
मौसम बदलते ही या इन्फेक्शन की चपेट में आने पर जब चिकनपॉक्स यानी छोटी माता का हमला होता है, तो पूरा शरीर तेज बुखार, कमजोरी और पानी भरे लाल छालों से भर जाता है। एक-दो हफ्तों के भीतर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता वायरस को खत्म कर देती है और पपड़ियां सूखकर गिरने लगती हैं, लेकिन असली मानसिक परेशानी तब शुरू होती है जब मरीज आईना देखता है। चेहरे, माथे और गालों पर गहरे भूरे-काले धब्बे और कई जगह छोटे-छोटे गड्ढे रह जाते हैं। दरअसल, जब चिकनपॉक्स के फफोले सूखते हैं, तो त्वचा में तेज खुजली होती है। अनजाने में या नींद में इन फफोलों को खरोंचने या जबरन पपड़ी नोंचने से त्वचा की ऊपरी एपिडर्मिस और अंदरूनी डर्मिस परत गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाती है। मेडिकल भाषा में इसे पोस्ट-इंफ्लेमेटरी हाइपरपिग्मेंटेशन और एट्रोफिक स्कारिंग कहा जाता है। चूंकि चेहरे की त्वचा शरीर के बाकी अंगों से अधिक नाजुक होती है, इसलिए यहां कोलेजन फाइबर टूटने से गड्ढे बन जाते हैं और मेलेनिन का उत्पादन बढ़ने से काले निशान जम जाते हैं। अगर समय रहते इन निशानों की सही देखभाल न की जाए, तो ये हमेशा के लिए चेहरे की बनावट को प्रभावित कर सकते हैं।
वर्जिन नारियल तेल की मालिश: त्वचा के गहरे टिश्यूज की हीलिंग का अचूक उपाय
भारतीय घरों में पीढ़ियों से त्वचा की हर छोटी-बड़ी समस्या के लिए नारियल तेल को रामबाण माना जाता रहा है, और चिकनपॉक्स के निशानों पर यह वैज्ञानिक रूप से भी बेहद सटीक बैठता है। नारियल के तेल में भारी मात्रा में लॉरिक एसिड, कैप्रिक एसिड और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं, जो डैमेज हो चुकी त्वचा की कोशिकाओं को तेजी से रिपेयर करने की क्षमता रखते हैं। इसके अलावा इसमें मौजूद फैटी एसिड्स त्वचा की गहराई में जाकर नई कोशिकाओं के निर्माण को गति देते हैं और कोलेजन उत्पादन को उत्तेजित करते हैं। इस उपाय को आजमाने के लिए हमेशा शुद्ध कोल्ड-प्रेस या एक्स्ट्रा वर्जिन नारियल तेल का ही चुनाव करें। रात को सोने से पहले चेहरे को किसी सौम्य फेसवॉश से धोकर सुखा लें और फिर अपनी उंगलियों के पोरों पर 3-4 बूंदें तेल लेकर दाग और गड्ढों वाले हिस्से पर हल्के हाथों से सर्कुलर मोशन में 5 से 10 मिनट तक मालिश करें। इसे रात भर त्वचा पर लगा रहने दें ताकि इसके पोषक तत्व रोमछिद्रों में समा सकें। नियमित रूप से तीन से चार हफ्ते तक यह उपाय करने से त्वचा की रंगत एकसमान होने लगती है और गहरे निशान धीरे-धीरे हल्के पड़ने लगते हैं।
ताजा एलोवेरा जेल और विटामिन-ई का जादुई संगम मिटाएगा काले निशान
अगर आपके चेहरे पर चिकनपॉक्स के बाद लालिमा, सूखापन और काले धब्बे एक साथ बने हुए हैं, तो शुद्ध एलोवेरा जेल आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। एलोवेरा में ‘एलोइन’ नाम का प्राकृतिक डीपिग्मेंटिंग तत्व पाया जाता है, जो त्वचा के अत्यधिक मेलेनिन को तोड़कर हाइपरपिग्मेंटेशन को तेजी से खत्म करता है। इसके साथ ही इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण त्वचा की जलन को शांत करते हैं और नई स्वस्थ त्वचा लाने में मदद करते हैं। इसका सबसे बेहतरीन परिणाम पाने के लिए घर में लगे एलोवेरा के ताजे पौधे से पत्ता काटकर उसका पारदर्शी पल्प निकालें। इस एक चम्मच ताजे जेल में मेडिकल स्टोर पर मिलने वाला एक विटामिन-ई (Evion) कैप्सूल काटकर उसका तेल अच्छी तरह मिला लें। इस गाढ़े मिश्रण को सीधे चिकनपॉक्स के निशानों पर एक फेस पैक की तरह लगाएं और सूखने के लिए 30 से 40 मिनट तक छोड़ दें। इसके बाद ताजे ठंडे पानी से चेहरा धो लें। विटामिन-ई और एलोवेरा का यह मिश्रण न केवल दागों को हल्का करता है बल्कि त्वचा के लचीलेपन को बढ़ाकर छोटे गड्ढों को भरने में भी जबरदस्त भूमिका निभाता है।
