
7 अक्टूबर 2001 को जब नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार संवैधानिक पद की शपथ ली थी, तब राज्य विनाशकारी भूकंप और गंभीर प्रशासनिक चुनौतियों से जूझ रहा था। वहां से शुरू हुआ यह सफर आज वर्ष 2026 में अपने 25 गौरवशाली वर्ष पूरे कर चुका है। 13 साल राज्य के मुख्यमंत्री और 12 साल से अधिक समय तक देश के प्रधानमंत्री के रूप में उनका यह कार्यकाल केवल सत्ता का विस्तार नहीं, बल्कि नीति, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण के मॉडल में आमूलचूल बदलाव का प्रतीक है। ‘सीमाओं से परे, संभावनाओं से भरे’ की यह विकास यात्रा क्षेत्रीय सीमाओं को लांघकर भारत को विश्व पटल पर एक निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित करने की गाथा है।
संकट को अवसर में बदलने का गुजरात मॉडल
नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन का पहला दशक गुजरात के सर्वांगीण विकास और आर्थिक पुनरुद्धार को समर्पित रहा। भुज भूकंप की विभीषिका के बाद उन्होंने न केवल शहरों का तेजी से पुनर्निर्माण कराया, बल्कि ‘वाइब्रेंट गुजरात समिट’ जैसे दूरदर्शी नवाचारों के जरिए राज्य को देश की औद्योगिक राजधानी बना दिया। ज्योतिग्राम योजना के माध्यम से 24 घंटे बिजली की आपूर्ति, नर्मदा नहर नेटवर्क का विस्तार और कृषि महोत्सव जैसे अभियानों ने यह साबित किया कि सुशासन और विकास को चुनाव जीतने का सबसे बड़ा माध्यम बनाया जा सकता है। गुजरात के इसी प्रशासनिक और आर्थिक प्रयोग ने राष्ट्रीय स्तर पर ‘मोदी मॉडल ऑफ गवर्नेंस’ की मजबूत नींव रखी।
राष्ट्रीय पटल पर सत्ता परिवर्तन और अंत्योदय का संकल्प
वर्ष 2014 में देश की बागडोर संभालने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने शासन के केंद्र में ‘अंत्योदय’ यानी समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के संकल्प को रखा। जन-धन, आधार और मोबाइल (JAM ट्रिनिटी) की मदद से भारत ने दुनिया के सबसे बड़े डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) तंत्र को साकार किया, जिसने बिचौलियों की भूमिका को पूरी तरह समाप्त कर दिया। स्वच्छ भारत अभियान, हर घर जल, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और आयुष्मान भारत जैसी पहलों ने देश के करोड़ों वंचित नागरिकों के जीवन स्तर को बुनियादी रूप से ऊंचा उठाया। इन कल्याणकारी नीतियों ने यह स्पष्ट किया कि आर्थिक सुधारों का सीधा लाभ समाज के सबसे कमजोर तबके तक पहुंचना चाहिए।
आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल क्रांति और बुनियादी ढांचे का कायाकल्प
पिछले एक दशक में भारत ने बुनियादी ढांचे और तकनीक के क्षेत्र में अभूतपूर्व छलांग लगाई है। पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे नेटवर्क का तीव्र विस्तार और वंदे भारत ट्रेनों ने देश के लॉजिस्टिक्स परिदृश्य को बदल दिया। वहीं दूसरी ओर, यूपीआई (UPI) और इंडिया स्टैक के माध्यम से भारत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का वैश्विक अगुआ बनकर उभरा। ‘मेक इन इंडिया’ और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीमों के चलते भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और मोबाइल निर्माण का प्रमुख केंद्र बना, जिसने देश को आत्मनिर्भरता की राह पर अग्रसर किया।
सीमाओं से परे: 2047 तक ‘विकसित भारत’ की ओर अग्रसर राष्ट्र
वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व ने भारत की विदेश नीति को ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ से आगे बढ़ाकर ‘वैश्विक समाधान प्रदाता’ की भूमिका में तब्दील कर दिया है। जी-20 की सफल अध्यक्षता, ग्लोबल साउथ की मुखर आवाज बनना और संकट के समय दुनिया को वैक्सीन व मानवीय सहायता उपलब्ध कराना भारत की बढ़ती कूटनीतिक शक्ति का प्रमाण है। अनुच्छेद 370 की समाप्ति और सीमा सुरक्षा पर कठोर रुख ने जहां राष्ट्रीय संप्रभुता को दृढ़ किया, वहीं 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने का विजन देश को नई ऊर्जा दे रहा है। 25 वर्षों का यह समग्र सफर दर्शाता है कि जब इच्छाशक्ति अडिग हो, तो सीमाएं सिमट जाती हैं और संभावनाएं अनंत हो जाती हैं।
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