उनके खेतों में जलभराव होने से बीज के सड़ने का खतरा पैदा हो गया है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में पानी की तत्काल निकासी का प्रबंध करें, फसलों की कटाई को दो-तीन दिन के लिए टालें और कटी हुई उपज को सुरक्षित तिरपाल से ढककर रखें। हालांकि, जिन किसानों को गेहूं की बुवाई करनी है, उनके लिए तापमान में यह अचानक आई गिरावट और जमीन की पर्याप्त नमी आगे चलकर बेहद फायदेमंद साबित होगी।
स्वास्थ्य और जनजीवन: वायरल बुखार और प्रदूषण का बढ़ता खतरा
मौसम के इस अचानक यू-टर्न से आम जनजीवन और स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका है। दिन में तेज धूप और रात में अचानक गिरते तापमान की वजह से ‘थर्मल शॉक’ के मामले बढ़ेंगे। डॉक्टरों ने बच्चों और बुजुर्गों को बदलते मौसम में वायरल इन्फेक्शन, सर्दी-जुकाम, गले की खराश और सांस की बीमारियों से सतर्क रहने की हिदायत दी है।
इसके साथ ही, बारिश थमने के बाद जब हवा की गति मंद होगी और तापमान गिरेगा, तो मैदानी इलाकों में नमी और धूल-धुएं के मिलने से ‘स्मॉग’ (Smog) की चादर खिंच सकती है। खासकर दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के ‘खराब’ से ‘बेहद खराब’ श्रेणी में जाने का खतरा बढ़ जाएगा। आने वाले सात दिन पूरे उत्तर और पूर्वी भारत के लिए बदलते मौसम, सतर्कता और गर्म कपड़ों को अलमारी से बाहर निकालने का स्पष्ट संकेत लेकर आए हैं।
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