कच्चा शहद और ओट्स का लेप: प्राकृतिक एक्सफोलिएशन और डीप मॉइस्चराइजेशन
चिकनपॉक्स के निशान इसलिए भी जिद्दी हो जाते हैं क्योंकि उनके ऊपर मृत त्वचा कोशिकाओं यानी डेड स्किन सेल्स की एक सख्त परत जम जाती है। इसे हटाने के लिए बाजार के केमिकल वाले हार्श स्क्रब का इस्तेमाल करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे गड्ढे और गहरे हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में शहद और ओट्स का होममेड पैक सबसे सुरक्षित और असरदार विकल्प साबित होता है। कच्चा शहद एक प्राकृतिक ह्यूमेक्टेंट है जो हवा से नमी खींचकर त्वचा में लॉक करता है और इसमें मौजूद एंजाइम्स त्वचा की रंगत निखारते हैं। इस पैक को तैयार करने के लिए दो चम्मच पिसे हुए ओट्स में एक चम्मच शुद्ध शहद और आधा चम्मच कच्चा दूध मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। इसे चेहरे पर हल्के हाथों से लगाएं और 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें। जब यह हल्का सूख जाए, तो उंगलियों को गीला करके बेहद हल्के दबाव के साथ गोलाई में घुमाते हुए इसे छुड़ाएं और गुनगुने पानी से धो लें। ओट्स त्वचा की मृत परत को बिना नुकसान पहुंचाए हटाता है, जिससे नीचे की नई और चमकदार त्वचा बाहर आती है।
चंदन और गुलाब जल का पारंपरिक लेप लौटाएगा चेहरे का प्राकृतिक निखार
आयुर्वेद में शुद्ध लाल या सफेद चंदन को त्वचा की जलन शांत करने और किसी भी प्रकार के जख्म के निशान मिटाने के लिए सर्वोच्च स्थान दिया गया है। चिकनपॉक्स के बाद त्वचा बेहद संवेदनशील हो जाती है और उसमें अंदरूनी गर्माहट बनी रहती है, जिसे शांत करने में चंदन की शीतलता बहुत काम आती है। शुद्ध चंदन पाउडर में प्राकृतिक गुलाब जल मिलाकर एक चिकना लेप तैयार करें। यदि आपकी त्वचा बहुत रूखी है, तो इसमें आधा चम्मच बादाम का तेल भी मिलाया जा सकता है। इस लेप को रोजाना शाम के समय चेहरे पर लगाएं और पूरी तरह सूखने के बाद सामान्य पानी से धो लें। चंदन त्वचा में मेलेनिन के अत्यधिक स्राव को नियंत्रित करता है, जिससे धूप में निकलने पर भी दाग गहरे नहीं पड़ते। इसके नियमित इस्तेमाल से त्वचा के पोर्स टाइट होते हैं और चेहरे की खोई हुई चमक कुछ ही हफ्तों में वापस लौटने लगती है।
घरेलू नुस्खों के साथ इन सावधानियों का रखें ध्यान, कब लें डर्मेटोलॉजिस्ट की मदद
घरेलू उपाय तभी पूरी तरह असर दिखाते हैं जब आप कुछ जरूरी बुनियादी बातों का सख्ती से पालन करें। चिकनपॉक्स के ठीक होने के कम से कम दो से तीन महीने तक तेज धूप में सीधे निकलने से बचें, क्योंकि अल्ट्रावायलेट किरणें नए बने नाजुक टिश्यूज को झुलसाकर दागों को हमेशा के लिए पक्का काला कर देती हैं। घर से बाहर निकलते समय कम से कम 30 से 50 एसपीएफ वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाना कभी न भूलें। दिन भर में 8 से 10 गिलास पानी पिएं और डाइट में संतरा, आंवला, नींबू और पपीता जैसे विटामिन-सी से भरपूर फल शामिल करें ताकि शरीर के भीतर कोलेजन का निर्माण तेज हो सके। कोई भी नया घरेलू नुस्खा पूरे चेहरे पर लगाने से पहले कलाई या कान के पीछे पैच टेस्ट जरूर कर लें। यदि चिकनपॉक्स को हुए कई महीने बीत चुके हैं और चेहरे पर गहरे गड्ढे (आइस-पिक या बॉक्सकार स्कार्स) बन चुके हैं, तो केवल घरेलू नुस्खों के भरोसे न रहें। ऐसे मामलों में किसी अनुभवी डर्मेटोलॉजिस्ट (त्वचा रोग विशेषज्ञ) से मिलकर केमिकल पील्स, माइक्रोनीडलिंग, डर्मा रोलर या फ्रैक्शनल लेजर थेरेपी की सलाह लें, जिससे चेहरे की त्वचा को शत-प्रतिशत पहले जैसा खूबसूरत और बेदाग बनाया जा सके।
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