‘योगी से बैर नहीं, BJP विधायकों की खैर नहीं’: 2027 के महासर्वे में यूपी और पंजाब की जनता का चौंकाने वाला मूड, सीएम योगी और मान की साख बरकरार पर मौजूदा विधायकों के खिलाफ भारी आक्रोश

साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों में भले ही अभी समय बाकी हो, लेकिन देश के दो सबसे अहम सियासी राज्यों—उत्तर प्रदेश और पंजाब में चुनावी सरगर्मियां अभी से तेज हो गई हैं। हाल ही में सामने आए ‘वोट वाइब’ (Vote Vibe) और ‘इंडिया टुडे-सीवोटर मूड ऑफ द नेशन’ (MOTN) के ताजा राजनीतिक सर्वे ने दोनों राज्यों के राजनीतिक पंडितों और सियासी दलों को चौंका कर रख दिया है। सर्वे के आंकड़े साफ इशारा कर रहे हैं कि जनता अपने मुख्यमंत्रियों के कामकाज और व्यक्तिगत साख से तो काफी हद तक संतुष्ट है, लेकिन जब बात अपने-अपने क्षेत्र के मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन की आती है, तो मतदाताओं का गुस्सा सातवें आसमान पर दिखाई देता है। इसी विरोधाभास ने राजनीतिक गलियारों में ‘योगी से बैर नहीं, विधायकों की खैर नहीं’ जैसे पुराने चुनावी जुमले को एक बार फिर प्रासंगिक बना दिया है।

उत्तर प्रदेश: सीएम योगी की निजी लोकप्रियता बरकरार, पर 49% जनता अपने मौजूदा विधायकों से नाराज

सर्वे में उत्तर प्रदेश के मतदाताओं का मिजाज सबसे दिलचस्प और विरोधाभासी बनकर उभरा है। आंकड़ों के मुताबिक, यूपी में मौजूदा विधायकों के प्रति क्षेत्रीय असंतोष सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है।

सर्वे में शामिल करीब 49 प्रतिशत लोगों ने अपने विधानसभा क्षेत्र के मौजूदा विधायक (सिटिंग एमएलए) के कामकाज पर खुलकर नाखुशी और गहरी नाराजगी जताई है। इसके विपरीत, केवल 27.9 प्रतिशत मतदाता ही अपने स्थानीय जनप्रतिनिधि के प्रदर्शन से संतुष्ट नजर आए। हालांकि, विधायकों के खिलाफ इस भारी गुस्से का असर सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निजी लोकप्रियता पर नहीं पड़ा है।

जब मतदाताओं से मुख्यमंत्री पद की पहली पसंद को लेकर सवाल पूछा गया, तो 43.3 प्रतिशत लोगों ने एक बार फिर योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व पर अपना अटूट भरोसा जताया। वहीं समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव 35.5 प्रतिशत समर्थन के साथ दूसरे स्थान पर रहे। इतना ही नहीं, राज्य सरकार के समग्र कामकाज के मूल्यांकन में 41.8 प्रतिशत जनता ने योगी सरकार की नीतियों और कानून-व्यवस्था की सराहना की है।

एनडीए बनाम सपा में कांटे की टक्कर, उम्र के आधार पर बंटा यूपी का वोटर बेस

विधानसभा चुनाव में संभावित वोटिंग ट्रेंड की बात करें तो 2027 की जंग बेहद दिलचस्प और नजदीकी होने के संकेत मिल रहे हैं। सर्वे के अनुमान के अनुसार:

  • भाजपा नीत एनडीए गठबंधन: 41.8 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करता दिख रहा है।

  • सपा गठबंधन (इंडिया ब्लॉक): 38.7 प्रतिशत वोट शेयर के साथ बेहद कड़ा मुकाबला दे रहा है।

  • जीत की संभावना: जब जनता से पूछा गया कि वे आगामी चुनाव में किसे जीतते हुए देख रहे हैं, तो मुकाबला लगभग 50-50 के बराबरी के स्तर पर आ टिका।

सर्वेक्षण में जनसांख्यिकीय (Demographic) स्तर पर एक बेहद रोचक तथ्य यह भी सामने आया है कि मतदाताओं की उम्र के आधार पर पसंद में स्पष्ट विभाजन है। 45 वर्ष और उससे अधिक उम्र के परिपक्व मतदाता जहां कानून-व्यवस्था, राष्ट्रवाद और बुनियादी ढांचे के मुद्दे पर योगी आदित्यनाथ और भाजपा के पक्ष में मजबूती से लामबंद हैं, वहीं युवा मतदाताओं और पहली बार वोट करने वाले युवाओं का झुकाव रोजगार, परीक्षा प्रणाली और अन्य मुद्दों को लेकर अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी की ओर अपेक्षाकृत अधिक दिखाई दे रहा है।

