
सनातन परंपरा में ‘ॐ’ (ओम) को संपूर्ण ब्रह्मांड की प्रथम और मूल ध्वनि माना गया है। प्राचीन ऋषि-मुनियों से लेकर आधुनिक न्यूरोसाइंटिस्ट्स तक, सभी ने यह स्वीकार किया है कि इस एकाक्षर मंत्र में असाधारण कंपन और ऊर्जा समाहित है। जब सुबह सोकर उठने के बाद वातावरण शांत और शुद्ध होता है, उस समय किया गया ॐ का जाप शरीर के भीतर एक नई प्राण ऊर्जा का संचार करता है। यह केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं है, बल्कि एक शक्तिशाली ध्वनि चिकित्सा (Sound Therapy) और प्राणायाम का रूप है, जो सीधे हमारे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। दिन की शुरुआत केवल 10 से 15 मिनट ॐ के उच्चारण से करने पर शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्तर पर गहरा संतुलन स्थापित होता है।
मानसिक शांति और तनाव से मुक्ति: कोर्टिसोल लेवल को कम करता है ॐ का कंपन
सुबह उठते ही अक्सर लोग दिनभर की जिम्मेदारियों, काम के बोझ और भविष्य की चिंताओं को लेकर तनावग्रस्त हो जाते हैं। जब आप पद्मासन या सुखासन में बैठकर गहरी सांस भरकर ‘अ-उ-म’ की संयुक्त ध्वनि का उच्चारण करते हैं, तो इससे उत्पन्न होने वाला कंपन शरीर में ‘वेगस नर्व’ (Vagus Nerve) को सक्रिय कर देता है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, वेगस नर्व के उत्तेजित होने से शरीर का पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिव हो जाता है, जिससे तनाव पैदा करने वाले हॉर्मोन कोर्टिसोल (Cortisol) के स्तर में तेजी से गिरावट आती है। इसके नियमित अभ्यास से मन तुरंत शांत होता है, घबराहट और ओवरथिंकिंग की समस्या से राहत मिलती है और पूरे दिन सकारात्मक व संतुलित मूड बना रहता है।
इसके अलावा, सुबह के समय ॐ का जाप करने से मस्तिष्क की तरंगे ‘अल्फा’ स्थिति में आ जाती हैं। अल्फा तरंगे शांत, सजग और गहरे ध्यान की अवस्था का संकेत होती हैं। जो लोग सुबह उठते ही चिड़चिड़ापन या अनिद्रा के बाद की थकान महसूस करते हैं, उनके लिए यह ध्यान विधि मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को रीसेट करने का काम करती है।
फेफड़ों की क्षमता में सुधार और दिल की सेहत: ब्लड प्रेशर होता है सामान्य
ॐ का उच्चारण करते समय ली जाने वाली गहरी श्वास और धीमी गति से छोड़ी जाने वाली ध्वनि हमारे श्वसन तंत्र के लिए अत्यंत लाभकारी है। जब आप ‘अ’ और ‘उ’ का उच्चारण करते हैं, तो छाती और पेट के निचले हिस्से में फैलाव होता है, जिससे फेफड़ों में ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है। इसके बाद जब होंठ बंद करके ‘म’ ध्वनि का गुंजन (Humming) किया जाता है, तो नासिका मार्ग और साइनस में नाइट्रिक ऑक्साइड का उत्पादन कई गुना बढ़ जाता है। नाइट्रिक ऑक्साइड फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं को फैलाने और पूरे शरीर में ऑक्सीजन के प्रवाह को बेहतर बनाने में सहायक होता है।
इस नियंत्रित सांस लेने की प्रक्रिया से हृदय गति (Heart Rate) स्थिर होती है और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को रक्तचाप नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। नियमित जप से रक्त का संचार सुधरता है, जिससे शरीर के हर अंग तक पोषक तत्व और ऑक्सीजन आसानी से पहुंचते हैं, जिससे दिनभर सुस्ती के बजाय ताजगी और ऊर्जा महसूस होती है।
एकाग्रता और याददाश्त में इजाफा: विद्यार्थियों और प्रोफेशनल्स के लिए रामबाण
यदि आपका ध्यान भटकता है या काम में फोकस करने में परेशानी होती है, तो सुबह का ॐ जाप एक प्राकृतिक ब्रेन टॉनिक की तरह कार्य करता है। ॐ की ध्वनि के तीन घटक—’अ’ (जो नाभि से उठता है), ‘उ’ (जो छाती और गले में गूंजता है), और ‘म’ (जो सिर और मस्तिष्क में कंपन करता है)—पूरे शरीर के ऊर्जा चक्रों को संतुलित करते हैं। मस्तिष्क के दोनों गोलार्द्धों (Left and Right Hemispheres) के बीच संतुलन स्थापित होने से सीखने की क्षमता, याददाश्त और मानसिक स्पष्टता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
विशेष रूप से विद्यार्थियों और मानसिक श्रम करने वाले प्रोफेशनल्स के लिए यह दिन शुरू करने का सबसे प्रभावी तरीका है। सुबह शांत कमरे या खुली हवा में बैठकर रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें, आंखें बंद करें और 11, 21 या 108 बार ॐ का स्पष्ट उच्चारण करें। जप समाप्त होने के बाद दोनों हथेलियों को आपस में रगड़कर आंखों और चेहरे पर लगाएं। इस अभ्यास से मिलने वाली आंतरिक शांति व्यक्ति को पूरे दिन संयमित और ऊर्जावान बनाए रखती है।
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