
फ्रांस की राजधानी पेरिस समेत देश के कई बड़े शहर इस वक्त गंभीर अशांति और बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों की चपेट में हैं। सड़कों पर जलाई जा रही गाड़ियां, सार्वजनिक इमारतों पर पथराव और सुरक्षाबलों के साथ प्रदर्शनकारियों की सीधी भिड़ंत ने पूरे देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति को बेहद नाजुक मोड़ पर ला खड़ा किया है। राजधानी के प्रमुख चौराहों से लेकर मार्सिले, ल्योन और नैनटेरे जैसे प्रमुख इलाकों तक हालात इतने तनावपूर्ण हो चुके हैं कि सरकार को सामान्य पुलिस बल के साथ-साथ विशेष अर्धसैनिक टुकड़ियों और बख्तरबंद वाहनों को तैनात करना पड़ा है। लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए एलिसी पैलेस में आपातकालीन सुरक्षा बैठकें बुलाई गई हैं, जहां गृह मंत्रालय और शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने स्थिति पर पूरी तरह काबू पाने के लिए देशव्यापी आपातकाल (Emergency) लागू करने के विकल्प पर गंभीरता से विचार शुरू कर दिया है।
उपद्रवियों पर बरसे राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों: हिंसा को बताया पूरी तरह नाजायज और अस्वीकार्य
हिंसा और तोड़फोड़ की बढ़ती घटनाओं के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रदर्शनकारियों के हिंसक रुख की कड़े शब्दों में निंदा की है। कैबिनेट की उच्चस्तरीय बैठक के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन आगजनी, लूटपाट और सुरक्षाबलों पर हमलों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मैक्रों ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले उपद्रवियों को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि गणतंत्र की रक्षा के लिए सरकार हर आवश्यक कदम उठाएगी। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने नाबालिग बच्चों को सड़कों पर भड़क रही हिंसा का हिस्सा बनने से रोकें, क्योंकि गिरफ्तार किए गए उपद्रवियों में बड़ी संख्या बेहद कम उम्र के युवाओं की पाई गई है। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले किसी भी तत्व को बख्शा नहीं जाएगा और अदालतों के जरिए सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
शहर-शहर धधकती आग और सुरक्षाबलों का फ्लैग मार्च: आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त
देशभर में फैली इस हिंसा के चलते आम नागरिकों की दैनिक दिनचर्या पूरी तरह ठप पड़ गई है। कई प्रमुख शहरों में शाम ढलते ही सार्वजनिक परिवहन, मेट्रो नेटवर्क और बस सेवाओं को सुरक्षा कारणों से बंद किया जा रहा है ताकि भीड़ को एक जगह जमा होने से रोका जा सके। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, बैंक शाखाओं और शॉपिंग सेंटरों में तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाओं के बाद स्थानीय व्यापारी भारी आर्थिक नुकसान की आशंका से सहमे हुए हैं। सुरक्षाबलों ने संवेदनशील इलाकों में बैरिकेडिंग कर धारा 144 जैसे सख्त प्रतिबंध लागू कर दिए हैं और आंसू गैस के गोलों तथा वॉटर कैनन का इस्तेमाल कर भीड़ को तितर-बितर किया जा रहा है। फ्रांस के गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अब तक सैकड़ों पुलिसकर्मी इन हिंसक झड़पों में घायल हो चुके हैं, जबकि हजारों उपद्रवियों को हिरासत में लिया जा चुका है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठते सवाल और संकट समाधान की तलाश में जुटी फ्रांसीसी सरकार
फ्रांस में उपजे इस आंतरिक तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी महसूस किया जा रहा है। कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए फ्रांस यात्रा को लेकर सुरक्षा परामर्श जारी किए हैं, जिससे पर्यटन उद्योग पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह गतिरोध जल्द नहीं थमा, तो इससे फ्रांस की राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक स्थिति दोनों पर गहरा असर पड़ सकता है। सरकार पर एक तरफ जहां प्रदर्शनकारियों के असंतोष को दूर करने का सामाजिक दबाव है, वहीं दूसरी ओर देश के भीतर सुरक्षा और अमन-चैन बहाल करने की सख्त चुनौती बनी हुई है। आने वाले कुछ घंटे और दिन फ्रांस की घरेलू राजनीति और मैक्रों प्रशासन के कड़े प्रशासनिक फैसलों के लिहाज से बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।
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