
इजरायल के 26वें नेसेट (संसद) चुनाव में मंगलवार देर रात आए एग्जिट पोल्स में सत्ता से बाहर होते दिख रहे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने वोटों की वास्तविक गिनती में जबर्दस्त वापसी करके अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। एग्जिट पोल्स में जहां विपक्षी खेमे और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट की अगुवाई वाले गुट को बढ़त दिखाई गई थी, वहीं चुनाव आयोग द्वारा 70 प्रतिशत से अधिक मतपेटियों की गिनती पूरी किए जाने के बाद नेतन्याहू का दक्षिणपंथी ब्लॉक 55 से 59 सीटों के दायरे में बढ़त बनाए हुए है।
इस अप्रत्याशित चुनावी उलटफेर के बीच दुनिया के सबसे ताकतवर नेता और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरी वापसी का श्रेय सीधे तौर पर अपने समर्थन को दे दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि उनके द्वारा चुनाव से ठीक पहले खुलकर किए गए समर्थन (Endorsement) ने इजरायल के चुनावी माहौल का रुख पूरी तरह बदल दिया और जो चुनाव नेतन्याहू हारते हुए दिख रहे थे, उसमें वे सबसे आगे निकल आए।
‘द होल टाइड टर्न्ड’: एयरफोर्स वन से ट्रंप ने ली चुनावी क्रेडिट
टेक्सास की एक रैली से लौटते समय राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान ‘एयरफोर्स वन’ में पत्रकारों से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के चुनाव परिणामों पर खुलकर अपनी बात रखी। ट्रंप ने कहा, “मैंने सुना था कि पोल के आंकड़े और एग्जिट पोल्स गलत साबित हो रहे हैं। नेतन्याहू ने बेहद शानदार प्रदर्शन किया है। मुकाबला बेहद कड़ा था, लेकिन जब मेरा समर्थन सामने आया, तो उसने उनकी बहुत बड़ी मदद की। पूरा चुनावी पासा (Tide) ही पलट गया।”
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर भी एक अमेरिकी राजनीतिक विश्लेषक के बयान को साझा किया, जिसमें कहा गया था कि मतदान से 48 घंटे पहले इजरायली मतदाता असमंजस में थे, लेकिन ट्रंप के सार्वजनिक समर्थन के बाद दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी वोटर्स लामबंद होकर मतदान केंद्रों तक पहुंचे। ट्रंप ने संकेत दिया कि इजरायल के शीर्ष नेतृत्व और खुफिया सूत्रों से उन्हें जो जानकारी मिल रही है, उसके मुताबिक नेतन्याहू या तो सीधे जीत रहे हैं या फिर एक बेहद मजबूत गतिरोध (Stalemate) की स्थिति में खड़े हैं, जहां सरकार बनाने की पहली चाबी उन्हीं के पास होगी।
रविवार रात का वह वीडियो: नेतन्याहू ने ट्रंप को क्यों बनाया था चुनावी हथियार?
मतदान से महज दो दिन पहले, यानी रविवार की देर रात बेंजामिन नेतन्याहू ने एक इजरायली एयरफोर्स बेस से रिकॉर्ड किया गया एक आक्रामक वीडियो संदेश जारी किया था। इस वीडियो में नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपनी निजी केमिस्ट्री और रणनीतिक साझेदारी को इजरायल के अस्तित्व की गारंटी के रूप में पेश किया था।
नेतन्याहू ने सीधे ट्रंप को संबोधित करते हुए कहा था, “डोनाल्ड, ईरान के परमाणु खतरे और अब्राहम अकॉर्ड्स को लेकर हमारा काम अभी अधूरा है… और हम इसे मिलकर ही खत्म करेंगे। हम इसे पूरा करेंगे और हमारे अलावा कोई दूसरा यह नहीं कर सकता।” नेतन्याहू की रणनीति साफ थी—वे घरेलू मतदाताओं को यह संदेश देना चाहते थे कि वाशिंगटन में ट्रंप के बैठने के बावजूद यदि इजरायल में कोई कमजोर या बंटी हुई सरकार आती है, तो ईरान और हूतियों के खिलाफ जारी लड़ाई कमजोर पड़ जाएगी। वोटों की गिनती में लिकुड पार्टी को मिले इस जबर्दस्त उछाल ने यह सिद्ध कर दिया है कि सुरक्षा और अमेरिकी रिश्तेदारी के इस कार्ड ने जमीन पर काम किया है।
मतगणना का ताजा अंकगणित: 120 सीटों में कौन कहां खड़ा?
