बप्पा के आगमन का सबसे शुभ समय, जानें घर में स्थापना की सही विधि और विसर्जन की तिथियां

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि हिंदू धर्म में अत्यंत पावन और मंगलकारी मानी गई है। आज 14 सितंबर 2026, सोमवार के दिन देशभर में गणेशोत्सव की भव्य शुरुआत हो चुकी है। घर-घर, कॉलोनियों और सार्वजनिक पूजा पंडालों में ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का स्वागत किया जा रहा है। मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गजानन कैलाश पर्वत से उतरकर अपने भक्तों के बीच आते हैं और उनके सभी विघ्न, संताप और कष्ट हर लेते हैं। यदि आप भी आज बप्पा की प्रतिमा को घर लाकर उनकी प्राण-प्रतिष्ठा करने जा रहे हैं, तो शास्त्रों के अनुसार शुभ समय, स्थापना के नियम और विसर्जन की तिथियों को पहले से जान लेना आवश्यक है।

गणपति बप्पा को घर लाने का सही समय और नियम

भगवान गणेश की प्रतिमा को घर लाते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, बप्पा की मूर्ति सदैव मिट्टी (शाडू माटी) की होनी चाहिए, जो पर्यावरण के अनुकूल हो। प्रतिमा का चयन करते समय यह अवश्य देखें कि उनकी सूंड बाईं ओर (वाममुखी) मुड़ी हो, जिसे गृहस्थ जीवन के लिए अत्यंत शुभ और सुख-शांतिदायक माना जाता है।

प्रतिमा लाते समय राहुकाल का त्याग करना जरूरी है। आज सोमवार होने के कारण सुबह 07:38 बजे से 09:11 बजे तक राहुकाल रहा। राहुकाल बीतने के बाद सुबह के अमृत व शुभ चौघड़िया अथवा मध्याह्न काल में बप्पा को नए लाल या पीले वस्त्र से ढककर ससम्मान घर लाया जाता है। घर के मुख्य द्वार पर प्रवेश से पूर्व आरती उतारें, अक्षत छिड़कें और “गणपति बप्पा मोरया” के उद्घोष के साथ उनका गृह प्रवेश कराएं।

गणपति स्थापना का सबसे श्रेष्ठ मध्याह्न मुहूर्त

सनातन परंपरा में गणेश चतुर्थी की पूजा सदैव मध्याह्न काल में करने का विधान है, क्योंकि भगवान गणेश का प्राकट्य दोपहर के समय हुआ था। पंचांग के अनुसार आज 14 सितंबर को गणपति स्थापना का सबसे प्रशस्त समय सुबह 11:02 बजे से दोपहर 01:31 बजे तक रहा।

यदि किसी कारणवश जातक इस समय तक स्थापना नहीं कर पाए हैं, तो वे दिन के अन्य शुभ चौघड़िया जैसे शुभ चौघड़िया (दोपहर 01:48 बजे से 03:20 बजे) अथवा सायंकाल गोधूलि वेला (शाम 06:26 बजे से 06:50 बजे) में भी शुद्ध भाव से संकल्प लेकर प्रतिमा स्थापित कर सकते हैं।

घर में गणपति स्थापना की प्रामाणिक व सरल विधि

घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या पूर्व दिशा में एक लकड़ी की साफ चौकी स्थापित करें और उस पर नया लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। चौकी के एक कोने पर अक्षत की ढेरी बनाकर तांबे या पीतल का कलश स्थापित करें, जिसमें जल, गंगाजल, सुपारी, एक सिक्का और आम के पांच पत्ते लगाकर ऊपर नारियल रखें।

इसके बाद चौकी के मध्य में स्वास्तिक या अष्टदल कमल बनाकर भगवान गणेश की प्रतिमा को विराजमान करें। स्वयं पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत एवं पूजन का संकल्प लें। प्रतिमा पर गंगाजल मिश्रित जल की बूंदें छिड़ककर प्रतीकात्मक स्नान कराएं। तत्पश्चात बप्पा को कलावा रूपी वस्त्र, जनेऊ, रोली, चंदन, हल्दी, सिंदूर और अबीर अर्पित करें। इसके बाद गजानन को उनकी प्रिय 21 दूर्वा दल की गांठें और ताजे लाल पुष्प चढ़ाएं। अंत में मोदक, लड्डू, मौसमी फल और पंचामृत का भोग लगाकर धूप-दीप दिखाएं और कर्पूर से सपरिवार महाआरती करें।

गणेश विसर्जन 2026: कब-कब होगी बप्पा की विदाई?

सनातन परंपरा में भक्त अपनी कुल-परंपरा और मन्नत के आधार पर गणपति बप्पा को अलग-अलग दिनों तक घर में अतिथि बनाकर रखते हैं। इसके बाद विधि-विधान से जल में उनका विसर्जन किया जाता है। वर्ष 2026 के लिए विसर्जन की प्रमुख तिथियां इस प्रकार हैं:

  • डेढ़ दिन का विसर्जन (Dedh Din): 15 सितंबर 2026 (मंगलवार)

  • तीसरे दिन का विसर्जन: 16 सितंबर 2026 (बुधवार)

  • पांचवें दिन का विसर्जन: 18 सितंबर 2026 (शुक्रवार)

  • सातवें दिन का विसर्जन: 20 सितंबर 2026 (रविवार)

  • दस दिवसीय मुख्य विसर्जन (अनंत चतुर्दशी): 25 सितंबर 2026 (शुक्रवार)

अनंत चतुर्दशी के दिन 10 दिवसीय गणेशोत्सव का महापर्व संपन्न होता है। इस दिन भक्त ढोल-नगाड़ों और गुलाल के साथ बप्पा को विदाई देते हुए “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” का जयघोष करते हैं और प्रतिमा को पवित्र नदियों, सरोवरों अथवा घर में ही किसी बड़े जलपात्र में विसर्जित करते हैं।

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