
मुंबई/जोधपुर: बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान और जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के बीच पिछले कई महीनों से जारी जानलेवा रंजिश और धमकियों के सिलसिले के बीच बिश्नोई परिवार की ओर से एक बड़ा और अप्रत्याशित बयान सामने आया है। लॉरेंस बिश्नोई के परिजनों और परिवार के बुजुर्गों ने सुपरस्टार सलमान खान को दशकों पुरानी दुश्मनी को हमेशा के लिए दफन करने का एक सीधा ‘ऑफर’ दिया है। गैंगस्टर के परिवार का कहना है कि यदि सलमान खान अपने अहंकार को त्यागकर राजस्थान स्थित बिश्नोई समाज के सबसे पावन तीर्थ स्थल ‘मुक्ति धाम मुकाम’ या मंदिर में आकर समाज के सामने दोनों हाथ जोड़कर सच्चे मन से क्षमा मांग लेते हैं, तो बिश्नोई समाज बड़ा दिल दिखाते हुए उन्हें माफ करने पर विचार कर सकता है। इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि करोड़ों रुपये खर्च करके बुलेटप्रूफ गाड़ियों और दर्जनों कमांडो के सुरक्षा घेरे में खौफ के साए में जीने से बेहतर है कि सलमान खान अपनी गलती स्वीकार करें और इस पूरे विवाद को शांतिपूर्वक समाप्त करें।
क्या है लॉरेंस बिश्नोई के परिवार का ‘माफी ऑफर’ और क्यों रखी गई यह शर्त?
लॉरेंस बिश्नोई के पैतृक गांव और परिवार से जुड़े बुजुर्गों ने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि बिश्नोई समुदाय किसी की जान लेने का भूखा नहीं है, बल्कि यह पूरा विवाद जीव रक्षा, आस्था और आत्मसम्मान से जुड़ा हुआ है। लॉरेंस के परिजनों का कहना है कि 1998 के काले हिरण शिकार कांड ने पूरे बिश्नोई समाज की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई थी, क्योंकि बिश्नोई पंथ में काले हिरण को भगवान जांभोजी (गुरु जम्भेश्वर) का स्वरूप मानकर पूजा जाता है। परिवार के अनुसार, यदि सलमान खान सचमुच अपनी और अपने परिवार की शांति चाहते हैं, तो उन्हें अदालत के फैसलों से इतर सामाजिक स्तर पर पहल करनी होगी। उन्हें बिश्नोई समाज के धार्मिक स्थल पर आकर नारियल और प्रसाद चढ़ाना चाहिए और समाज के पंचों के सामने यह स्वीकार करना चाहिए कि अनजाने में उनसे एक बड़ा अपराध हुआ था जिसके लिए वे क्षमा प्रार्थी हैं। बिश्नोई परंपरा में पश्चाताप करने वाले को माफ करने का नियम है, और यदि सलमान ऐसा करते हैं तो समाज उन्हें माफ कर देगा, जिसके बाद लॉरेंस बिश्नोई या किसी अन्य गिरोह के पास उनसे बदला लेने की कोई नैतिक वजह नहीं बचेगी।
‘करोड़ों की सिक्योरिटी जिंदगी भर नहीं बचा सकती’: सलमान के सुरक्षा घेरे पर साधा निशाना
इंटरव्यू के दौरान बिश्नोई परिवार के बुजुर्ग ने सलमान खान के मौजूदा भारी-भरकम सुरक्षा घेरे पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज सलमान खान अपने ही शहर में कैदी जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं; उनके घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर पुलिस की छावनी बनी हुई है, उनके साथ वाई-प्लस (Y+) श्रेणी के कमांडो चलते हैं और वे भारी भरकम बुलेटप्रूफ कारों में सफर करते हैं। उन्होंने कहा कि इंसान चाहे जितने भी पैसे खर्च कर ले और जितनी भी आधुनिक सुरक्षा खरीद ले, लेकिन कोई भी सुरक्षा घेरा हमेशा के लिए किसी को सुरक्षित नहीं रख सकता। जब तक समाज और उस शक्ति का आक्रोश शांत नहीं होगा, तब तक डर का साया उनके सिर पर मंडराता रहेगा। उन्होंने अभिनेता को सलाह दी कि दौलत और शोहरत के दम पर कानून से बचना एक बात है, लेकिन प्रकृति और किसी समुदाय के संतों के नियमों के आगे झुकना ही बुद्धिमानी है। यदि सलमान खान माफी मांग लेते हैं, तो उन्हें न तो इस भारी सुरक्षा की जरूरत पड़ेगी और न ही हर दिन जान के खतरे के साए में जीना पड़ेगा।
सलीम खान के बयान पर बिश्नोई समाज का तीखा पलटवार: ‘अहंकार में बोल रहे हैं पिता’
इससे पहले सलमान खान के पिता और दिग्गज पटकथा लेखक सलीम खान ने मीडिया में बयान दिया था कि सलमान किसी से माफी क्यों मांगें जब उन्होंने कोई गुनाह ही नहीं किया। सलीम खान ने तर्क दिया था कि यदि सलमान माफी मांगते हैं, तो इसका सीधा मतलब यह होगा कि उन्होंने मान लिया कि उन्होंने हिरण का शिकार किया था, जबकि उन्होंने आज तक एक कॉकरोच को भी नहीं मारा है। सलीम खान के इस रुख पर बिश्नोई समाज और लॉरेंस के परिजनों ने कड़ी नाराजगी जताई है। परिजनों का कहना है कि पिता का यह बयान साफ तौर पर घमंड और अहंकार को दर्शाता है। अगर सलमान खान निर्दोष थे, तो वे 1998 में जोधपुर के जंगलों में आधी रात को हथियारों के साथ क्या कर रहे थे और प्रत्यक्षदर्शियों ने उन्हें क्यों देखा? बिश्नोई समाज का कहना है कि सलीम खान अपने बेटे को बचाने के लिए सच पर पर्दा डाल रहे हैं, लेकिन यही हठधर्मिता और झूठा आत्मसम्मान आज पूरे परिवार के लिए गले की फांस बन चुका है।
26 साल पुराना काला हिरण शिकार कांड: क्यों नहीं भर रहा बिश्नोई समाज का जख्म?
यह पूरा विवाद सितंबर-अक्टूबर 1998 का है, जब फिल्म ‘हम साथ साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान जोधपुर के कांकाणी गांव में दो काले हिरणों के शिकार का मामला सामने आया था। बिश्नोई समाज के स्थानीय ग्रामीणों ने गोली की आवाज सुनकर मौके पर पहुंचकर मृत हिरणों को बरामद किया था और गाड़ी का पीछा किया था। बिश्नोई पंथ की स्थापना 15वीं शताब्दी में गुरु जम्भेश्वर भगवान ने की थी, जिन्होंने प्रकृति और वन्यजीवों की रक्षा के लिए 29 कड़े नियम बनाए थे। इस समुदाय का इतिहास रहा है कि पेड़ों और हिरणों को बचाने के लिए महिलाओं और पुरुषों ने अपने सिर तक कटवा दिए हैं। बिश्नोई समाज काले हिरण को अपने बच्चों की तरह पालता है और महिलाएं उन्हें अपना दूध तक पिलाती हैं। ऐसे में जब एक हाई-प्रोफाइल अभिनेता पर उनके आराध्य जीव की हत्या का आरोप लगा, तो इसे केवल एक कानूनी अपराध नहीं बल्कि उनकी धार्मिक आस्था पर सीधा हमला माना गया। यही वजह है कि 26 साल बीत जाने के बाद भी समाज इस घटना को भूला नहीं है।
बुलेटप्रूफ गाड़ियां और 24 घंटे पहरा: खौफ के साए में कैसे बीत रही ‘भाईजान’ की जिंदगी?
पिछले कुछ वर्षों में लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट द्वारा लगातार दी जा रही धमकियों और अप्रैल में बांद्रा स्थित गैलेक्सी अपार्टमेंट पर हुई अंधाधुंध गोलीबारी के बाद सलमान खान की दिनचर्या पूरी तरह बदल चुकी है। मुंबई पुलिस ने उनकी सुरक्षा को चाक-चौबंद करते हुए घर के चारों ओर दर्जनों सीसीटीवी कैमरे, बुलेटप्रूफ शीशे और मेटल डिटेक्टर्स लगाए हुए हैं। सलमान खान केवल विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत ही शूटिंग या सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए बाहर निकलते हैं। दुबई से आयात की गई नई बुलेटप्रूफ निसान पेट्रोल और टोयोटा लैंड क्रूजर गाड़ियों के काफिले में चलने वाले अभिनेता के आसपास हर समय हथियारों से लैस कमांडो तैनात रहते हैं। यहां तक कि फिल्म सेट पर आने वाले हर जूनियर आर्टिस्ट और क्रू मेंबर की पृष्ठभूमि की भी कड़ी जांच की जा रही है। लगातार मिल रही धमकियों ने न केवल सलमान खान के निजी जीवन को पूरी तरह सीमित कर दिया है, बल्कि उनके पूरे परिवार और फिल्म निर्माताओं को भी भारी मानसिक तनाव में डाल रखा है।
क्या माफी मांगेंगे सलमान खान? कानूनी पचड़े और सामाजिक प्रतिष्ठा के बीच फंसा मामला
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या सलमान खान लॉरेंस के परिवार के इस सुझाव को स्वीकार करते हुए मंदिर जाकर माफी मांगेंगे? कानूनी और रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सलमान खान के लिए ऐसा करना बिल्कुल भी आसान नहीं है। कानूनी दृष्टिकोण से, काला हिरण शिकार मामला अभी भी देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के समक्ष विचाराधीन है। यदि सलमान खान सार्वजनिक रूप से किसी धार्मिक मंच पर जाकर माफी मांगते हैं, तो अभियोजन पक्ष अदालत में इसे उनके अपराध के इकबालिया बयान (Confession of Guilt) के तौर पर पेश कर सकता है, जिससे उनकी कानूनी मुश्किलें कई गुना बढ़ सकती हैं और उन्हें जेल की सजा काटनी पड़ सकती है। वहीं दूसरी ओर, एक मेगास्टार के रूप में उनकी छवि और प्रतिष्ठा भी दांव पर है। यही कारण है कि कानूनी सलाहकार उन्हें किसी भी तरह की सार्वजनिक माफी से बचने की सलाह दे रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या दोनों पक्षों के बीच कोई मध्यस्थता का रास्ता निकलता है या फिर यह दशकों पुरानी अदावत इसी तरह कानूनी और आपराधिक पन्नों में उलझी रहेगी।
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