
फ्रांस में जारी भयंकर उपद्रव, आगजनी और हिंसक झड़पों के बीच अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के मौजूदा आंतरिक संकट पर बेहद आक्रामक प्रतिक्रिया देते हुए एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय ट्रंप ने पेरिस समेत विभिन्न फ्रांसीसी शहरों में हो रही हिंसा का हवाला देते हुए दावा किया कि अनियंत्रित प्रवासन और ढीली सुरक्षा नीतियों के कारण पेरिस तेजी से अपनी मूल पहचान खो रहा है और जल्द ही यह एक मुस्लिम बहुल शहर में तब्दील हो जाएगा। ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम को पश्चिमी देशों की लिबरल नीतियों की विफलता करार देते हुए व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि फ्रांस जिस संकट से जूझ रहा है, वह असल में दशकों से नजरअंदाज की गई सख्त सीमाओं की कमी का सीधा नतीजा है।
सीमाएं तुरंत बंद करो: यूरोपीय नेतृत्व को ट्रंप की दो टूक नसीहत और अमेरिकी राजनीति का एंगल
फ्रांसीसी दंगों के बहाने ट्रंप ने न केवल यूरोप बल्कि अमेरिका के घरेलू राजनीतिक मंच पर भी सीमा सुरक्षा के मुद्दे को हवा दे दी है। उन्होंने यूरोपीय सरकारों को आगाह करते हुए कहा कि यदि अब भी बाहरी सीमाओं को पूरी तरह सील नहीं किया गया और अवैध घुसपैठ पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में पश्चिमी सभ्यता और उसकी संप्रभुता गंभीर खतरे में पड़ जाएगी। ट्रंप ने अपने कार्यकाल की ‘कड़े बॉर्डर’ वाली नीतियों की तारीफ करते हुए कहा कि जब तक किसी देश की सीमाएं सुरक्षित नहीं होतीं, तब तक वह राष्ट्र सुरक्षित नहीं रह सकता। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के प्रशासन की आलोचना करते हुए संकेत दिया कि कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए अत्यधिक कठोर कदम उठाने की जरूरत थी, लेकिन कमजोर नेतृत्व के कारण उपद्रवियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे खुलेआम राज्य की सत्ता को चुनौती दे रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में उभरा तनाव: ट्रंप के बयान पर फ्रांस और पश्चिमी विश्लेषकों की प्रतिक्रिया
ट्रंप के इस भड़काऊ और विवादित बयान ने यूरोपीय कूटनीतिक गलियारों में तीखी बहस छेड़ दी है। फ्रांस के राजनीतिक हलकों और मानवाधिकार विश्लेषकों का मानना है कि देश के इस बेहद संवेदनशील और नाजुक आंतरिक संकट का इस्तेमाल दूसरे देशों में अपने सियासी फायदे और ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है। फ्रांसीसी अधिकारियों ने पहले ही यह स्पष्ट किया है कि सड़कों पर हो रहा उपद्रव कानून व्यवस्था की समस्या है जिससे सरकार कड़ाई से निपट रही है, और इसे किसी खास धार्मिक या बाहरी चश्मे से देखना पूरी तरह अनुचित है। हालांकि, ट्रंप के इस बयान ने यूरोप में दक्षिणपंथी राजनीतिक दलों को नई ऊर्जा जरूर दे दी है, जो लंबे समय से इमिग्रेशन नीतियों पर कड़े कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। आने वाले समय में ट्रंप की यह टिप्पणी न केवल फ्रांस-अमेरिका के कूटनीतिक संबंधों में तल्खी बढ़ा सकती है, बल्कि वैश्विक मंच पर प्रवासन की बहस को और तेज कर सकती है।
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