
मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी भारी तनाव और टकराव के बीच ईरान की संसद (मजलिस) ने मेहरदाद अखलाकी केताबची (Mehrdad Akhlaghi Ketabchi) को देश का नया रक्षा और सैन्य बल लॉजिस्टिक्स मंत्री नियुक्त कर दिया है। पूर्व रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह के निधन के बाद यह पद लंबे समय से खाली चल रहा था। ईरानी संसद में भारी बहुमत (237 सांसदों के समर्थन) से अपनी नियुक्ति पर मुहर लगते ही मेहरदाद अखलाकी ने अपने पहले ही संबोधन में अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे तौर पर ललकार दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया कि ईरान किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव या अमेरिकी धमकियों के आगे झुकने वाला नहीं है और यदि अमेरिका ने ईरान की संप्रभुता के खिलाफ कोई भी दुस्साहस किया, तो उसका अंजाम वाशिंगटन की कल्पना से कहीं अधिक विध्वंसक और भयानक होगा।
‘मदर ऑफ ऑल बम’ की धमकियों पर पलटवार: ‘सैनिकों के ताबूत गिनने के लिए तैयार रहें’
हाल के दिनों में अमेरिकी सैन्य हलकों और रणनीतिकारों की तरफ से यह चर्चाएं तेज थीं कि यदि तनाव बढ़ता है, तो अमेरिका ईरान के रणनीतिक और भूमिगत न्यूक्लियर ठिकानों को तबाह करने के लिए अपने सबसे भारी गैर-परमाणु बम ‘GBU-43/B’ यानी ‘मदर ऑफ ऑल बम’ (MOAB) का इस्तेमाल कर सकता है। इस पर बेहद आक्रामक तेवर दिखाते हुए ईरानी रक्षा मंत्री ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने ईरान की धरती पर एक भी बम गिराने की हिमाकत की, तो उसे इस बात का पहले से हिसाब लगा लेना चाहिए कि खाड़ी क्षेत्र से उसके कितने सैनिकों के शव क्षैतिज स्थिति (ताबूतों में) में वापस अमेरिका भेजे जाएंगे। अखलाकी ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि बमों का असली जनक (Father of Bombs) ईरान के अवाम और उसकी सेना की दृढ़ इच्छाशक्ति है, जो दुश्मन की सोच, रणनीति और मानसिकता पर उससे कहीं ज्यादा विनाशकारी प्रभाव डालेगी।
ट्रंप को दी खाड़ी से सेना सुरक्षित निकालने की नसीहत
अखलाकी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नसीहत देते हुए कहा कि अमेरिका को खाड़ी क्षेत्र में किसी नए सैन्य अभियान का जोखिम उठाने के बजाय इस बात पर अपना ध्यान लगाना चाहिए कि वह मध्य पूर्व से अपने सैनिकों को सुरक्षित तरीके से बाहर कैसे निकाले। उन्होंने कहा कि ईरान के रक्षा बल और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) किसी भी स्तर के पूर्ण युद्ध या सामरिक हमले का सामना करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के सैन्य-औद्योगिक ढांचे को और मजबूत करने, स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक का विस्तार करने तथा आधुनिक रक्षा प्रणालियों के निर्माण को तेजी से आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल व्यापार पर तनातनी बरकरार
रक्षा मंत्री के इस कड़े बयान के साथ ही रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल समुद्री मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Hormuz Strait) को लेकर भी वाकयुद्ध तेज हो गया है। एक तरफ जहां ईरान ने इलाके में अमेरिकी सहयोग से गुजरने वाले जहाजों और सुरक्षा गतिविधियों पर कड़ा रुख अख्तियार कर रखा है, वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग चालू है और वैश्विक तेल-गैस आपूर्ति सुचारू रूप से आगे बढ़ रही है। इधर डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ चल रहा संकट जल्द सुलझा लिया जाएगा जिससे वैश्विक तेल की कीमतें नीचे आएंगी, लेकिन तेहरान के नए रक्षा नेतृत्व के इस आक्रामक रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच टकराव कम होने के बजाय और अधिक गहरा सकता है।
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