
राजधानी लखनऊ में हुए सनसनीखेज हत्याकांड की जांच में पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम के हाथ बेहद महत्वपूर्ण व निर्णायक सबूत लगे हैं। अब तक सामने आई जांच और तकनीकी साक्ष्यों ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि वारदात के समय मुख्य आरोपी मानस अकेला नहीं था, बल्कि उसके साथ अन्य लोग भी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मौजूद थे। प्रारंभिक स्तर पर जो आशंकाएं और सवाल उठाए जा रहे थे, वे पुलिस की गहन तफ्तीश में पूरी तरह सच साबित होते दिख रहे हैं। क्राइम सीन के वैज्ञानिक विश्लेषण, डिजिटल फुटप्रिंट्स और फोरेंसिक रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति के आवेश में आकर उठाया गया कदम नहीं, बल्कि एक सुनियोजित षड्यंत्र और सामूहिक संलिप्तता का परिणाम था।
सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल टाइमलाइन ने तोड़ी आरोपी की दलीलें
घटनास्थल और उसके आसपास लगे दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की बारीकी से जांच के बाद जांच अधिकारियों को ऐसी कड़ियां मिली हैं, जिन्होंने केस का रुख पूरी तरह बदल दिया है। सीसीटीवी फुटेज के फ्रेम-दर-फ्रेम विश्लेषण में वारदात से ठीक पहले और वारदात के तुरंत बाद इलाके में संदिग्ध वाहनों और लोगों की आवाजाही दर्ज हुई है। मानस ने पूछताछ के दौरान जो शुरुआती बयान दिए थे, वे सीसीटीवी की टाइमलाइन से पूरी तरह मेल नहीं खा रहे हैं।
जांच में यह स्पष्ट दिखा है कि वारदात वाले स्थान के पास एक संदिग्ध गाड़ी खड़ी थी, जिसमें सवार लोग लगातार मानस के संपर्क में थे। जब वारदात को अंजाम दिया जा रहा था, तब इलाके में रेकी करने और भागने का रास्ता साफ रखने के लिए बैकअप टीम तैनात थी। पुलिस ने इन सभी फुटेज को कब्जे में लेकर डिजिटल एविडेंस के रूप में सुरक्षित कर लिया है।
क्राइम सीन पर एक से अधिक लोगों के फोरेंसिक और फिजिकल साक्ष्य
फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री (FSL) की टीम द्वारा घटनास्थल से जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्य इस केस में सबसे अहम कड़ी साबित हुए हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार, घटनास्थल से मिले फिंगरप्रिंट्स और फुटप्रिंट्स केवल मानस के नहीं हैं, बल्कि वहां कम से कम दो अन्य व्यक्तियों के जैविक निशान और पदचिह्न भी पाए गए हैं।
वारदात में प्रयुक्त हथियार और घटनास्थल पर बिखरे सामान की स्थिति से भी यह स्पष्ट है कि संघर्ष के दौरान एक से अधिक व्यक्तियों ने पीड़ित को काबू में करने का प्रयास किया था। किसी एक व्यक्ति के लिए इतने कम समय में पूरी घटना को अंजाम देकर बिना किसी प्रत्यक्ष शोर-शराबे के निकल जाना तकनीकी रूप से संभव नहीं था। फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की प्राथमिक रिपोर्ट ने जांच अधिकारियों की उस थ्योरी को मजबूती दी है, जिसमें घटना में सह-आरोपियों की सक्रिय मौजूदगी की बात कही गई थी।
कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) और डिलीटेड चैट्स से खुला राज
इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस टीम ने आरोपी मानस और उसके करीबी संपर्कों के मोबाइल डेटा का डंप विश्लेषण किया। इस तकनीकी जांच में यह बात सामने आई कि वारदात से 48 घंटे पहले से लेकर घटना के कुछ घंटे बाद तक मानस लगातार कुछ विशिष्ट नंबरों से संपर्क में था।
