नवरात्रि में घर पर खुद कर रहे हैं हवन? इन सरल मंत्रों से दें आहुति, जानें सामग्री, शुभ मुहूर्त और पूर्णाहुति का सही नियम

सनातन धर्म में नवरात्रि के नौ दिनों तक चलने वाली शक्ति उपासना का विधिवत समापन हवन यानी यज्ञ के माध्यम से ही पूर्ण माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, नौ दिनों तक किए गए दुर्गा सप्तशती पाठ, मंत्र जाप और उपवास की ऊर्जा को अग्नि देव के माध्यम से सीधे देवी भगवती और समस्त देवी-देवताओं तक पहुंचाने का सबसे पवित्र जरिया हवन ही है। कई परिवारों में नवमी के दिन कन्या पूजन यानी कंजक खिलाने से पहले हवन करने की परंपरा होती है, जबकि कुछ परंपराओं में पहले कन्याओं को आदरपूर्वक भोजन कराकर उसके बाद परिवार सहित हवन कुंड के समक्ष बैठकर आहुतियां दी जाती हैं। कई बार लोग यह सोचकर संकोच में पड़ जाते हैं कि क्या बिना किसी आचार्य या पंडित जी के घर पर सादगी से हवन किया जा सकता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यदि मन में सच्ची श्रद्धा, सात्विकता और पवित्रता हो, तो परिवार का कोई भी सदस्य सरल वैदिक और पौराणिक मंत्रों का उच्चारण करते हुए अपने घर के आंगन या पूजा स्थल पर सुख-शांति व समृद्धि के लिए हवन संपन्न कर सकता है।

नवरात्रि हवन की तिथियां और शुभ समय: कब और कैसे करें आयोजन

शारदीय नवरात्रि में मुख्य रूप से अष्टमी या महानवमी तिथि के पावन संयोग में ही हवन का विधान सर्वोत्तम माना गया है। पंचांगीय गणनाओं के अनुसार 19 अक्टूबर 2026 को अष्टमी और नवमी दोनों ही महत्वपूर्ण तिथियों का संयोग बन रहा है। अष्टमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक प्रभावी है, जिसके ठीक बाद महानवमी तिथि का शुभारंभ हो रहा है जो अगले दिन 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगी। इस पावन कालखंड में जो साधक अष्टमी का व्रत रखते हैं, वे सुबह 10:51 बजे से पूर्व हवन कर सकते हैं, जबकि नवमी का पारण और पूर्ण अनुष्ठान करने वाले श्रद्धालु नवमी तिथि के दौरान दोपहर या अगले दिन सुबह शुभ चौघड़िया मुहूर्त में हवन संपन्न कर सकते हैं। हवन की तैयारी करते समय हमेशा अपने स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के समय का भी ध्यान रखें ताकि पूजा शुभ काल में ही संपन्न हो सके।

जरूरी हवन सामग्री और घर में सुरक्षित हवन कुंड तैयार करने के नियम

घर पर एक सात्विक और व्यवस्थित हवन करने के लिए बाजार से बहुत ज्यादा तामझाम जुटाने की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि कुछ बुनियादी और शुद्ध सामग्रियों से भी पूर्ण यज्ञ किया जा सकता है। हवन के लिए मुख्य रूप से तांबे, पीतल या मिट्टी का बना स्वच्छ हवन कुंड, आम या पलाश की सूखी समिधा (लकड़ियां), शुद्ध गाय का घी, तिल, जौ (यव), गुग्गल, लोबान और कपूर से युक्त हवन सामग्री, आचमन व आहुति के लिए तांबे का चम्मच या आम के पत्ते, रोली, अक्षत, कलावा, धूप, ताजे पुष्प और गंगाजल एकत्रित कर लें। हवन कुंड के पास मां दुर्गा की सुंदर तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। पूर्णाहुति के लिए एक जटा वाला सूखा नारियल (गोला) और उस पर लपेटने के लिए कलावा या लाल कपड़ा अवश्य रखें। इसके साथ ही सुरक्षा का विशेष ध्यान रखते हुए हवन कुंड को हमेशा ऐसे खुले और हवादार स्थान पर रखें जहां से धुआं आसानी से बाहर निकल सके। पर्दे, कालीन, सोफे या किसी भी ज्वलनशील वस्तु से हवन कुंड को सुरक्षित दूरी पर रखें, पास में एक लोटा जल जरूर भरकर रखें और जलती हुई अग्नि को कभी भी अकेला न छोड़ें।

