‘मेरे पास ऐसा पिता नहीं था जो डायरेक्टर्स को फोन करे…’: नेपोटिज्म पर सारा अली खान का बेबाक पलटवार

हिंदी सिनेमा में जब भी ‘नेपोटिज्म’ यानी भाई-भतीजावाद का मुद्दा उठता है, तो स्टार किड्स हमेशा से ही सोशल मीडिया और आलोचकों के निशाने पर आ जाते हैं। पटौदी खानदान की वारिस और अभिनेता सैफ अली खान व अमृता सिंह की बेटी सारा अली खान भी अक्सर इस बहस के केंद्र में रही हैं। हालांकि, सारा हमेशा से ही अपने बेबाक, विनम्र और यथार्थवादी बयानों के लिए जानी जाती हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे फिल्मी बैकग्राउंड और काम मिलने की आसानी को लेकर सवाल पूछा गया, तो सारा ने बिना किसी लाग-लपेट के ऐसा जवाब दिया, जिसने पूरी बहस को एक नया दृष्टिकोण दे दिया। सारा ने साफ तौर पर कहा कि भले ही वे एक जाने-माने फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखती हैं, लेकिन उनके पिता ऐसे इंसान कभी नहीं रहे जो फिल्ममेकर्स को फोन घुमाकर अपनी बेटी के लिए सिफारिशें करें।

सारा अली खान ने कहा, “यह सच है कि मुझे उन कमरों और दफ्तरों तक पहुंचने का मौका आसानी से मिल जाता है जहां एक आम इंसान को पहुंचने में वर्षों लग सकते हैं, और मैं इस विशेषाधिकार (Privilege) को कभी नकारती नहीं हूं। लेकिन मेरे पास कोई ऐसा पिता नहीं था जो निर्देशकों को फोन करे और कहे कि ‘मेरी बेटी को अपनी फिल्म में ले लो’ या उसके लिए कोई बड़ा प्रोजेक्ट प्रोड्यूस करे। मैंने जो भी काम पाया है, वह खुद निर्देशकों के सामने हाथ जोड़कर, ऑडिशन देकर और अपने दम पर हासिल किया है।”

रोहित शेट्टी के दफ्तर में जब खुद हाथ जोड़कर मांगा था काम

सारा अली खान ने अपने शुरुआती सफर का एक बेहद चर्चित किस्सा साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी दूसरी ही फिल्म ‘सिम्बा’ (Simmba) कैसे हासिल की थी। सारा ने बताया कि वे खुद अकेले निर्देशक रोहित शेट्टी के दफ्तर गई थीं। उन्होंने बिना किसी मैनेजर या स्टार किड के तमगे के रोहित शेट्टी के सामने हाथ जोड़कर कहा था कि वे उनके साथ काम करना चाहती हैं और उन्हें एक मौका दिया जाए।

रोहित शेट्टी ने भी खुद एक टॉक शो में इस बात की पुष्टि की थी कि सारा जिस सादगी से उनके ऑफिस आई थीं और काम मांगा था, उससे वे बेहद प्रभावित हुए थे। सैफ अली खान ने कभी किसी निर्देशक से सारा को कास्ट करने की सिफारिश नहीं की। सारा का मानना है कि दरवाजे तक पहुंचना शायद नाम के दम पर मुमकिन हो सकता है, लेकिन उस कमरे के भीतर अपनी जगह बनाना और कैमरे के सामने टिके रहना पूरी तरह से कलाकार की अपनी प्रतिभा और मेहनत पर निर्भर करता है।

अमृता सिंह की परवरिश: ‘जिंदगी में कोई शॉर्टकट नहीं होता’

सैफ अली खान और अमृता सिंह के अलगाव के बाद सारा अली खान और उनके भाई इब्राहिम की परवरिश अकेले अमृता सिंह ने की है। सारा अक्सर अपनी मां की सख्त और जमीन से जुड़ी परवरिश का जिक्र करती हैं। सारा ने बताया कि उनकी मां ने उन्हें हमेशा यही सिखाया कि फिल्मी दुनिया में दर्शक ही असली भगवान होते हैं। यदि जनता आपको परदे पर पसंद नहीं करती, तो चाहे आप कितने भी बड़े खानदान से क्यों न आते हों, आपका करियर आगे नहीं बढ़ सकता।

सारा ने कहा कि वे जब कोलंबिया यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई पूरी करके लौटी थीं, तो उनका वजन 90 किलो से अधिक था और वे पीसीओडी (PCOD) जैसी शारीरिक समस्या से जूझ रही थीं। उन्होंने फिल्मों में आने से पहले खुद पर महीनों तक कठिन अनुशासन और डाइट के जरिए काम किया। उनके अनुसार, मेहनत की यह प्रक्रिया किसी के पिता के नाम से आसान नहीं हो जाती; पसीना हर किसी को खुद ही बहाना पड़ता है।

दर्शकों का प्यार और आलोचना: दोनों को गले लगाना जरूरी

सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग और नेपोटिज्म के ठप्पे को लेकर सारा ने बेहद संतुलित रुख अपनाया। उनका कहना है कि वे दर्शकों की नाराजगी या आलोचना को पूरी तरह समझती हैं। जब एक सामान्य पृष्ठभूमि का युवा इंडस्ट्री में आने के लिए संघर्ष करता है, तो उसे देखकर एक स्टार किड को मिलने वाले मौकों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

सारा ने कहा, “मैं लोगों से यह नहीं कह सकती कि वे मुझे नेपो किड न कहें, क्योंकि तकनीकी रूप से मैं वही हूं। लेकिन मैं अपने अभिनय, अपनी मेहनत और अपनी फिल्मों के चुनाव से यह साबित कर सकती हूं कि मैं इस जगह की हकदार हूं। जब दर्शक मेरी तारीफ करते हैं तो मेरा हौसला बढ़ता है, और जब वे मेरी आलोचना करते हैं तो मुझे समझ आता है कि मुझे खुद में क्या सुधार करना है।”

सारा अली खान के इस बेबाक और संजीदा बयान की सोशल मीडिया पर काफी सराहना की जा रही है। फैंस का मानना है कि विशेषाधिकार को ईमानदारी से स्वीकार करते हुए अपनी मेहनत का दावा करना ही एक सच्चे कलाकार की पहचान है।

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