
‘न मेमो दिया, न वकीलों से मिलने दिया’—CJP का प्रेस वक्तव्य
पार्टी के लीगल सेल और प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि संवैधानिक प्रक्रियाओं और सुप्रीम कोर्ट के ‘डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल’ के दिशा-निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं:
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अज्ञात स्थल पर ले जाने का आरोप: CJP का कहना है कि तीनों नेताओं के फोन तुरंत स्विच ऑफ करा दिए गए। जब वकीलों की टीम ने एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन, तुगलक रोड, तिलक मार्ग और मंदिर मार्ग थानों से संपर्क किया, तो हर थाने ने उनकी कस्टडी में होने से इनकार कर दिया।
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पारिवारिक आपातकाल के बीच संपर्कहीनता: संगठन ने रेखांकित किया कि अभिजीत दीपके के गृहग्राम में उनकी दादी के निधन की दुखद घटना के बावजूद उन्हें अपने वकीलों या परिवार से संपर्क करने की सामान्य अनुमति तक नहीं दी गई, जो सीधे तौर पर मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है।
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संविधान के अनुच्छेद 22 का हनन: पार्टी का तर्क है कि किसी भी नागरिक को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना और गिरफ्तारी का कारण बताना अनिवार्य है, लेकिन पुलिस इसे केवल ‘प्रिवेंटिव डिटेंशन’ कहकर कानून से बचने की कोशिश कर रही है।
दिल्ली पुलिस का रुख: कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रिवेंटिव डिटेंशन
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने ‘अपहरण’ (Kidnapping) जैसे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पुलिस का कहना है:
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धारा 163 का उल्लंघन रोकने की कार्रवाई: नई दिल्ली जिले में कानून-व्यवस्था के मद्देनजर निषेधाज्ञा (Section 163 of BNSS) लागू की गई थी। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर भड़काऊ संदेश देकर हजारों युवाओं को जंतर-मंतर पर इकट्ठा करने का प्रयास किया जा रहा था।
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निवारक हिरासत (Preventive Custody): शहर के अमन-चैन को बनाए रखने के लिए आयोजकों को केवल एहतियातन हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि सभी को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है और स्थिति सामान्य होते ही कानूनी औपचारिकताओं के तहत आगे का कदम उठाया जाएगा।
हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका दायर करने की तैयारी
CJP की कानूनी टीम ने घोषणा की है कि यदि पुलिस रविवार तड़के तक तीनों नेताओं की औपचारिक गिरफ्तारी, डिटेंशन मेमो और सटीक स्थान की जानकारी सार्वजनिक नहीं करती है, तो वे दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) में तत्काल आपातकालीन बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus Petition) दाखिल करेंगे। पार्टी ने विपक्षी दलों, मानवाधिकार संगठनों और छात्र संगठनों से इस कथित प्रशासनिक मनमानी के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की है।
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