इजरायल के केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, मतगणना की प्रगति के साथ राजनीतिक परिदृश्य इस प्रकार नजर आ रहा है:
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नेतन्याहू का दक्षिणपंथी ब्लॉक: लिकुड पार्टी अकेले 27 से 29 सीटें हासिल करती दिख रही है, जबकि उसके सहयोगी दल (शास, यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म और ओत्ज्मा येहुदित) मिलकर इस गुट को 55 से 57 सीटों के पार पहुंचा रहे हैं। हालांकि, बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों के आंकड़े से यह गुट अब भी 4 से 6 सीटें दूर है।
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गादी आइजनकोट का विपक्षी ब्लॉक: पूर्व सेना प्रमुख की ‘याशर’ पार्टी लगभग 20 से 22 सीटों पर सिमटती दिख रही है और पूरे विपक्षी गुट को 48 से 50 सीटें मिलने का अनुमान है।
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अरब पार्टियां और अन्य: अरब दलों (जॉइंट लिस्ट व राम) को लगभग 16 सीटें मिलने का रुझान है, जो दोनों यहूदी खेमों के बीच की खाई को और गहरा कर रहा है।
सैनिकों के डाक मतपत्रों (Double Envelopes) की गिनती अभी बाकी है। इजरायल के चुनावी इतिहास में सैनिकों का वोट हमेशा से दक्षिणपंथी और सुरक्षा-केंद्रित पार्टियों के पक्ष में झुकता रहा है, जिससे नेतन्याहू खेमे को उम्मीद है कि अंतिम आंकड़े आने तक वे 60 या 61 के जादुई आंकड़े को छू सकते हैं।
अरब पार्टियों पर सियासी घमासान: ‘एंटी-जायोनी सरकार बर्दाश्त नहीं’
बढ़त हासिल करने के बाद बुधवार सुबह यरुशलम में पत्रकारों से बात करते हुए नेतन्याहू ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि वामपंथी और विपक्षी नेता सत्ता की खातिर उन अरब पार्टियों के साथ गठबंधन करने की फिराक में हैं जो इजरायल के अस्तित्व और यहूदी राष्ट्र की अवधारणा का विरोध करती हैं। नेतन्याहू ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “हम इजरायल को खतरे में नहीं डाल सकते। ऐसी सरकार नहीं बनाई जा सकती जो उन अरब पार्टियों की बैसाखियों पर टिकी हो जो हमारी सेना को युद्ध अपराधी कहती हैं।”
दूसरी ओर, वामपंथी डेमोक्रेट्स पार्टी के प्रमुख यायर गोलन ने विपक्ष से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि 120 में से 65 सीटें नेतन्याहू विरोधी खेमे (अरब दलों समेत) के पास हैं, इसलिए नेतन्याहू को बहुमत का झूठा दावा करने का कोई हक नहीं है।
आगे की राह: क्या नेतन्याहू खींच पाएंगे 61 का जादुई आंकड़ा?
भले ही डोनाल्ड ट्रंप अपने समर्थन को इस जीत की वजह बता रहे हों, लेकिन इजरायल की घरेलू राजनीति में सरकार बनाना अभी भी एक कठिन पहेली बना हुआ है। यदि अंतिम परिणामों में नेतन्याहू 58 या 59 सीटों पर अटक जाते हैं, तो उन्हें नफ्ताली बेनेट, एविग्डोर लिबरमैन या विपक्षी खेमे के व्यक्तिगत सांसदों को तोड़कर अपने पाले में लाना होगा।
यदि कोई भी पक्ष 61 सांसदों का समर्थन पत्र राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग को नहीं सौंप पाता, तो इजरायल एक बार फिर बिना सरकार के लटक जाएगा और कुछ ही महीनों में दोबारा चुनाव कराने की नौबत आ सकती है। हालांकि, मौजूदा रुझानों ने इतना तो तय कर दिया है कि जिसे दुनिया ‘हारा हुआ’ मानकर विदाई की पटकथा लिख रही थी, उस 77 वर्षीय राजनीतिक योद्धा बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ मिलकर मुकाबले को पूरी तरह जीवित कर दिया है।
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