
विमानन सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय एविएशन जगत को हिलाकर रख देने वाले फ्लाईदुबई विमान हादसे की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसमें बेहद संवेदनशील और हैरान करने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। अब तक की प्राथमिक थ्योरी और शुरुआती रिपोर्टों में दावा किया जा रहा था कि हादसे के वक्त कॉकपिट में को-पायलट अकेला था या उसने जानबूझकर विमान का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों, ब्लैक बॉक्स के विस्तृत डेटा विश्लेषण और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) की गहन फॉरेंसिक पड़ताल से जुड़े सूत्रों का दावा है कि स्थिति उतनी सीधी नहीं है जितनी दिखाई दे रही थी। जांच के नए सुराग इस ओर इशारा कर रहे हैं कि कॉकपिट के भीतर उस वक्त कोई अन्य व्यक्ति भी मौजूद हो सकता था या फिर बाहर से नियंत्रण को प्रभावित करने की अप्रत्यक्ष कोशिश की गई थी। इस नए पहलू ने पूरे मामले को एक तकनीकी विफलता या मानवीय भूल से आगे ले जाकर एक सुनियोजित साजिश के दायरे में खड़ा कर दिया है।
स्मित मच्छार को निशाना बनाने की पहले भी हुई थी कोशिश: पुरानी कड़ियों की पड़ताल
इस जांच में सबसे सनसनीखेज खुलासा यह सामने आया है कि स्मित मच्छार को निशाना बनाने या उन्हें नुकसान पहुंचाने की यह पहली घटना नहीं थी। एविएशन सुरक्षा से जुड़ी जांच एजेंसियों के हाथ कुछ ऐसे इनपुट्स और दस्तावेज लगे हैं, जो संकेत देते हैं कि इस घटना से कुछ समय पहले भी उन्हें रास्ते से हटाने या जानलेवा नुकसान पहुंचाने की एक गोपनीय कोशिश की गई थी। उस पिछली घटना को उस समय महज एक इत्तेफाक या व्यक्तिगत विवाद मानकर दबा दिया गया था, लेकिन मौजूदा विमान हादसे के बाद उस पुरानी फाइल को दोबारा खोल दिया गया है। जांचकर्ता अब इस बात की कड़ियां जोड़ रहे हैं कि क्या उस पिछली साजिश का संबंध मौजूदा विमान की परिस्थितियों से जुड़ा हुआ था। स्मित मच्छार के पेशेवर संपर्कों, पिछले कुछ महीनों के दौरान मिले अज्ञात संदेशों और उनकी यात्राओं के दौरान सामने आई संदिग्ध गतिविधियों का अब एक-एक करके ब्योरा जुटाया जा रहा है।
कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और ब्लैक बॉक्स से मिले अनसुलझे ऑडियो संकेत
विमान हादसे की गुत्थी सुलझाने में सबसे अहम कड़ी साबित होने वाले फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) से मिले संकेतों ने जांच अधिकारियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। रिकॉर्डिंग के अंतिम कुछ मिनटों में केवल रूटीन के तकनीकी अलार्म या पायलटों के संवाद ही नहीं हैं, बल्कि बैकग्राउंड में कुछ हल्की और अस्पष्ट आवाजें भी रिकॉर्ड हुई हैं। ऑडियो स्पेक्ट्रम एनालिसिस से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या कॉकपिट का दरवाजा पूरी तरह लॉक था या उस दौरान किसी ने अंदर प्रवेश करने की कोशिश की थी। इसके अलावा, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के साथ हुए अंतिम संवाद में आवाज की टोन, तनाव और शब्दों के चयन का मनोविश्लेषण (वॉयस स्ट्रेस एनालिसिस) भी कराया जा रहा है, ताकि यह साबित हो सके कि बोलने वाला पायलट किसी बाहरी दबाव या खतरे के साए में तो बात नहीं कर रहा था।
सुरक्षा प्रोटोकॉल और ‘टू-पर्सन कॉकपिट रूल’ पर खड़े हुए बड़े सवाल
अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के कड़े दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी कमर्शियल यात्री विमान के कॉकपिट में कभी भी एक व्यक्ति अकेले नहीं रह सकता। यदि मुख्य पायलट किसी कारणवश कॉकपिट से बाहर जाता है, तो उसकी जगह तुरंत एक केबिन क्रू सदस्य को अंदर रहना अनिवार्य होता है। इस मामले में जांच का बड़ा हिस्सा इस बात पर टिका है कि क्या उस उड़ान के दौरान इस ‘टू-पर्सन कॉकपिट रूल’ का अक्षरशः पालन किया गया था या नहीं। यदि को-पायलट कुछ समय के लिए अकेला रहा, तो ऐसा होने देने के पीछे ग्राउंड सिक्योरिटी या इन-फ्लाइट क्रू की ओर से क्या चूक हुई? साथ ही, विमान के प्रस्थान से पहले की गई प्री-फ्लाइट ब्रीफिंग, ड्यूटी रोस्टर और चालक दल के सदस्यों के व्यक्तिगत संबंधों की भी समानांतर जांच की जा रही है ताकि किसी भी तरह के आंतरिक मिलीभगत के कोण को पूरी तरह खारिज किया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों की सक्रियता और आगे का कानूनी शिकंजा
फ्लाईदुबई के इस पूरे प्रकरण में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की जनरल सिविल एविएशन अथॉरिटी (GCAA), अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा बोर्ड और संबंधित देशों की खुफिया एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। जिस तरह से स्मित मच्छार से जुड़े पुराने मामलों और कॉकपिट के भीतर तीसरे व्यक्ति या बाहरी हस्तक्षेप की आशंकाएं उभरी हैं, उसने मामले को बहुपक्षीय जांच में बदल दिया है। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या किसी संगठित नेटवर्क या व्यक्तिगत रंजिश के चलते इस घटना को अंजाम दिया गया। जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक ऑडियो रिपोर्ट और डिजिटल फ्लाइट पैरामीटर्स का अंतिम मिलान पूरा होने के बाद ही औपचारिक आरोपपत्र या अंतिम सुरक्षा बुलेटिन जारी किया जाएगा, लेकिन इस ताजा मोड़ ने पूरे एविएशन सेक्टर में सुरक्षा मानकों पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है।
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