पुलिस की साइबर विंग ने जब मोबाइल फोनों से डिलीट किए गए व्हाट्सएप चैट्स, कॉल लॉग्स और लोकेशन हिस्ट्री को रीकवर किया, तो साजिश की पूरी रूपरेखा सामने आ गई। चैट्स में इस्तेमाल किए गए कोडवर्ड्स और बातचीत के अंश इस बात की ओर सीधा इशारा कर रहे हैं कि घटना की योजना पहले से तैयार की गई थी और इसमें शामिल सभी लोगों को उनके काम बांटे गए थे। इतना ही नहीं, घटना के तुरंत बाद मानस को शहर से सुरक्षित निकालने और साक्ष्यों को नष्ट करने की कोशिश में भी इन मददगारों ने सक्रिय भूमिका निभाई थी।
शुरुआती थ्योरी को दरकिनार कर पुलिस ने बढ़ाया जांच का दायरा
मामले की शुरुआत में इसे व्यक्तिगत रंजिश या तात्कालिक विवाद से जोड़कर देखा जा रहा था और यह माना जा रहा था कि पूरी वारदात मानस द्वारा अकेले ही की गई है। हालांकि, मामले में शुरुआत से ही उठ रहे सवालों और तकनीकी विसंगतियों को देखते हुए पुलिस कमिश्नरेट ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।
एसआईटी की पड़ताल में जैसे-जैसे कड़ियां जुड़ती गईं, शुरुआती थ्योरी कमजोर पड़ती गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने जांच को भटकाने के लिए पूरी जिम्मेदारी खुद पर लेने की कोशिश की थी ताकि मुख्य साजिशकर्ताओं और मौके पर मौजूद सहयोगियों को बचाया जा सके। लेकिन वैज्ञानिक साक्ष्यों, टावर लोकेशन और भौतिक सबूतों के सामने आरोपी के मनगढ़ंत दावे टिक नहीं सके।
सह-आरोपियों की तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी, कई हिरासत में
नए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने अब अपनी कार्रवाई का दायरा लखनऊ से लेकर आसपास के जिलों और अन्य राज्यों तक बढ़ा दिया है। पुलिस की चार विशेष टीमें उन संदिग्धों की तलाश में जुटी हैं, जिनकी मौजूदगी वारदात के समय और उसके ठीक बाद तकनीकी रूप से दर्ज की गई है।
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने मानस के दो करीबी सहयोगियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है, जिनके फोन की लोकेशन वारदात के वक्त उसी ग्रिड में पाई गई थी। इन संदिग्धों से पुलिस लाइन में गहन पूछताछ जारी है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि वारदात में हथियार किसने मुहैया कराया था, रेकी किसने की थी और साक्ष्यों को मिटाने में किन-किन लोगों की प्रत्यक्ष भूमिका रही है।
साजिश की धारा 120B के तहत चार्जशीट की तैयारी
कानूनी जानकारों के अनुसार, नए साक्ष्यों के मिलने के बाद अब इस पूरे मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की आपराधिक षड्यंत्र (Conspiracy) और साक्ष्य मिटाने से जुड़ी सख्त धाराएं जोड़ी जा रही हैं। पुलिस का लक्ष्य है कि सभी आरोपियों के खिलाफ पुख्ता साइंटिफिक, डिजिटल और ओरल एविडेंस की एक ऐसी मजबूत चार्जशीट तैयार की जाए, जिससे अदालत में आरोपियों को किसी भी प्रकार की कानूनी राहत न मिल सके।
लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट के आला अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मामले में किसी भी स्तर पर कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी और घटना में शामिल हर एक चेहरे को बेनकाब कर कानून के कटघरे में खड़ा किया जाएगा। आने वाले 24 से 48 घंटे इस पूरे हत्याकांड की गुत्थी को अंतिम रूप देने के लिहाज से बेहद निर्णायक माने जा रहे हैं।
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