
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) के घनी आबादी वाले और निचले इलाकों में शुमार फैजुल्लागंज (Faullaganj) क्षेत्र में गोमती नदी के उफान ने ऐसा विकराल रूप दिखाया कि इसने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए। लगातार भारी बारिश और बैराजों से छोड़े गए पानी के चलते गोमती नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया, जिसका सीधा और सबसे विनाशकारी असर फैजुल्लागंज के विभिन्न वार्डों पर पड़ा। इस इलाके के लगभग 50,000 से अधिक घर आधे से ज्यादा पानी में पूरी तरह डूब गए। लोगों की गाड़ियां, घरों का कीमती सामान, और राशन पानी सब कुछ जलमग्न हो गया। हालात इतने भयावह हो गए कि स्थानीय नागरिकों को अपनी जान बचाने के लिए छतों पर शरण लेनी पड़ी और प्रशासन की नावों तथा मोटरबोट के जरिए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
हालांकि पिछले कुछ दिनों में गोमती नदी के जलस्तर में कुछ हद तक कमी जरूर दर्ज की गई है, लेकिन धरातल पर स्थिति अभी भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है। जैसे-जैसे पानी घरों और गलियों से बाहर निकल रहा है, पीछे छोड़ गया दर्द और तबाही का मंज़र लोगों को रुला रहा है। घरों के अंदर और सड़कों पर दो-दो फीट तक गाढ़ा कीचड़, कचरा और सड़न पैदा करने वाला मलबा जमा हो गया है। पानी उतरने के बाद घरों की दीवारों और फर्श पर नमी और सीलन ने लोगों का रहना मुहाल कर दिया है। बिजली के ट्रांसफार्मर और पोल पानी में डूबे होने के कारण पूरे इलाके की बिजली आपूर्ति कई दिनों से ठप पड़ी है, जिससे लोगों को अंधेरे में रात गुजारनी पड़ रही है और पीने के शुद्ध पानी का भी भारी संकट पैदा हो गया है।
बाढ़ के बाद पैदा हुए इस नारकीय हालात के बीच अब सबसे बड़ा खतरा महामारी और संक्रामक बीमारियों (Waterborne Diseases) का पैदा हो गया है। जगह-जगह इकट्ठा हुए सड़े हुए पानी और कचरे के ढेर से उठने वाली दुर्गंध के कारण मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ गया है। डायरिया, टायफाइड, पीलिया और त्वचा के संक्रमण (Skin Infections) के मरीजों की संख्या स्थानीय अस्पतालों में अचानक से बढ़ने लगी है। हालांकि जिला प्रशासन, नगर निगम और स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा राहत सामग्री, क्लोरीन की गोलियां, ब्लीचिंग पाउडर और मोबाइल मेडिकल वैन भेजने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन स्थानीय निवासियों का आरोप है कि धरातल पर राहत कार्य अभी भी नाकाफी साबित हो रहे हैं और लोगों को अपने दम पर इस आपदा का सामना करना पड़ रहा है।
फैजुल्लागंज के हताश और बेघर हो चुके पीड़ित नागरिकों का कहना है कि हर साल बरसात के मौसम में उन्हें इस तरह की जलभराव और बाढ़ की विभीषिका का सामना करना पड़ता है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई भी स्थाई समाधान (Permanent Solution) आज तक नहीं निकाला गया है। इस इलाके में जल निकासी (Drainage System) की व्यवस्था बेहद लचर है, जिसके कारण थोड़ी सी बारिश में ही पूरा क्षेत्र तालाब बन जाता है। लोगों ने सरकार और नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि इस इलाके की सीवर और ड्रेनेज व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त किया जाए, पीड़ितों को उचित मुआवजा दिया जाए और स्वास्थ्य टीमों को घर-घर भेजकर युद्धस्तर पर फॉगिंग व सैनिटाइजेशन का काम कराया जाए ताकि किसी बड़ी जनहानि को रोका जा सके।
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