देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 का बिगुल बजने में भले ही अभी करीब एक साल का वक्त बाकी हो, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पश्चिम बंगाल और असम के हालिया विधानसभा चुनावों में मिली बंपर सफलता से गदगद भाजपा अब यूपी में ‘बंगाल चुनाव मॉडल’ लागू करने जा रही है। इस ‘माइक्रो-मैनेजमेंट’ रणनीति के तहत पार्टी ने जमीनी स्तर पर संगठन को अभेद्य बनाने के लिए राज्यभर में लगभग 1.76 लाख “बूथ पालक” नियुक्त करने का एक मेगा प्लान तैयार किया है, ताकि विपक्ष के हर वार को नाकाम किया जा सके।
लखनऊ से दिल्ली तक बैठकों का दौर, जिला अध्यक्षों को मिले कड़े निर्देश
यूपी चुनाव को लेकर नई दिल्ली से लेकर लखनऊ तक हाई-लेवल बैठकों का दौर शुरू हो चुका है, जहां संगठन के नए ढांचे को लेकर गहरा मंथन चल रहा है। हाल ही में लखनऊ में भाजपा के 98 संगठनात्मक जिलों के अध्यक्षों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने सभी जिला प्रमुखों को साफ शब्दों में निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ‘बंगाल चुनाव मॉडल’ को हूबहू दोहराएं। इसके तहत बूथ समितियों, पन्ना प्रमुखों और शक्ति केंद्रों को नए सिरे से बेहद मजबूत और सक्रिय करने के लिए कहा गया है।
1.62 लाख बूथों का होगा एक्सरे, 14 हजार नए मतदान केंद्रों पर नजर
बीजेपी ने आगामी महीनों में उत्तर प्रदेश के सभी 1,62,459 विधानसभा बूथों का गहन आकलन करने का लक्ष्य रखा है। इसमें 1,918 मंडलों में फैले 27,633 शक्ति केंद्र भी शामिल होंगे। दिलचस्प बात यह है कि मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के बाद राज्य में लगभग 14,000 नए बूथ जुड़ गए हैं। पार्टी आलाकमान ने जिला इकाइयों को सख्त निर्देश दिए हैं कि इन नए मतदान केंद्रों पर बिना किसी देरी के तुरंत बूथ कमेटियां बनाई जाएं और वहां समर्पित बूथ अध्यक्षों के साथ-साथ ‘बूथ पालकों’ (देखभाल करने वाले) की तैनाती की जाए।
क्या है बीजेपी का वो 4-पॉइंट ‘मेगा प्लान’ जिसने बढ़ाई विपक्ष की टेंशन?
उत्तर प्रदेश में प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने के लिए भाजपा ने चार प्रमुख रणनीतिक बिंदुओं पर फोकस किया है:
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पन्ना प्रमुखों की सेना: पन्ना प्रमुख प्रणाली के तहत हर एक पन्ना प्रमुख को वोटर लिस्ट के महज एक पन्ने पर दर्ज 30 से 35 मतदाताओं की जिम्मेदारी दी जाएगी। वे इन परिवारों से नियमित संपर्क में रहेंगे।
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शक्ति केंद्रों का चक्रव्यूह: हर 5 से 7 बूथों को मिलाकर एक शक्ति केंद्र बनाया जाएगा, जहां एक कुशल समन्वयक तैनात होगा। इनका मुख्य काम उन अनिश्चित (फ्लोटिंग) मतदाताओं को प्रभावित करना होगा जो आखिरी वक्त पर फैसला लेते हैं।
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बूथों का वर्गीकरण (A, B, C कैटेगिरी): वैज्ञानिक तरीके से रणनीति बनाने के लिए भाजपा ने सभी बूथों को ‘मजबूत’, ‘प्रतिस्पर्धी’ और ‘कमजोर’ श्रेणियों में बांटने का फैसला किया है, ताकि कमजोर क्षेत्रों में ज्यादा संसाधन और निगरानी रखी जा सके।
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हाइपर-लोकल चुनाव प्रचार: इस बार पार्टी किसी बड़े मुद्दे के भरोसे रहने के बजाय ‘हाइपर-लोकल’ स्तर पर जाएगी। यानी हर बूथ पर वहां के स्थानीय मुद्दों और समस्याओं के आधार पर विशेष छोटे-छोटे प्रचार अभियान चलाए जाएंगे। इसके लिए ‘जोन वाइज’ प्रभारियों की नियुक्ति पर भी विचार हो रहा है।
लोकसभा की कमियों से लिया सबक, उन 61 सीटों पर विशेष नजर जहां मिला था धोखा
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस महा-मंथन में 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान सामने आईं सांगठनिक कमियों को दूर करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया। इस कड़ी में भाजपा का मुख्य फोकस उत्तर प्रदेश की उन 61 विधानसभा सीटों पर है, जिन्हें पार्टी ने साल 2017 में तो बड़े अंतर से जीता था, लेकिन 2022 के चुनावों में उन्हें गंवाना पड़ा था। सभी जिला अध्यक्षों को इन 61 क्षेत्रों में बूथवार समीक्षा करने और हार के असली कारणों की पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाने को कहा गया है। इन इलाकों में नए सामाजिक समीकरण बनाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
सपा के ‘PDA’ फॉर्मूले को बेअसर करने की बड़ी तैयारी
विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी के ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) कार्ड का मुकाबला करने के लिए भाजपा ने अभी से विभिन्न सामाजिक और जातीय समूहों के बीच अपनी पैठ मजबूत करनी शुरू कर दी है। इसके अलावा, विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) को ध्यान में रखते हुए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कार्यकर्ताओं को एक बेहद जरूरी काम सौंपा है। उन्होंने कहा है कि कार्यकर्ता गांव-गांव, घर-घर जाकर उन पात्र मतदाताओं की पहचान करें, जिनके नाम किसी वजह से वोटर लिस्ट से गायब हैं और फॉर्म-6 भरवाकर तुरंत उनके नाम जुड़वाने में मदद करें। भाजपा के इस आक्रामक और माइक्रो-लेवल एक्शन प्लान से साफ है कि वह 2027 की जंग में विपक्ष को संभलने का कोई मौका नहीं देना चाहती।
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