पंजाब में भगवंत मान का क्या हाल: आप विधायकों से जनता खफा, पर सीएम की कुर्सी पर मान सबसे आगे

पंजाब की सियासत में भी उत्तर प्रदेश जैसा ही ट्रेंड देखने को मिल रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) की भगवंत मान सरकार के ढाई-तीन साल पूरे होने के बाद स्थानीय विधायकों के प्रति जनता का मोहभंग बढ़ता दिख रहा है।

पंजाब के 45.3 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने क्षेत्र के आम आदमी पार्टी और अन्य मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन पर असंतोष व्यक्त किया है। लेकिन राहत की बात यह है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की निजी लोकप्रियता राज्य में अब भी सबसे मजबूत स्थिति में है। करीब 40 प्रतिशत लोग सरकार के कामकाज से संतुष्ट हैं। मुख्यमंत्री पद की पहली पसंद के सवाल पर भगवंत मान 40.1 प्रतिशत समर्थन के साथ शीर्ष पर काबिज हैं, जबकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी 20.6 प्रतिशत के साथ काफी पीछे दूसरे नंबर पर हैं।

पंजाब के वोट शेयर अनुमानों पर नजर डालें तो राजनीतिक परिदृश्य इस प्रकार नजर आता है:

  • आम आदमी पार्टी (AAP): 34.0 प्रतिशत वोट शेयर के साथ राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है।

  • कांग्रेस (Congress): 30.2 प्रतिशत वोट शेयर के साथ मजबूती से दूसरे पायदान पर चुनौती दे रही है।

  • भारतीय जनता पार्टी (BJP): 12.2 प्रतिशत समर्थन के साथ अपने स्वतंत्र जनाधार में धीरे-धीरे विस्तार कर रही है।

  • शिरोमणि अकाली दल (SAD): 11.3 प्रतिशत वोट शेयर के साथ चौथे स्थान पर संघर्षरत है।

पंजाब के मतदाताओं की सबसे बड़ी खासियत यह सामने आई है कि यहां के 71.2 प्रतिशत लोगों ने पहले से ही तय कर रखा है कि उन्हें किस दल को वोट देना है, जो देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे स्थिर और प्रतिबद्ध मतदाता आधार को दर्शाता है।

विधायकों से क्यों नाराज है जनता: ग्राउंड रियलिटी और 2027 के लिए टिकट कटने के संकेत

राजनीतिक विश्लेषकों और सर्वे विशेषज्ञों का मानना है कि विधायकों के खिलाफ पनप रहे इस भारी असंतोष की सबसे बड़ी वजह जमीनी स्तर पर जनता से उनका संवाद टूटना है। चुनावी जीत के बाद कई जनप्रतिनिधि अपने विधानसभा क्षेत्रों से दूरी बना लेते हैं और जनता से जुड़े रोजमर्रा के काम अपने रिश्तेदारों, करीबी सहायकों या दलालों के भरोसे छोड़ देते हैं। वे स्वयं अधिकांश समय राजधानी के चक्कर लगाने या अपने निजी व्यवसायों में व्यस्त रहते हैं।

सर्वेक्षण के विश्लेषकों के अनुसार, उत्तर प्रदेश और पंजाब दोनों ही राज्यों में करीब 10 से 15 प्रतिशत मतदाता ऐसे फ्लोटिंग वोटर होते हैं जो केवल उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि, व्यवहार, सहज उपलब्धता और चरित्र को देखकर मतदान करते हैं। ऐसे में अगर सत्तारूढ़ दलों को 2027 में सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) के नुकसान से बचना है, तो उन्हें टिकट वितरण में बड़ा फेरबदल करना होगा।

सर्वे के यह नतीजे साफ संदेश दे रहे हैं कि भाजपा और आम आदमी पार्टी दोनों को 2027 के रण में उतरने से पहले अपने कमजोर, निष्क्रिय और अलोकप्रिय विधायकों के टिकट काटकर नए चेहरों पर दांव लगाने की सख्त जरूरत पड़ेगी।

Check Also

वाराणसी में छह दिनों की राहत के बाद गंगा में फिर शुरू हुआ धीमा बढ़ाव, काशी के घाटों पर अलर्ट; प्रयागराज में थमी जलस्तर की रफ्तार

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और मध्य मैदानी क्षेत्रों में नदियों के बदलते जलस्तर ने एक …