सोते समय हाथ का सुन्न पड़ना सामान्य नहीं: जानिए किन गंभीर बीमारियों का हो सकता है शुरुआती संकेत

रात को गहरी नींद के दौरान अचानक हाथ, कलाई या उंगलियों में झनझनाहट और भारीपन महसूस होना, जिसे आम भाषा में ‘हाथ का सो जाना’ कहा जाता है, एक सामान्य अनुभव हो सकता है। ज्यादातर मामलों में ऐसा तब होता है जब सिर के नीचे हाथ रखकर सोने या एक ही करवट लंबे समय तक लेटने से उस हिस्से में रक्त संचार (ब्लड सर्कुलेशन) कुछ समय के लिए बाधित हो जाता है या नसों पर दबाव पड़ता है। करवट बदलते ही या हाथ को हिलाने-डुलाने पर कुछ सेकंड में यह ठीक भी हो जाता है। लेकिन अगर यह समस्या रोजाना होने लगे और नींद बार-बार टूटने लगे, तो इसे केवल गलत पोजीशन मानकर नजरअंदाज करना सेहत पर भारी पड़ सकता है।

कार्पल टनल सिंड्रोम और नसों पर बढ़ता दबाव

बार-बार हाथ सुन्न होने का एक प्रमुख कारण ‘कार्पल टनल सिंड्रोम’ (Carpal Tunnel Syndrome) होता है। कलाई के बीच से गुजरने वाली मुख्य नस, जिसे ‘मीडियन नर्व’ कहा जाता है, जब किसी सूजन या दबाव के कारण संकुचित हो जाती है, तो हाथ के अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा उंगली में तेज सुन्नपन, सुइयां चुभने जैसी झनझनाहट और दर्द होने लगता है। जो लोग दिनभर कंप्यूटर पर टाइपिंग, माउस का अत्यधिक इस्तेमाल या कलाई मोड़ने वाला काम करते हैं, उनमें रात के समय यह समस्या काफी बढ़ जाती है क्योंकि सोते समय कलाई अनजाने में मुड़ जाती है।

सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस और गर्दन की नसों का दबना

गर्दन की रीढ़ की हड्डियों में उम्र या गलत पोस्चर के कारण आने वाले बदलाव भी हाथ के सुन्न होने की बड़ी वजह बनते हैं। सर्वाइकल स्पाइन (गर्दन के हिस्से) की डिस्क जब खिसक जाती है या वहां की नसें दबती हैं (Cervical Radiculopathy), तो उसका दर्द और सुन्नपन गर्दन से शुरू होकर कंधे, बांह और पूरी हथेली तक फैलता है। सोते समय यदि तकिया बहुत ऊंचा या बहुत सख्त हो, तो गर्दन की नसों पर दबाव और बढ़ जाता है, जिससे आधी रात को अचानक पूरा हाथ बेजान महसूस होने लगता है।

विटामिन B12 की कमी और पेरीफेरल न्यूरोपैथी

तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) को सुचारू रूप से चलाने के लिए विटामिन B12 अत्यंत आवश्यक पोषक तत्व है। शरीर में इसकी लगातार कमी होने से नसों की सुरक्षात्मक परत (माइलिन शीथ) कमजोर पड़ने लगती है, जिससे नसों में क्षति (पेरीफेरल न्यूरोपैथी) शुरू हो जाती है। इसके शुरुआती लक्षणों में हाथ-पैरों में चींटियां रेंगने जैसा अहसास, उंगलियों का सुन्न होना और पकड़ कमजोर होना शामिल है। शाकाहारी खानपान वाले लोगों में यह कमी काफी आम देखी जाती है, जिसे साधारण ब्लड टेस्ट से पहचाना जा सकता है।

डायबिटीज और थायरॉयड जैसी छिपी हुई बीमारियां

अनियंत्रित ब्लड शुगर (डायबिटीज) का सीधा असर शरीर की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं और नसों पर पड़ता है, जिसे ‘डायबिटिक न्यूरोपैथी’ कहा जाता है। इसमें रात के समय हाथों और पंजों का सुन्न होना बहुत आम लक्षण है। इसी प्रकार, हाइपोथायरायडिज्म (थायरॉयड हार्मोन का कम बनना) के मरीजों के शरीर में तरल पदार्थ जमा (फ्लुइड रिटेंशन) होने लगता है, जिससे जोड़ों और कलाइयों के ऊतकों में सूजन आ जाती है और नसें दबने लगती हैं।

कब हो जाएं सतर्क और तुरंत लें चिकित्सकीय सलाह

यदि हाथ का सुन्नपन केवल एक हाथ तक सीमित न रहकर चेहरे या पैर तक फैल रहा हो, बोलने में लड़खड़ाहट हो, चक्कर आ रहे हों या हाथ की पकड़ इतनी कमजोर हो जाए कि चीजें छूटकर गिरने लगें, तो यह स्ट्रोक या गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में बिना एक पल गंवाए आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

राहत पाने के लिए जरूरी सावधानियां और जीवनशैली में बदलाव

सामान्य मामलों में रात को सोते समय पतले और आरामदायक तकिए का उपयोग करें जिससे गर्दन और रीढ़ की हड्डी एक सीध में रहे। पेट के बल सोने या हाथ को सिर के नीचे दबाकर सोने की आदत तुरंत बदलें। यदि कलाई मुड़ने की समस्या हो, तो डॉक्टर की सलाह पर रात को कलाई का ब्रेस (रिस्ट स्प्लिंट) पहनकर सोया जा सकता है। दिन के समय हल्की स्ट्रेचिंग, गर्दन और कलाई के व्यायाम करें, संतुलित आहार लें और यदि लक्षण लगातार बने रहें, तो न्यूरोलॉजिस्ट या ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से जांच कराकर नर्व कंडक्शन टेस्ट (NCV) अवश्य कराएं।

Check Also

मिर्गी के साथ भी जी सकते हैं पूरी तरह सामान्य जिंदगी: न्यूरोलॉजिस्ट से जानिए दौरे रोकने, सही इलाज और सुरक्षित लाइफस्टाइल के जरूरी नियम

मिर्गी (एपिलेप्सी) को लेकर समाज में आज भी कई तरह के अंधविश्वास, डर और गलत …