
बंगाल की खाड़ी से उठा भीषण चक्रवाती तूफान ‘अर्णब’ तटीय इलाकों से आगे बढ़कर अब मैदानी राज्यों की ओर तेजी से रुख कर रहा है। आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटों से टकराने के बाद जमीन के भीतर दाखिल हुआ यह मानसूनी सिस्टम भले ही गहरे दबाव (डीप डिप्रेशन) में तब्दील हो चुका है, लेकिन इसका प्रचंड असर अब उत्तर प्रदेश के मौसम पर साफ दिखाई देने लगा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने राज्य के 50 से अधिक जिलों में गरज-चमक, आकाशीय बिजली और 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज झोंकेदार हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश का कड़ा अलर्ट जारी किया है। राजधानी लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर समेत पूर्वांचल, अवध, रुहेलखंड और तराई बेल्ट के जिलों में गुरुवार सुबह से ही आसमान में घने काले बादलों का पहरा नजर आ रहा है। वातावरण में अचानक बढ़ी ठंडी हवाओं और उमस के खात्मे के साथ तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने चक्रवात के खतरे और तेज आंधी-बारिश की आशंका को देखते हुए सभी जिलाधिकारियों और राहत आयुक्त कार्यालय को 24 घंटे मुस्तैद रहने का निर्देश जारी कर दिया है।
बंगाल की खाड़ी से यूपी तक तूफान का सफर: क्यों अचानक बदला प्रदेश का मिजाज?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, चक्रवाती तूफान ‘अर्णब’ ने पूर्वी समुद्र तट को पार करते हुए मध्य और उत्तर भारत के वायुमंडलीय तंत्र को पूरी तरह झकझोर दिया है। आमतौर पर अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में उत्तर भारत में मानसून पूरी तरह विदा हो चुका होता है और गुलाबी ठंड की शुरुआत मानी जाती है। लेकिन इस बार बंगाल की खाड़ी से उठ रहे नमी से लदे चक्रवाती बादलों और उत्तर-पश्चिम से आ रहे एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) के आपसी टकराव ने उत्तर प्रदेश में एक असामान्य और मजबूत वेदर सिस्टम खड़ा कर दिया है। समुद्र से आ रही नम दक्षिण-पूर्वी हवाएं मैदानी क्षेत्रों में पहुंचकर तेजी से बादलों का निर्माण कर रही हैं। यही वजह है कि झारखंड, बिहार और पूर्वी मध्य प्रदेश की सीमाओं से सटे उत्तर प्रदेश के जिलों में चक्रवात के अग्रिम छोर का प्रभाव नजर आने लगा है। लखनऊ स्थित आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 48 से 72 घंटों तक पूरे राज्य में आंशिक से लेकर भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है, जिससे न केवल जनजीवन प्रभावित होगा, बल्कि दिन और रात के पारे में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आने की प्रबल संभावना है।
पूर्वांचल से तराई तक इन 50 जिलों में येलो और ऑरेंज अलर्ट
मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न अंचलों के लिए व्यापक बुलेटिन जारी करते हुए अलग-अलग श्रेणियों में अलर्ट तय किए हैं। सबसे गंभीर असर पूर्वांचल और नेपाल सीमा से लगे तराई क्षेत्रों में देखे जाने की आशंका है। आईएमडी की सूची के मुताबिक, वाराणसी, गाजीपुर, जौनपुर, चंदौली, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, महराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थनगर और संतकबीरनगर में भारी बारिश और तेज हवाओं का ऑरेंज अलर्ट लागू किया गया है। वहीं मध्य यूपी और अवध क्षेत्र के जिलों में लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, अयोध्या, सुल्तानपुर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, सीतापुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी, उन्नाव और कानपुर नगर व देहात में बादलों की गड़गड़ाहट और तेज बौछारों का पूर्वानुमान है। इसके अलावा रुहेलखंड व पश्चिमी क्षेत्र के बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, मुरादाबाद, रामपुर, संभल, बिजनौर और अमरोहा में भी तेज आंधी के साथ मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। बुंदेलखंड के झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट में भी तेज हवाओं का असर साफ महसूस किया जाएगा।
किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें: धान और आलू की फसलों पर दोहरी मार
इस बेमौसम चक्रवाती आफत ने उत्तर प्रदेश के अन्नदाता की नींद उड़ा दी है। अक्टूबर का यह समय खेतों में पकी खड़ी धान की फसल की कटाई का चरम दौर होता है। खेतों में स्वर्ण रंग की बालियां पककर तैयार हैं और कई जगहों पर कटाई के बाद फसल खेतों में ही खुले आसमान के नीचे सूखने के लिए रखी गई है। यदि 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलती है और साथ में तेज बारिश होती है, तो खड़ी धान की फसल खेतों में गिरकर जलमग्न हो जाएगी, जिससे दाने काले पड़ सकते हैं और अंकुरित होने का खतरा बढ़ जाएगा। वहीं दूसरी ओर, पश्चिमी और मध्य यूपी में जिन किसानों ने हाल ही में अगेती आलू, लाही और सरसों की बुवाई की है, उनके खेतों में पानी भर जाने से बीज सड़ने की गंभीर समस्या पैदा हो सकती है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में जल निकासी के रास्ते तुरंत साफ रखें, कटी हुई फसलों को तिरपाल या सुरक्षित गोदामों में ढककर रखें और मौसम के सामान्य होने तक किसी भी तरह के कीटनाशक या उर्वरक का छिड़काव रोक दें।
योगी सरकार का फुल एक्शन प्लान: एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन हाई अलर्ट पर
चक्रवाती तूफान ‘अर्णब’ के संभावित खतरे से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश शासन ने पूरी प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में 24 घंटे सतर्क रहें। राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमों को संवेदनशील जिलों में त्वरित तैनाती के लिए अलर्ट मोड पर रखा गया है। नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों को शहरी इलाकों में भारी बारिश से होने वाले जलभराव से निपटने के लिए पंपिंग सेट्स चालू रखने और नालों की सफाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। विद्युत विभाग को निर्देश दिया गया है कि आंधी की स्थिति में जर्जर खंभों और ढीले तारों की निरंतर निगरानी की जाए ताकि किसी भी अप्रिय हादसे को टाला जा सके। बिजली गिरने की घटनाओं से बचाव के लिए ‘दामिनी’ ऐप के जरिए ग्रामीण इलाकों में चेतावनी प्रसारित की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने भी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों और जरूरी जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए हैं।
आम जनता के लिए एडवाइजरी: आकाशीय बिजली और तेज हवाओं से कैसे करें खुद का बचाव?
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने आम नागरिकों और यात्रियों के लिए विशेष सुरक्षा परामर्श जारी किया है। तेज आंधी और गरज-चमक के दौरान लोगों को खुले मैदानों, बड़े पेड़ों, जर्जर दीवारों और लोहे के बड़े होर्डिंग्स के नीचे खड़े न होने की सख्त हिदायत दी गई है। ग्रामीण इलाकों में किसानों और मवेशी पालकों से अपील की गई है कि वे आंधी-तूफान के दौरान खेतों में न जाएं और अपने पशुओं को पक्के व सुरक्षित शेड के नीचे ही बांधें। बिजली के उपकरणों और मोबाइल फोन को आकाशीय बिजली कड़कने के समय चार्जिंग पर न लगाएं। वाहन चालकों को भी तेज बारिश के दौरान हाईवे पर सफर करते समय गति सीमित रखने और विजिबिलिटी कम होने पर फॉग लाइट्स का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। चक्रवात ‘अर्णब’ के चलते आने वाले दो से तीन दिन पूरे उत्तर प्रदेश के लिए बेहद सतर्क रहने वाले हैं, जहां कुदरत के बदलते मिजाज के बीच सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव साबित होगी।
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