संकल्प और अग्नि प्रज्वलन: हवन आरंभ करने की चरणबद्ध विधि

हवन शुरू करने से पूर्व स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ व सात्विक वस्त्र धारण करें और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशा या ऊन के आसन पर बैठ जाएं। सबसे पहले गंगाजल से अपने ऊपर और पूजा सामग्री पर छिड़काव कर पवित्रता करें। इसके बाद हाथ में थोड़ा जल, अक्षत और पुष्प लेकर अपने कुलदेवता, इष्टदेव और मां भगवती दुर्गा का ध्यान करते हुए मन ही मन संकल्प लें कि आप परिवार के कल्याण, आरोग्य और नवरात्रि अनुष्ठान की सफलता के लिए यह पावन हवन कर रहे हैं। अब हवन कुंड में समिधा को व्यवस्थित रूप से सजाएं और कपूर की टिकिया रखकर माचिस से अग्नि प्रज्वलित करें। जैसे ही अग्नि प्रज्वलित हो जाए, हाथ जोड़कर अग्नि देव का ध्यान करें और गाय के घी की तीन आहुतियां देकर उनका आह्वान करें। इसके बाद देवी-देवताओं के मंत्रों के साथ क्रमबद्ध आहुति देने का कार्य शुरू करें। आहुति देते समय अनामिका, मध्यमा और अंगूठे (मृगी मुद्रा) का प्रयोग करना शुभ माना जाता है।

नवरात्रि हवन में बोले जाने वाले मुख्य सिद्ध मंत्र और आहुति की विधि

हवन के दौरान उच्चारित होने वाले मंत्र वातावरण में सकारात्मक कंपन पैदा करते हैं और घर की नकारात्मक ऊर्जा को भस्म कर देते हैं। हवन करते समय नीचे दिए गए मंत्रों का बारी-बारी से स्पष्ट उच्चारण करें और प्रत्येक मंत्र के अंत में ‘स्वाहा’ बोलते हुए थोड़ी सी हवन सामग्री या घी की बूंदें अग्नि की तेज लौ में अर्पित करें:

  1. श्री गणेश वंदना मंत्र: किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत विघ्नहर्ता प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के स्मरण से होती है। हवन का आरंभ करते हुए इस मंत्र से आहुति दें:

    ॐ गं गणपतये नमः स्वाहा।

  2. अग्नि देव आह्वान मंत्र: देवताओं तक हविष्य पहुंचाने वाले अग्नि देव की कृपा पाने के लिए घी की आहुति देते हुए बोलें:

    ॐ अग्नये स्वाहा।

  3. मां दुर्गा का शक्ति मंत्र: मां जगदंबा की सामान्य कृपा और सभी बाधाओं के नाश के लिए इस मंत्र के साथ आहुति दें:

    ॐ दुं दुर्गायै नमः स्वाहा।

  4. मां दुर्गा का दिव्य नवार्ण मंत्र: नवरात्रि में इस परम सिद्ध नवार्ण मंत्र का हवन करना सबसे फलदायी माना गया है। कम से कम 11, 21 या अपनी सामर्थ्य अनुसार 108 बार इस मंत्र का उच्चारण करते हुए आहुतियां समर्पित करें:

    ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे स्वाहा।

  5. कल्याण एवं शांति मंत्र: सर्वमंगल की कामना के लिए देवी के इस प्रसिद्ध श्लोक के साथ आहुति दी जाती है:

    सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते स्वाहा॥

पूर्णाहुति का विधान और हवन की भस्म से रक्षा तिलक

जब सभी निर्धारित मंत्रों की आहुतियां पूरी हो जाएं, तो अंत में यज्ञ की पूर्णता के लिए ‘पूर्णाहुति’ दी जाती है। बिना पूर्णाहुति के कोई भी हवन अधूरा माना जाता है। इसके लिए सूखे नारियल के गोले के ऊपरी हिस्से को काटकर उसमें थोड़ा सा घी, लौंग का जोड़ा, बताशा, इलायची, मखाना और बची हुई हवन सामग्री भर लें। इस पर कलावा या लाल कपड़ा लपेटें। परिवार के सभी सदस्य खड़े होकर दोनों हाथों से इस नारियल को स्पर्श करें और अग्नि देव में समर्पित करते हुए “ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥ ॐ स्वाहा।” मंत्र का उच्चारण करें। इसके बाद आचमन करें, मां दुर्गा की सपरिवार खड़े होकर कपूर से आरती उतारें और हाथ जोड़कर जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना करें। जब हवन कुंड की अग्नि शांत हो जाए, तो उसकी पवित्र भस्म को परिवार के सभी सदस्यों के मस्तक पर तिलक के रूप में लगाएं और अंत में कंजकों व सभी परिजनों में सात्विक प्रसाद का वितरण करें।

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