‘लगा जैसे किडनैप कर लिया गया हो, 2 घंटे तक सड़कों पर घुमाती रही पुलिस’: दिल्ली में हिरासत से छूटने के बाद फूटा ममता बनर्जी का गुस्सा

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग और अन्य लोकतांत्रिक मुद्दों को लेकर आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ली गईं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने रिहाई के बाद केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर बड़ा और सनसनीखेज आरोप लगाया है। शनिवार देर शाम पुलिस हिरासत से छोड़े जाने के तुरंत बाद मीडिया को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि पुलिस का रवैया इतना मनमाना था कि उन्हें लगा मानो उनका ‘अपहरण’ (Kidnap) कर लिया गया हो। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की गाड़ी उन्हें करीब दो घंटे तक बिना किसी तय गंतव्य के दिल्ली की सुनसान सड़कों पर बेवजह घुमाती रही।

‘बिना कुछ बताए 2 घंटे तक पुलिस वैन में घुमाया’—ममता बनर्जी

रिहाई के बाद संवाददाताओं से बातचीत करते हुए ममता बनर्जी ने पुलिसिया कार्रवाई को पूरी तरह असंवैधानिक और अपमानजनक बताया। उन्होंने कहा:

“एक मौजूदा मुख्यमंत्री के साथ ऐसा बर्ताव देश के इतिहास में कभी नहीं देखा गया। जब मुझे हिरासत में लिया गया, तो न कोई महिला अधिकारी आगे थी और न ही किसी ने बताया कि हमें कहां ले जाया जा रहा है। पुलिस वैन में बैठाकर हमें लगातार दो घंटे तक दिल्ली की सड़कों पर गोल-गोल घुमाया जाता रहा। खिड़कियां बंद थीं और पूछने पर कोई जवाब नहीं मिल रहा था। ऐसा लगा जैसे किसी का राजनीतिक अपहरण कर लिया गया हो। क्या एक निर्वाचित मुख्यमंत्री और देश के नागरिकों के साथ पेश आने का यही तरीका है?”

जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश के दौरान हुई थी हिरासत

शनिवार को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्षी दलों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ बुलाए गए जंतर-मंतर मार्च में शामिल होने के लिए ममता बनर्जी अपने पार्टी सांसदों और कार्यकर्ताओं के साथ निकली थीं। हालांकि, लुटियंस दिल्ली में धारा 163 लागू होने का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस ने उनके काफिले को पहले ही रोक दिया। जब ममता बनर्जी ने पैदल आगे बढ़ने का प्रयास किया, तो सुरक्षा बलों ने बैरिकेडिंग कर उन्हें, टीएमसी सांसदों और सैकड़ों समर्थकों को प्रिवेंटिव कस्टडी (निवारक हिरासत) में ले लिया।

विपक्षी नेताओं के साथ एकजुटता और केंद्र पर ‘तानाशाही’ का आरोप

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लोकतांत्रिक विरोध की हर आवाज से घबरा चुकी है। उन्होंने कहा कि पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और जनता की परेशानियों की अनदेखी करते हुए 45 से अधिक मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया, सीमाओं को सील किया गया और फिर शांतिपूर्ण विरोध करने आए मुख्यमंत्रियों, सांसदों और छात्र नेताओं को जबरन उठा लिया गया। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि खुलेआम तानाशाही का प्रदर्शन है, जहां चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाले हर व्यक्ति को जेल या डिटेंशन का डर दिखाया जा रहा है।

तृणमूल कांग्रेस का देशव्यापी विरोध का ऐलान

ममता बनर्जी ने साफ किया कि दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई से विपक्षी दलों का हौसला टूटने वाला नहीं है। टीएमसी नेतृत्व ने घोषणा की है कि दिल्ली में मुख्यमंत्री और सांसदों के साथ हुए इस व्यवहार के खिलाफ पश्चिम बंगाल के सभी जिलों और देश के अन्य हिस्सों में व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी के इस कड़े बयान और हिरासत के इस घटनाक्रम के बाद संसद के आगामी सत्र और राष्ट्रीय राजनीति में केंद्र बनाम विपक्ष का टकराव और अधिक विस्फोटक रूप अख्तियार करेगा।

Check Also

CJP का दिल्ली पुलिस पर सनसनीखेज आरोप, अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास की लोकेशन अज्ञात

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को लेकर पुलिस कार्रवाई के बीच कॉकरोच जनता …