
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रमाबाई अंबेडकर मैदान में दो दिनों तक चली मैराथन मतगणना के बाद जब विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव 2026 के अंतिम नतीजे घोषित हुए, तो उन्होंने प्रदेश के सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया। इस चुनाव का सबसे हैरान करने वाला और अप्रत्याशित पहलू यह रहा कि पूरे प्रदेश की शिक्षक और स्नातक सीटों पर लड़ रहे लगभग सभी मौजूदा (सिटिंग) एमएलसी अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहे, लेकिन सूबे की सत्ता के केंद्र लखनऊ खंड स्नातक सीट पर अप्रत्याशित उलटफेर हो गया। यहां भारतीय जनता पार्टी के सिटिंग एमएलसी इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी कांति सिंह के हाथों 17,127 मतों के भारी-भरकम अंतर से चुनाव हार गए। चुनाव आयोग द्वारा जारी अंतिम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सपा की कांति सिंह को कुल 56,905 वोट मिले, जबकि भाजपा के अवनीश कुमार सिंह 39,778 मतों पर ही सिमट कर रह गए। इस करारी शिकस्त ने भाजपा के रणनीतिकारों को सकते में डाल दिया है, क्योंकि जिस राजधानी में बैठकर पूरी सरकार चलती है, उसी सीट पर पार्टी अपने सिटिंग एमएलसी की सीट गंवा बैठी।
लखनऊ स्नातक सीट पर सपा का मास्टरस्ट्रोक: 2020 की हार का कांति सिंह ने लिया हिसाब बराबर
लखनऊ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का यह चुनावी मुकाबला सिर्फ एक सीट की जंग नहीं था, बल्कि यह 2020 के पुराने हिसाब-किताब को चुकता करने की सीधी लड़ाई थी। साल 2020 के एमएलसी चुनाव में इसी सीट पर भाजपा के अवनीश कुमार सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरीं कांति सिंह को 6,403 मतों से हराकर जीत हासिल की थी। उस वक्त मतगणना के दौरान कांति सिंह ने प्रशासन और सत्ता पक्ष पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। लेकिन इस बार कांति सिंह पूरी तैयारी के साथ समाजवादी पार्टी के सिंबल पर चुनावी मैदान में उतरीं। कांति सिंह प्रतापगढ़ से सपा सांसद डॉ. एस.पी. सिंह पटेल की पत्नी हैं और वे पहले भी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य रह चुकी हैं।
सपा ने इस बार लखनऊ, हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बाराबंकी और रायबरेली जिलों में फैले स्नातक मतदाताओं को जोड़ने के लिए माइक्रो-लेवल पर अभियान चलाया। पहले राउंड की गिनती से ही कांति सिंह ने जो बढ़त बनाई, वह अंतिम चक्र तक लगातार बढ़ती ही चली गई। मतगणना हॉल के भीतर जैसे-जैसे बंडलों की छंटनी हुई और पहली वरीयता के मत गिने गए, अवनीश कुमार सिंह का खेमा खामोश होता गया। 17 हजार से अधिक मतों की यह जीत दर्शाती है कि शिक्षित और डिग्रीधारी मतदाताओं के बीच सपा का नैरेटिव इस बार भाजपा के संगठन पर पूरी तरह भारी पड़ गया।
बाकी सभी सीटों पर ‘सिटिंग’ का जलवा: भाजपा और सपा के पुराने चेहरे कैसे बचा ले गए अपना किला?
इस चुनाव की सबसे अनोखी बात यह रही कि जहां एक तरफ लखनऊ स्नातक सीट पर बदलाव की आंधी चली, वहीं उत्तर प्रदेश की बाकी तमाम सीटों पर मतदाताओं ने अपने पुराने जनप्रतिनिधियों यानी सिटिंग एमएलसी पर ही भरोसा जताया। मेरठ स्नातक क्षेत्र से भाजपा के सिटिंग एमएलसी दिनेश कुमार गोयल ने अपनी सीट आसानी से बचा ली। मेरठ शिक्षक क्षेत्र से भाजपा के सिटिंग एमएलसी श्रीचंद शर्मा फिर से चुनाव जीत गए। बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक सीट पर भाजपा के कद्दावर नेता और सिटिंग एमएलसी डॉ. हरि सिंह ढिल्लों ने सपा प्रत्याशी को 17,676 वोटों के विशाल अंतर से रौंदते हुए दोबारा कब्जा जमाया। आगरा स्नातक सीट पर भी भाजपा के सिटिंग एमएलसी मानवेंद्र प्रताप सिंह का परचम लहराया।
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