
उत्तर प्रदेश की राजनीति के गलियारों में प्रशासनिक महकमे से आए दिन नए चेहरे कदम रखते हैं, लेकिन जब कोई तेज-तर्रार, ईमानदार और जनता के बीच लोकप्रिय रहा आईएएस अधिकारी प्रशासनिक कुर्सी छोड़कर सीधे चुनावी मैदान में उतरने का फैसला करता है, तो सूबे की सियासत में भूचाल आना स्वाभाविक है। कुछ ऐसा ही सनसनीखेज कदम उठाया है उत्तर प्रदेश की चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने। अपनी प्रशासनिक कार्यशैली, सख्त फैसलों और जनहित के कार्यों के लिए पहचानी जाने वाली पूर्व आईएएस अधिकारी ने अब नौकरशाही से पूरी तरह किनारा करते हुए अपनी खुद की नई राजनीतिक पार्टी का ऐलान कर दिया है। उन्होंने ‘जननीति भारत’ (Janneeti Bharat) नाम से राजनीतिक दल के गठन की घोषणा करते हुए यह साफ कर दिया है कि वे आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में एक मजबूत विकल्प बनकर उभरेंगी। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी ऐलान कर दिया है कि वे उत्तर प्रदेश की बेहद हॉट सीट मानी जाने वाली मिर्जापुर सदर (नगर) विधानसभा सीट से खुद चुनावी मैदान में उतरेंगी। उनके इस अचानक और बड़े राजनीतिक ऐलान के बाद से उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों में सरगर्मी काफी तेज हो गई है।
अपनी तेज-तर्रार कार्यकुशलता के लिए प्रशासनिक सेवा में खास पहचान बनाने वाली दिव्या मित्तल ने अपनी नई पार्टी ‘जननीति भारत’ के गठन की घोषणा के साथ ही पारंपरिक राजनीतिक दलों की नींद उड़ा दी है। सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों से अपने समर्थकों और जनता के बीच आए इस संदेश में उन्होंने स्पष्ट किया कि देश और प्रदेश को पारदर्शी, विकासोन्मुखी और जन-केंद्रित राजनीति की सख्त जरूरत है। पारंपरिक पार्टियों की कार्यशैली से इतर वे जनता की वास्तविक समस्याओं को सीधे शासन के पटल पर रखने और धरातल पर बदलाव लाने के उद्देश्य से राजनीति में उतरी हैं। मिर्जापुर जिले में बतौर अधिकारी उनके कार्यकाल के दौरान जनता के साथ जो उनका सीधा जुड़ाव और संवाद बना था, वही उनकी राजनीतिक ताकत बनता दिख रहा है। ‘जननीति भारत’ पार्टी के गठन के साथ ही उन्होंने राज्य के अन्य बुद्धिजीवियों, युवाओं और बदलाव चाहने वाले आम नागरिकों को भी अपनी पार्टी से जुड़ने का खुला आह्वान किया है, जिससे यह साफ हो गया है कि आगामी चुनावों में यह नया दल एक बड़ा सियासी फैक्टर साबित हो सकता है।
दिव्या मित्तल द्वारा मिर्जापुर सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद से ही स्थानीय स्तर पर राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। आखिर उन्होंने इसी सीट को क्यों चुना, इसके पीछे उनके पुराने प्रशासनिक अनुभव और स्थानीय जनता के साथ उनका भावनात्मक जुड़ाव मुख्य वजह माना जा रहा है। अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान उन्होंने मिर्जापुर के विकास, कानून व्यवस्था और जन कल्याणकारी योजनाओं के संचालन में जो अमिट छाप छोड़ी थी, उसका सीधा लाभ उन्हें चुनावी मैदान में मिल सकता है। मिर्जापुर सदर सीट पर उनकी उम्मीदवारी से वहां के मौजूदा समीकरण पूरी तरह से बदलते हुए नजर आ रहे हैं। स्थानीय मतदाताओं के बीच उनकी छवि एक ऐसी ईमानदार और दबंग अधिकारी की है जो जनता के लिए सीधे उपलब्ध रहती थीं, और यही खूबी उनके चुनावी अभियान की सबसे बड़ी ताकत बनने जा रही है। विरोधी दलों के दिग्गज नेता भी अब इस सीट पर अपने चुनावी गणित को नए सिरे से टटोलने में जुट गए हैं।
राजनीतिक दल ‘जननीति भारत’ की स्थापना के पीछे मुख्य रूप से सुशासन, भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था और युवाओं को रोजगार व सही मंच प्रदान करने का एजेंडा है। पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल ने अपने संबोधन और घोषणा के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया कि राजनीति केवल सत्ता हासिल करने का जरिया नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन स्तर को ऊपर उठाने का सबसे सशक्त माध्यम है। उनकी पार्टी शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और पारदर्शी प्रशासन को अपने मुख्य मुद्दों के रूप में जनता के सामने रख रही है। एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में उन्होंने जमीनी स्तर पर सिस्टम की कमियों को बहुत करीब से देखा है, और अब वे उन्हीं कमियों को सुधारने के लिए नीतिगत बदलावों के साथ राजनीति में उतरी हैं। जनता के बीच उनकी यह छवि कि वह सिर्फ वादे नहीं करतीं बल्कि काम करके दिखाती हैं, उन्हें अन्य पारंपरिक राजनेताओं से अलग खड़ा करती है।
आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पूर्व आईएएस अधिकारी द्वारा बनाई गई ‘जननीति भारत’ पार्टी और उनका खुद चुनाव लड़ने का फैसला यूपी की राजनीति में एक नया प्रयोग माना जा रहा है। अक्सर यह देखा गया है कि प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद अधिकारी किसी स्थापित दल का दामन थाम लेते हैं, लेकिन खुद की नई पार्टी बनाकर मैदान में उतरना एक बड़ा और साहसिक कदम है। जनता भी अब पारंपरिक दांव-पेच से ऊबकर साफ-सुथरी और पढ़े-लिखे नेतृत्व की तलाश में रहती है, ऐसे में दिव्या मित्तल का यह प्रयास पढ़ा-लिखे और प्रबुद्ध वर्ग को अपनी ओर आकर्षित कर सकता है। मिर्जापुर सदर सीट से शुरू होने वाला यह राजनीतिक सफर आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश के दूसरे जिलों और विधानसभा क्षेत्रों तक कितना असर दिखाता है, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि इस घोषणा ने चुनावी समर को और अधिक रोमांचक और कड़ा मुकाबला बना दिया है।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया