
अमेरिका के राजनीतिक और खुफिया गलियारों में उस समय बड़ा भूचाल आ गया, जब यह सनसनीखेज रिपोर्ट सामने आई कि अमेरिकी सैन्य बलों द्वारा वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़े जाने के ऑपरेशन से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने एलन मस्क की कंपनी xAI के चैटबॉट ‘ग्रोक’ (Grok) से घंटों सलाह-मशविरा किया था।
प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मीडिया ‘टाइम’ (Time Magazine) द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में व्हाइट हाउस से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया कि ट्रंप ने वेनेजुएला की नौकाओं पर मिसाइल हमले और मादुरो के खिलाफ ऑपरेशन का आदेश देने से हफ्तों पहले ग्रोक से कई सवाल पूछे थे। अब इस खुलासे के बाद वॉशिंगटन में डेमोक्रेटिक सांसदों ने मोर्चा खोल दिया है और मांग की है कि राष्ट्रपति पद के आधिकारिक कार्यों के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ हुई बातचीत के सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं।
ग्रोक से क्या पूछा था ट्रंप ने? AI ने दिया था यह जवाब
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने ग्रोक चैटबॉट से सीधे तौर पर यह जानने की कोशिश की थी कि यदि अमेरिका निकोलस मादुरो को पकड़ लेता है, तो वेनेजुएला की जनता की क्या प्रतिक्रिया होगी।
ग्रोक ने जवाब में कथित तौर पर कहा था कि मादुरो एक ‘दमनकारी और बेहद अलोकप्रिय तानाशाह’ हैं और उनके तख्तापलट या पतन पर वेनेजुएला के बहुत से लोग सड़कों पर जश्न मनाएंगे। रिपोर्ट का दावा है कि जब बाद में अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन में मादुरो को पकड़ा गया और काराकास में जश्न की तस्वीरें सामने आईं, तो ट्रंप ग्रोक की ‘सटीकता’ से खासे प्रभावित दिखे थे। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इस सैन्य फैसले में केवल एआई की राय शामिल थी या शीर्ष सैन्य कमांडरों की सिफारिशें।
सांसदों ने खोला मोर्चा: “क्या विदेशी और सैन्य नीति AI चला रहा है?”
इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की ओवरसाइट कमेटी के शीर्ष डेमोक्रेटिक सांसदों—मैरीलैंड के जेमी रस्किन और कैलिफोर्निया के रॉबर्ट गार्सिया ने कड़ा रुख अपनाया है:
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चैट रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखने की मांग: सांसदों ने प्रेसिडेंशियल रिकॉर्ड्स एक्ट (PRA) का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रपति या उनके सलाहकारों द्वारा आधिकारिक कार्यों के दौरान एआई को दिए गए सभी प्रॉम्प्ट (Prompts) और उनके उत्तर आधिकारिक सरकारी दस्तावेज हैं, जिन्हें मिटाया नहीं जा सकता।
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राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल: सांसदों ने तीखा सवाल उठाया कि क्या दुनिया के सबसे ताकतवर देश की विदेश नीति और सैन्य फैसले किसी टेक्नोलॉजी अरबपति द्वारा बनाए गए एआई चैटबॉट की राय पर आधारित हो रहे हैं?
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11 नवंबर तक ब्रीफिंग की डेडलाइन: सांसदों ने व्हाइट हाउस से 11 नवंबर तक एक बंद कमरे में पूरी विस्तृत ब्रीफिंग देने को कहा है कि व्हाइट हाउस के भीतर किन-किन एआई टूल्स का उपयोग किन नीतियों के लिए किया जा रहा है।
सरकारी कामकाज में AI का बढ़ता दायरा और विवाद
इस विवाद ने अमेरिकी प्रशासन में एआई के बढ़ते दखल को उजागर कर दिया है। केवल ग्रोक ही नहीं, बल्कि पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग) ने सरकारी और सैन्य विश्लेषणों के लिए ओपनएआई (ChatGPT), एंथ्रोपिक (Claude) और गूगल के टूल्स के लिए भी कई मिलियन डॉलर के समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
हालांकि, किसी सैन्य ऑपरेशन और मानवीय जान-माल से जुड़े फैसलों में सीधे तौर पर चैटबॉट की राय लेने का यह पहला सार्वजनिक और विवादित मामला बन गया है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि प्रशासन सभी जरूरी कानूनी दस्तावेजों को कानून के तहत सुरक्षित रखता है। आने वाले दिनों में यह विवाद अमेरिकी संसद में नीतिगत पारदर्शिता और सैन्य फैसलों में एआई की भूमिका पर एक बड़ी कानूनी बहस का रूप ले सकता है।
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