बंगाल में ‘तोलाबाजों’ की होगी छुट्टी? वसूली और सिंडिकेट राज के खिलाफ बेहद कड़ा कानून लाने की तैयारी में सरकार

पश्चिम बंगाल में लंबे समय से विवादों और सियासी बहसों के केंद्र में रहे ‘तोलाबाजी’ (जबरन वसूली) और ‘सिंडिकेट राज’ के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक व कानूनी सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी कर ली गई है। राज्य सरकार जबरन वसूली करने वाले असामाजिक तत्वों, सिंडिकेट माफियाओं और स्थानीय स्तर पर अवैध वसूली में लिप्त गिरोहों की कमर तोड़ने के लिए एक बेहद सख्त कानून बनाने जा रही है।

सचिवालय (नबन्ना) से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, इस नए कानून का मसौदा तैयार किया जा रहा है और इसे जल्द ही राज्य विधानसभा में विधेयक के रूप में पेश किया जा सकता है। सरकार की मंशा साफ है कि आम नागरिकों, छोटे व्यापारियों, भवन निर्माण कराने वाले परिवारों और ट्रांसपोर्टरों को दशकों से चले आ रहे इस सिंडिकेट नेटवर्क से हमेशा के लिए मुक्ति दिलाई जाए।

नए कानून में 10 साल तक की जेल का प्रावधान, तुरंत एक्शन का होगा अधिकार

प्रस्तावित विधेयक में ऐसे कड़े और गैर-जमानती प्रावधान जोड़े जा रहे हैं, ताकि वसूली करने वाले किसी भी स्तर के व्यक्ति पर बिना किसी देरी के तुरंत कानूनी कार्रवाई की जा सके।

सूत्रों के मुताबिक, इस कानून के प्रमुख बिंदु कुछ इस प्रकार हो सकते हैं:

  • सख्त सजा: अवैध वसूली, डरा-धमकाकर कट मनी मांगने या निर्माण सामग्री की जबरन खरीद पर मजबूर करने के मामलों में 10 साल तक के कठोर कारावास का प्रावधान किया जा सकता है।

  • फास्ट ट्रैक सुनवाई और संपत्ति जब्ती: सिंडिकेट गतिविधियों से अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्तियों को कुर्क करने और मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष अदालतें गठित करने पर भी विचार चल रहा है।

  • तत्काल गिरफ्तारी और गैर-जमानती धाराएं: थाने स्तर पर शिकायत आते ही पुलिस को सीधे केस दर्ज कर त्वरित गिरफ्तारी करने की छूट होगी, जिससे पीड़ितों को सुरक्षा की पूरी गारंटी मिले।

सरकारी योजनाओं और सुरक्षा के नाम पर वसूली पर पूर्ण प्रतिबंध

पश्चिम बंगाल में यह शिकायतें आम रही हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने, स्थानीय स्तर पर दुकान लगाने या फिर सुरक्षा व स्थानीय क्लबों के नाम पर आम लोगों से मनमाना चंदा या कट मनी वसूली जाती है।

नए कानून के दायरे में यह स्पष्ट किया जा रहा है कि सरकारी योजनाओं, स्थानीय विकास या किसी भी प्रकार के संरक्षण के नाम पर एक रुपया भी अवैध रूप से वसूलना संगीन अपराध की श्रेणी में आएगा। प्रशासन यह सुनिश्चित करने के लिए हेल्पलाइन और डिजिटल शिकायत पोर्टल भी स्थापित करने की योजना बना रहा है, जहां नागरिक पहचान गोपनीय रखकर सीधे जबरन वसूली की शिकायत दर्ज करा सकेंगे।

अवैध टोल गेटों और ट्रकों से वसूली पर पहले ही हो चुका है बड़ा एक्शन

यह नया कानून उस व्यापक रणनीति का अगला चरण है, जिसकी शुरुआत राज्य में पहले ही हो चुकी है। कुछ समय पहले ही मुख्य सचिव के आदेश पर राज्य भर में हाईवे और स्थानीय सड़कों पर बिना किसी वैध प्रशासनिक अनुमति के चल रहे दर्जनों अवैध टोल गेट, बैरिकेड्स और फीस वसूली केंद्रों को तत्काल प्रभाव से सील कर बंद कराया गया था।

इतना ही नहीं, ट्रकों को रोककर अवैध वसूली करने के आरोप में संलिप्त पाए गए दो सरकारी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर संदेश दिया गया था कि “कोई भी कानून से ऊपर नहीं है”। अब सरकार इसे महज प्रशासनिक आदेशों तक सीमित न रखकर एक ठोस और अभेद्य वैधानिक कानून का रूप देने जा रही है, ताकि भविष्य में सत्ता या पार्टी बदलने पर भी कोई तंत्र इसका दुरुपयोग न कर सके।

उद्योगों, रियल एस्टेट और आम जनता को मिलेगी बड़ी राहत

राज्य में उद्योग जगत और रियल एस्टेट सेक्टर हमेशा से सिंडिकेट राज की सबसे बड़ी मार झेलता आया है।

  • जब भी कोई नागरिक अपने घर की मरम्मत कराता था या नया निर्माण शुरू करता था, तो स्थानीय सिंडिकेट खराब गुणवत्ता वाली ईंट, बालू और सरिया ऊंची दरों पर खरीदने के लिए दबाव बनाते थे।

  • राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशक भी जबरन लेबर यूनियनों और सिंडिकेट के दखल के चलते बंगाल में बड़ा पूंजी निवेश करने से कतराते थे।

अब अगर यह सख्त विधेयक कानून का रूप लेता है, तो न केवल बंगाल के लाखों मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों को सीधी आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि राज्य में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ का माहौल सुधरेगा और औद्योगिक निवेश को भी नई रफ्तार मिल सकेगी।

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