डायबिटीज (Diabetes) या मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जिसमें खानपान को लेकर मरीजों के मन में सबसे ज्यादा कंफ्यूजन रहती है। अक्सर शुगर के मरीजों के बीच यह एक बड़ा सवाल बना रहता है कि उन्हें रोजाना दूध का सेवन करना चाहिए या नहीं। कई लोग तो इस डर से दूध और अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स (जैसे दही, पनीर) को अपनी डाइट से पूरी तरह बाहर कर देते हैं कि इससे उनका ब्लड शुगर लेवल अचानक बढ़ (Spike) जाएगा। वहीं, कुछ लोग बिना किसी परहेज के फुल फैट दूध पीते रहते हैं।
आखिर इनमें से सही और सुरक्षित तरीका क्या है? क्या वाकई डायबिटीज में दूध जहर के समान है या फिर यह सेहत के लिए वरदान साबित हो सकता है? इसी महत्वपूर्ण विषय पर प्रसिद्ध डायबिटीज एक्सपर्ट डॉ. अमित कुमार सिन्हा ने अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मरीजों का मार्गदर्शन किया है। आइए जानते हैं इस पर एक्सपर्ट की क्या राय है।
डायबिटीज में दूध पीना पूरी तरह सेफ है या नहीं? (Is Milk Safe in Diabetes?)
डॉ. अमित कुमार सिन्हा के अनुसार, सबसे पहले हमें दूध की बनावट और उसके वैज्ञानिक पहलू को समझना होगा:
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लैक्टोज का असर: दूध में प्राकृतिक रूप से ‘लैक्टोज’ (Lactose) नामक शुगर पाई जाती है। यह लैक्टोज शरीर में जाने के बाद ब्लड शुगर लेवल को थोड़ी मात्रा में बढ़ा सकता है।
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पोषक तत्वों का खजाना: लैक्टोज की मौजूदगी का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप दूध पीना ही छोड़ दें। दूध प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन बी-12 और पोटेशियम जैसे बेहद जरूरी पोषक तत्वों का मुख्य स्रोत है, जो हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिए अनिवार्य हैं।
डॉक्टर का निष्कर्ष: आपको अपनी डाइट से दूध को पूरी तरह बैन करने की कोई जरूरत नहीं है। अगर आप इसे सही तरीके और सीमित मात्रा में पीते हैं, तो डायबिटीज में दूध का सेवन पूरी तरह सुरक्षित (Safe) और फायदेमंद है।
डायबिटीज के मरीजों के लिए कौन सा दूध है सबसे बेस्ट? (Best Type of Milk)
शुगर के मरीजों के लिए दूध चुनते समय उसकी क्वालिटी और फैट की मात्रा पर ध्यान देना सबसे जरूरी है। डॉक्टर ने निम्नलिखित गाइडलाइंस बताई हैं:
1. क्या पीएं (Recommended):
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लो-फैट या स्किम्ड मिल्क (Low-Fat Milk): डायबिटीज वालों के लिए सबसे बेहतर और सुरक्षित विकल्प है।
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टोंड या डबल टोंड मिल्क (Toned Milk): इसमें फैट की मात्रा बहुत कम होती है और कैलोरी भी कंट्रोल में रहती है, जिसके कारण यह ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ने नहीं देता।
2. क्या न पीएं (Avoid):
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फुल क्रीम या भैंस का गाढ़ा दूध: इसमें सैचुरेटेड फैट (संतृप्त वसा) और कैलोरी बहुत ज्यादा होती है, जो वजन बढ़ाने के साथ-साथ इंसुलिन रेजिस्टेंस को भी बढ़ा सकती है।
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फ्लेवर्ड मिल्क और पैकेट वाले मिल्कशेक: चॉकलेट, स्ट्रॉबेरी या वैनिला फ्लेवर वाले दूध में भारी मात्रा में एडेड शुगर (ऊपर से मिलाई गई चीनी) और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं, जो शुगर के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक हैं।
रोजाना कितना दूध पीना है सुरक्षित? (Daily Safe Limit)
मात्रा का ध्यान रखना ही डायबिटीज को कंट्रोल में रखने की असली चाबी है:
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सामान्य स्थिति में: हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यदि आपकी शुगर कंट्रोल में है, तो आप दिनभर में 1 से 2 छोटे गिलास लो-फैट दूध आसानी से पी सकते हैं।
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हाई शुगर होने पर: यदि आपका ब्लड शुगर लेवल लगातार बढ़ा हुआ आ रहा है, तो दिन में केवल 1 गिलास दूध पीना ही आपके लिए काफी रहेगा।
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पीने का सही तरीका: दूध को हमेशा बिना चीनी (Sugar-Free) के ही पीएं। इसमें किसी भी तरह का मीठा पाउडर, हॉर्लिक्स या सप्लीमेंट तब तक न मिलाएं जब तक आपके डॉक्टर ने इसकी सलाह न दी हो।
डॉक्टर की सबसे बड़ी सलाह: ‘डायबिटीज में बैलेंस ही है सब कुछ’
डॉ. अमित बताते हैं कि डायबिटीज को मैनेज करने का मतलब सब कुछ खाना छोड़ देना नहीं है, बल्कि ‘बैलेंस’ (संतुलन) बनाना है। दूध पीना पूरी तरह बंद करने से शरीर में कैल्शियम और प्रोटीन की कमी हो सकती है, जिससे उम्र बढ़ने के साथ हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। इसलिए, डरे बिना सही मात्रा और सही प्रकार का चुनाव कर दूध को अपनी संतुलित जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।
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