
वृंदावन के सुप्रसिद्ध संत पूज्य प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम की अत्यंत प्रिय और दुलारी गाय ‘रसिक दुलारी’ के हालिया निधन के बाद पूरे भक्ति जगत में गहरा शोक फैल गया था। रसिक दुलारी केवल एक गोवंश नहीं, बल्कि पूज्य महाराज जी और उनके आश्रम के तमाम साधकों के वात्सल्य और भक्ति का अनमोल केंद्र थी। उसके गोलोक गमन के बाद आश्रम और संतों के बीच छाई उदासी के बीच अब पहली बार पूज्य महाराज जी के बेहद करीबी शिष्य और पूर्व डब्ल्यूडब्ल्यूई (WWE) चैंपियन रेसलर रिंकू सिंह राजपूत सार्वजनिक रूप से नजर आए हैं। वृंदावन की पावन गलियों में जैसे ही रिंकू सिंह आश्रम के संतों के साथ बाहर निकले, वहां मौजूद सैकड़ों श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा और भावुकता से भर आईं।
200 संतों व साधकों के साथ पंचकोसीय परिक्रमा, गूंजा ‘राधा-राधा’ का महामंत्र
शोक और वैराग्य के इस माहौल के बीच रेसलर रिंकू सिंह ने पूज्य प्रेमानंद महाराज के केली कुंज आश्रम के करीब 200 समर्पित साधकों, संतों और ब्रह्मचारियों के साथ मिलकर वृंदावन धाम की पंचकोसीय परिक्रमा पूरी की। पीले और श्वेत वस्त्रों में सजे साधकों की यह लंबी कतार जब भक्तिभाव से आगे बढ़ी, तो पूरा परिक्रमा मार्ग ‘राधा वल्लभ श्री हरिवंश’ और ‘राधा-राधा’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। नंगे पैर और हाथों में करताल लिए संतों के इस समूह का नेतृत्व करते हुए रिंकू सिंह पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंगे दिखाई दिए। उनके चेहरे पर सांसारिक चकाचौंध के बजाय संतों की सेवा और गोमाता के वियोग से उपजा गहरा वैराग्य साफ झलक रहा था।
रिंग की शोहरत छोड़ झाड़ू लगाने वाले रिंकू सिंह का अनूठा समर्पण
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुश्ती के मैदान में देश का झंडा फहराने और अमेरिकी रेसलिंग रिंग्स में बड़े-बड़े धुरंधरों को धूल चटाने वाले रिंकू सिंह राजपूत का यह भक्तिमय रूपांतरण हमेशा से लोगों को चकित करता रहा है। करोड़ों रुपये के अनुबंध, वैश्विक शोहरत और विलासिता भरी जिंदगी को त्यागकर रिंकू सिंह लंबे समय से पूज्य प्रेमानंद जी महाराज के चरणों में वृंदावन में रहकर सेवा कर रहे हैं। कभी आश्रम के आंगन में झाड़ू लगाते हुए, तो कभी पूज्य महाराज जी के सुरक्षा घेरे में एक विनम्र सेवक की तरह खड़े रहने वाले रिंकू ने इस परिक्रमा के जरिए यह संदेश दिया कि सांसारिक उपलब्धियों से कहीं बड़ी पूंजी संतों और प्रभु का सानिध्य है।
रसिक दुलारी के वियोग से उबरने और आध्यात्मिक ऊर्जा का संदेश
आश्रम से जुड़े सेवादारों के अनुसार, रसिक दुलारी के देहावसान के बाद आश्रम का हर साधक गहरे भावनात्मक आघात से गुजर रहा था। महाराज जी ने स्वयं अपने प्रवचनों में हमेशा सिखाया है कि किसी भी प्रिय आत्मा के बिछोह का दर्द केवल नाम संकीर्तन और धाम सेवा के जरिए ही शांत किया जा सकता है। इसी भाव के तहत साधकों का यह समूह एक साथ धाम की परिक्रमा के लिए निकला ताकि गोमाता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जा सके और आश्रम के आध्यात्मिक नियमों को बिना रुके आगे बढ़ाया जा सके। संतों के इस सामूहिक नाम जप को देखकर परिक्रमा मार्ग पर खड़े तीर्थयात्रियों ने भी हाथ जोड़कर संतों का अभिवादन किया।
सोशल मीडिया पर छाया वीडियो, लोगों ने बताया सच्ची भक्ति की मिसाल
परिक्रमा का यह दृश्य जैसे ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा हुआ, कुछ ही पलों में वायरल हो गया। इंस्टाग्राम, एक्स और यूट्यूब पर लाखों लोग रिंकू सिंह की इस निष्ठा और सादगी की भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे हैं। यूजर्स कमेंट्स में लिख रहे हैं कि आज के भौतिकवादी दौर में जब युवा शोहरत के पीछे भागते हैं, तब एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट का इस तरह संतों के चरणों में नतमस्तक होना और भक्ति मार्ग पर अडिग रहना सनातन संस्कृति की अद्भुत शक्ति को दर्शाता है। यह परिक्रमा न केवल रसिक दुलारी को एक भावभीनी श्रद्धांजलि साबित हुई, बल्कि इसने वृंदावन में प्रेमानंद जी के संदेश को एक बार फिर जन-जन तक पहुंचा दिया।
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