‘चुनाव में नहीं टूटी थी ममता बनर्जी की टांग’: नंदीग्राम की जनसभा में शुभेंदु अधिकारी के दावे से मचा सियासी घमासान

पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के मतदान से ठीक पहले सियासी बयानबाजी ने नया मोड़ ले लिया है। बिरुलिया बाजार और आसपास के क्षेत्रों में चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 2021 के ऐतिहासिक विधानसभा चुनाव के उस सबसे चर्चित घटनाक्रम को लेकर बड़ा दावा किया है, जिसने पूरे चुनाव का रुख मोड़ दिया था।

शुभेंदु अधिकारी ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान नंदीग्राम के बिरुलिया में ममता बनर्जी के पैर में न तो कोई फ्रैक्चर हुआ था और न ही उनकी टांग टूटी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता की सहानुभूति हासिल करने और चुनावी लाभ के लिए कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम (SSKM) अस्पताल में फर्जी प्लास्टर चढ़ाया गया था।

एसएसकेएम अस्पताल और डॉक्टरों की भूमिका पर उठाए सवाल

शुभेंदु अधिकारी ने उस समय इलाज करने वाले डॉक्टरों की निष्पक्षता पर भी तीखा प्रहार किया:

  • फर्जी मेडिकल रिपोर्ट का आरोप: शुभेंदु ने कहा कि एसएसकेएम अस्पताल के डॉक्टरों ने राजनीतिक दबाव में आकर झूठी चोट और फ्रैक्चर का दिखावा किया।

  • ‘प्लास्टर का सच’: उन्होंने दावा किया कि डॉक्टरों ने सिर्फ बैंडेज और कच्चा प्लास्टर लपेट दिया ताकि व्हीलचेयर पर बैठकर पूरे राज्य में घूमा जा सके और जनता के बीच ‘हमले’ की झूठी कहानी गढ़ी जा सके।

  • बिरुलिया की जनता को क्लीन चिट: शुभेंदु ने कहा कि ममता बनर्जी ने नंदीग्राम और बिरुलिया के सीधे-सादे लोगों पर उन पर हमला करने और धक्का देने का झूठा आरोप मढ़ा था, जबकि जांच में भी यह साबित हुआ था कि कार का दरवाजा खंभे से टकराने के कारण घटना घटी थी, कोई सुनियोजित हमला नहीं हुआ था।

2021 का वह वाकया जिसने बदल दिया था चुनावी विमर्श

गौरतलब है कि 10 मार्च 2021 को नंदीग्राम में नामांकन दाखिल करने के बाद प्रचार के दौरान ममता बनर्जी के पैर में चोट आई थी:

  • व्हीलचेयर अभियान: चोट के तुरंत बाद ममता बनर्जी को कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल लाया गया था, जहां उनके पैर पर प्लास्टर लगाया गया था। इसके बाद उन्होंने पूरे चुनाव में व्हीलचेयर पर बैठकर सघन प्रचार किया था।

  • टीएमसी का नैरेटिव: तृणमूल कांग्रेस ने इसे भाजपा की ‘साजिश’ और ममता पर ‘जानलेवा हमला’ करार देकर पूरे राज्य में सहानुभूति की जबरदस्त लहर पैदा की थी, जिसका पार्टी को बंपर चुनावी फायदा मिला था।

  • नंदीग्राम का कड़ा मुकाबला: हालांकि पूरे राज्य में टीएमसी जीती थी, लेकिन नंदीग्राम सीट पर शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 1,956 वोटों के बेहद करीबी अंतर से हरा दिया था।

उपचुनाव से पहले टीएमसी पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 6 अक्टूबर को नंदीग्राम में होने वाले उपचुनाव से पहले शुभेंदु अधिकारी का यह बयान सीधे तौर पर टीएमसी के उस पुराने सहानुभूति कार्ड को ध्वस्त करने का प्रयास है।

अल्पसंख्यक बहुल बिरुलिया बाजार में खड़े होकर उन्होंने स्थानीय मतदाताओं को यह समझाने की कोशिश की कि टीएमसी ने अपनी राजनीति चमकाने के लिए इस इलाके के लोगों को बदनाम किया था। उपचुनाव में बीजेपी उम्मीदवार हसिरानी रथ के पक्ष में माहौल बनाने के लिए शुभेंदु लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं, जिससे राज्य का राजनीतिक पारा चढ़ गया है।

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