
ड्रग्स रूल्स 1945 में बड़ा संशोधन: होलसेलर्स, रिटेलर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी दायरे में
वर्तमान व्यवस्था के तहत केवल दवा निर्माता कंपनियों (फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर्स) पर ही कुछ श्रेणियों की दवाओं के सीधे विज्ञापनों पर पाबंदी लागू थी। हालांकि, इस नियम में एक बड़ी खामी थी—दवाओं की खुदरा (रिटेल) और थोक (होलसेल) बिक्री करने वाले लाइसेंसधारकों, डिस्ट्रीब्यूटर्स और तेजी से बढ़ रही ऑनलाइन ई-फार्मेसी कंपनियों को स्पष्ट रूप से इस पाबंदी के दायरे में नहीं बांधा गया था। इसका फायदा उठाकर कई विक्रेता सोशल मीडिया, यूट्यूब और वेबसाइट्स पर भ्रामक प्रचार कर रहे थे।
इस कानूनी खामी को पाटने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) के साथ लंबी मंत्रणा के बाद ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 65 में नया उप-नियम (22) जोड़ने का मसौदा तैयार किया है। आधिकारिक गजट अधिसूचना के अनुसार, अब कोई भी लाइसेंसधारक—चाहे वह थोक विक्रेता हो, खुदरा दवा विक्रेता हो या ऑनलाइन दवा डिलीवरी प्लेटफॉर्म—बिना केंद्र सरकार की स्पष्ट मंजूरी के ऐसी दवाओं का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विज्ञापन प्रकाशित या प्रसारित नहीं कर सकेगा।
शेड्यूल H, H1 और X की दवाओं पर रहेगा मुख्य फोकस
सरकार की यह सख्ती खास तौर पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स के तहत आने वाली संवेदनशील श्रेणियों पर केंद्रित है। इनमें शेड्यूल H, H1 और शेड्यूल X में दर्ज दवाएं शामिल हैं। ये वो जीवनरक्षक और असरदार दवाएं हैं, जिनमें एंटीबायोटिक्स, एंटी-डिप्रेसेंट, गंभीर दर्द निवारक, हार्मोनल थेरेपी और नशीली प्रवृत्ति वाली औषधियां आती हैं। इन दवाओं का गलत इस्तेमाल या अधिक मात्रा शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे लिवर, किडनी और दिल को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है।
हाल के दिनों में विशेष रूप से वजन घटाने वाली (GLP-1 आधारित दवाएं), बाल उगाने और त्वचा गोरी करने का दावा करने वाली प्रिस्क्रिप्शन दवाओं का डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर आक्रामक और लुभावना प्रचार देखा गया था। कई कंपनियों ने युवाओं को आकर्षित करने के लिए बिना किसी क्लिनिकल चेतावनी के इनके विज्ञापन चलाए, जिससे लोग बिना डॉक्टर की जांच के इन्हें खरीदने लगे थे। सरकार का नया कानून ऐसी किसी भी मनमानी मार्केटिंग पर पूरी तरह ताला जड़ देगा।
जनता और स्टेकहोल्डर्स से मांगे गए सुझाव: जल्द बनेगा कानून
स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस मसौदा संशोधन को सार्वजनिक करते हुए सभी संबंधित पक्षों, दवा उद्योग, डॉक्टरों के संगठनों और आम नागरिकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। निर्धारित समय सीमा के भीतर प्राप्त होने वाले सभी फीडबैक की समीक्षा के बाद अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएंगे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल एसोसिएशनों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इस कानून के लागू होने के बाद एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (दवाओं का असर बेअसर होना) और अनियंत्रित दवाओं के सेवन से होने वाली गंभीर बीमारियों में भारी कमी आएगी।
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