
देश की सर्वोच्च अदालत में चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी गठबंधन के प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत को लेकर की गई तीखी टिप्पणियों के बाद विवाद गहरा गया है। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेताओं के खिलाफ अदालत की आपराधिक अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है। वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले को उठाते हुए कहा कि न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सोशल मीडिया पर सुनियोजित तरीके से आघात किया जा रहा है और कोर्ट परिसर के भीतर राजनीतिक नारेबाजी कर न्यायिक व्यवस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर त्वरित सुनवाई के लिए अपनी सहमति दे दी है।
कांग्रेस की राज्य इकाई के विवादित पोस्ट और सीजेआई पर टिप्पणियों को लेकर उठा बवंडर
याचिकाकर्ताओं (अधिवक्ता दिगंत मिश्रा और दिव्यांश बिष्ट) की ओर से अदालत में दलील दी गई कि जब विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ ज्ञापन देने के लिए सीजेआई से मुलाकात का वक्त मांगा था, तो सीजेआई ने मामला पहले से अदालत में विचाराधीन (सब-ज्यूडिस) होने का हवाला देकर प्रशासनिक शिष्टाचार के तहत मिलने से इनकार कर दिया था। इसके तुरंत बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शीर्ष अदालत और सीजेआई के खिलाफ अपमानजनक और दुर्भावनापूर्ण टिप्पणियां साझा की जाने लगीं। याचिका में विशेष रूप से कांग्रेस की केरल इकाई द्वारा किए गए विवादास्पद पोस्ट और विभिन्न विपक्षी समर्थकों के बयानों का संदर्भ दिया गया है। आरोप है कि संवैधानिक पदों पर बैठे न्यायाधीशों को राजनीतिक विवादों में घसीटकर जनता के बीच न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है।
12 अक्टूबर का मार्च और सुप्रीम कोर्ट परिसर में नारेबाजी: याचिका में क्या हैं मुख्य आरोप?
याचिका में 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में हुए विपक्षी मार्च का विस्तार से उल्लेख किया गया है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कथित फैसलों के विरोध में राहुल गांधी और अखिलेश यादव के नेतृत्व में ‘इंडिया’ गठबंधन के 11 नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। याचिका में कहा गया है कि जब ये नेता याचिका दाखिल करने अदालत पहुंचे, तो उनके साथ सैकड़ों राजनीतिक कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ कोर्ट परिसर के भीतर तक दाखिल हो गई। परिसर में राजनीतिक नारेबाजी की गई, जिससे सामान्य न्यायिक कामकाज में गंभीर व्यवधान पैदा हुआ। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि 12 अक्टूबर की उस पूरी घटना के सुप्रीम कोर्ट परिसर के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और सुरक्षा रिकॉर्ड को तत्काल सुरक्षित किया जाए।
केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और विपक्षी नेता बनाए गए प्रतिवादी
अदालत में दायर इस अवमानना याचिका में न केवल विपक्षी नेताओं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े तंत्र को भी पार्टी बनाया गया है। याचिका में केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को पक्षकार बनाया गया है। नेताओं की बात करें तो याचिका में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा और महुआ मोइत्रा समेत प्रमुख विपक्षी चेहरों को प्रतिवादी (Respondents) के रूप में नामित किया गया है। याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के संवेदनशील परिसरों में राजनीतिक गतिविधियों, प्रदर्शनों और अनियंत्रित भीड़ के प्रवेश को रोकने के लिए सख्त और स्पष्ट दिशा-निर्देश (गाइडलाइंस) तय किए जाएं।
‘कोर्ट की गरिमा से कोई समझौता नहीं’: गौरव भाटिया ने सीजेआई बेंच के सामने रखा पक्ष
वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने इस मामले को सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली खंडपीठ के समक्ष विशेष उल्लेख (मेंशनिंग) के जरिए उठाया। उन्होंने पीठ से कहा, “यह केवल एक राजनीतिक दल का मामला नहीं है, बल्कि देश की न्यायपालिका की संस्थागत गरिमा और स्वतंत्रता का सवाल है। जब कोई फैसला या प्रक्रिया किसी के मनमुताबिक नहीं होती, तो न्याय के मंदिर और न्यायाधीशों पर सोशल मीडिया के जरिए हमले शुरू कर दिए जाते हैं। कोर्ट परिसर में जिस तरह का माहौल बनाया गया, वह न्यायिक प्रक्रिया में खुली दखलंदाजी है।”” शुरुआत में पीठ ने नियमित प्रक्रिया के तहत आने की बात कही, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने इसे सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
विपक्षी याचिका में 14 खामियां: चुनाव आयोग बनाम विपक्ष का मामला भी गरमाया
एक तरफ जहां विपक्षी नेताओं पर अवमानना की तलवार लटक रही है, वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी और अखिलेश यादव द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर मूल याचिका पर भी तकनीकी पेंच फंसा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने विपक्ष की इस अर्जी में 14 तकनीकी खामियां (डिफेक्ट्स) उजागर की हैं। इनमें 9 याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे और ऑथराइजेशन की कमी तथा कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी जैसे बिंदु शामिल हैं। सीजेआई ने इन खामियों को दुरुस्त करने के बाद ही मामले को सुनवाई के लिए लगाने की बात कही थी। अब अवमानना याचिका के सामने आने से कानूनी और राजनीतिक लड़ाई दोहरे मोर्चे पर पहुंच गई है, जहां एक ओर चुनाव प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल हैं, तो दूसरी ओर खुद सुप्रीम कोर्ट की मर्यादा और अवमानना का दायरा बहस के केंद्र में आ गया है।
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