लखनऊ में विकराल हुई बाढ़: कॉलोनियों में पानी रोकने के लिए सड़क पर बना मिट्टी का बांध

राजधानी लखनऊ में गोमती नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर और बैकफ्लो ने अब शहर के रिहायशी इलाकों में आपातकाल जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। तटीय इलाकों के बाद अब पानी गोमती नगर विस्तार, सुलतानपुर रोड और शहीद पथ से सटी दर्जनों बहुमंजिला सोसायटियों और रिहायशी कॉलोनियों की चौखट तक पहुंच चुका है। हालात इस कदर बेकाबू हो चुके हैं कि पानी को बस्तियों और मुख्य सड़कों पर घुसने से रोकने के लिए नगर निगम और जिला प्रशासन को आनन-फानन में सड़कों के बीचों-बीच जेसीबी मशीनों से मिट्टी और बालू की बोरियां डालकर अस्थायी बांध बनाना पड़ा है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच ड्रेनेज सिस्टम के पूरी तरह ध्वस्त होने और प्राकृतिक जल निकासी के रास्तों पर हुए अतिक्रमण को लेकर लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। प्राकृतिक नालों को पाटने, जलभराव के रास्ते रोकने और बिना उचित जल निकासी व्यवस्था के अंधाधुंध निर्माण करने वाले कई नामी बिल्डरों और डेवलपर्स को नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब तलब किया गया है।

सड़कों पर बना मिट्टी का अस्थायी बांध: पानी रोकने की आखिरी कोशिश

गोमती नगर विस्तार के निचले सेक्टर्स और शहीद पथ के पास जब गोमती का पानी नालों के रास्ते उफनकर मुख्य मार्गों पर बहने लगा, तो स्थानीय निवासियों में अफरातफरी मच गई।

पानी को सोसायटियों के बेसमेंट और घरों में दाखिल होने से रोकने के लिए प्रशासन ने आपातकालीन कदम उठाते हुए सड़कों पर डंपरों से मिट्टी गिरवाई और भारी-भरकम मिट्टी का बांध खड़ा कर दिया। इसके साथ ही हजारों बालू की बोरियां लगाकर पानी के बहाव को मोड़ने की कोशिश की जा रही है। मुख्य संपर्क मार्गों पर अचानक बने इस अस्थायी बांध के कारण कई इलाकों में वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए लंबे चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

पानी घुसने से बेसमेंट बने तालाब, लिफ्ट और बिजली आपूर्ति बंद

निचले इलाकों की कई बड़ी रिहायशी सोसायटियों में बाढ़ का गंदा पानी बेसमेंट में घुस चुका है।

पानी भरने के कारण सुरक्षा कारणों से सोसायटियों की लिफ्ट बंद कर दी गई है और बिजली के पैनल डूबने के डर से बिजली आपूर्ति काट दी गई है। हजारों लोग 10वीं और 14वीं मंजिल पर बिना बिजली और पानी के कैद होकर रह गए हैं। नगर निगम द्वारा दर्जनभर से अधिक बड़े हॉर्सपावर के सबमर्सिबल और डी-वाटरिंग पंप लगाए गए हैं ताकि बेसमेंट और सड़कों से पानी को निकालकर वापस मुख्य ड्रेन में फेंका जा सके, लेकिन नदी का जलस्तर ऊंचा होने के कारण पानी लगातार बैकफ्लो मार रहा है।

LDA का बिल्डरों पर हंटर: नालों को पाटने पर जारी हुई नोटिस

बाढ़ के इस भयावह मंजर ने शहर के अनियोजित विकास और बिल्डरों की मनमानी की पोल खोलकर रख दी है।

प्रशासनिक जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि गोमती नगर विस्तार और शहीद पथ के आसपास कई बड़े रियल एस्टेट डेवलपर्स और निजी बिल्डरों ने अपने प्रोजेक्ट्स का दायरा बढ़ाने के चक्कर में प्राकृतिक नालों और जल निकासी के मूल प्रवाह को या तो मिट्टी डालकर पाट दिया या फिर बेहद संकरा कर दिया। इसी कारण बारिश और नदी का पानी स्वाभाविक रूप से बाहर नहीं निकल पा रहा है। एलडीए उपाध्यक्ष के निर्देश पर आधा दर्जन से अधिक बड़े बिल्डरों को कारण बताओ नोटिस जारी की गई है। नोटिस में पूछा गया है कि जब प्रोजेक्ट का लेआउट पास हुआ था, तब ड्रेनेज का जो मास्टर प्लान दिखाया गया था, उसे जमीन पर लागू क्यों नहीं किया गया? चेतावनी दी गई है कि यदि बिल्डरों ने तुरंत अपने स्तर पर जल निकासी की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की, तो उनके प्रोजेक्ट्स के नक्शे निरस्त किए जाएंगे और भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

प्रशासन ने तैनात की राहत टीमें, निगरानी के लिए ड्रोन सक्रिय

लखनऊ के जिलाधिकारी और नगर आयुक्त खुद प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं।

हालात की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों का सहारा लिया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पानी किन-किन नए रास्तों से शहर के भीतर दाखिल हो रहा है। एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को बोट्स के साथ तैनात रखा गया है ताकि किसी भी सोसायटी या गांव में जलस्तर खतरनाक स्तर पर पहुंचने पर तुरंत रेस्क्यू किया जा सके। प्रशासन ने बिल्डरों को दो टूक अल्टीमेटम दिया है कि वे अपनी सोसायटियों में फंसे निवासियों के लिए जनरेटर, पीने के पानी और भोजन की तत्काल व्यवस्था करें, अन्यथा आपराधिक लापरवाही की धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

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