न गोली न बम: हैकर्स ने सुपरमार्केट के फ्रिज का तापमान 50°C तक बढ़ाया, फ्रांस में अजीबोगरीब साइबर अटैक से सड़ा लाखों का खाना

साइबर अपराध की दुनिया में अब तक आपने बैंक खाते खाली होने, गोपनीय डेटा चोरी होने या सरकारी वेबसाइट्स ठप होने की खबरें सुनी होंगी, लेकिन फ्रांस से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने दुनिया भर के सुरक्षा विशेषज्ञों के होश उड़ा दिए हैं। किसी देश को नुकसान पहुंचाने के लिए न तो किसी गोली की जरूरत पड़ी और न ही बारूद की; अज्ञात हैकर्स ने सीधे सुपरमार्केट्स के तापमान नियंत्रण प्रणाली (IoT नेटवर्क) में सेंध लगा दी। फ्रांस भर के सैकड़ों बड़े सुपरमार्केट्स और ग्रॉसरी स्टोर्स में लगे कमर्शियल रेफ्रिजरेटर और डीप फ्रीजर्स को रिमोटली हैक कर लिया गया और उनका तापमान माइनस से सीधे बढ़ाकर 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा दिया गया। जब तक कर्मचारी कुछ समझ पाते, तब तक फ्रीजर्स में रखा टनों मांस, दूध, सब्जियां, दवाइयां और फ्रोजन फूड पूरी तरह उबलकर सड़ चुका था।

-18°C से सीधे +50°C: ओवन में तब्दील हो गए फ्रीजर्स

आमतौर पर सुपरमार्केट्स और कोल्ड स्टोरेज में रखे जाने वाले डीप फ्रीजर्स का तापमान भोजन को बैक्टीरिया से सुरक्षित रखने के लिए शून्य से काफी नीचे (-18 डिग्री सेल्सियस से लेकर 4 डिग्री सेल्सियस के बीच) सेट रहता है। हालांकि, हैकर्स ने इंटरनेट से जुड़े स्मार्ट कूलिंग सिस्टम (सेंट्रलाइज्ड बिल्डिंग मैनेजमेंट सिस्टम) के मुख्य सर्वर में मैलवेयर के जरिए घुसपैठ की। इसके बाद उन्होंने ऑटोमैटिक डिफ्रोस्ट और हीटिंग मैकेनिज्म की कमान अपने हाथ में लेकर तापमान की सीमा को 50 डिग्री सेल्सियस पर लॉक कर दिया। कुछ ही घंटों के भीतर ठंडक पैदा करने वाले ये विशालकाय फ्रिज तंदूर और ओवन की तरह तपने लगे। कई स्टोर्स में तापमान इतना अधिक बढ़ गया कि कंप्रेसर ओवरहीट होने से शॉर्ट सर्किट और आग लगने की घटनाएं भी दर्ज की गईं।

करोड़ों यूरो का नुकसान और खाद्य सुरक्षा का गंभीर संकट

इस संगठित साइबर हमले के चलते फ्रांस के रिटेल सेक्टर को भारी वित्तीय झटका लगा है। सुपरमार्केट मालिकों के अनुसार, रातों-रात लाखों यूरो (करोड़ों रुपये) का स्टॉक बर्बाद हो गया। सड़ चुके खाने से उठने वाली दुर्गंध के चलते दर्जनों स्टोर्स को कई दिनों के लिए ग्राहकों के लिए पूरी तरह बंद करना पड़ा। इसके अलावा, जिन मशीनों में आग लगी या कंप्रेसर ब्लास्ट हुए, उन्हें बदलने में भी भारी पूंजी खर्च करनी पड़ रही है। स्थानीय स्वास्थ्य एजेंसियों ने तुरंत चेतावनी जारी करते हुए सुपरमार्केट चेन को निर्देश दिया कि वे उस समय अवधि के दौरान स्टोर में मौजूद किसी भी खाद्य उत्पाद को खुले बाजार में न बेचें, क्योंकि तापमान बढ़ने से साल्मोनेला और ई-कोलाई जैसे जानलेवा बैक्टीरिया पनपने का गंभीर खतरा पैदा हो गया था।

स्मार्ट डिवाइसेज और IoT नेटवर्क की सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल

इस घटना ने ‘स्मार्ट गैजेट्स’ और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) पर बढ़ती निर्भरता के काले सच को पूरी दुनिया के सामने उजागर कर दिया है। आज आधुनिक रिटेल चेन अपने बिजली बिल बचाने और तापमान की ऑटोमैटिक निगरानी के लिए इंटरनेट से जुड़े सेंट्रलाइज्ड सॉफ्टवेयर पर निर्भर हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि हैकर्स ने किसी थर्ड-पार्टी कूलिंग मेंटेनेंस वेंडर के कमजोर पासवर्ड या बिना सुरक्षा पैच वाले पुराने सॉफ्टवेयर लूपहोल का फायदा उठाकर नेटवर्क में प्रवेश किया। विशेषज्ञों का कहना है कि जब कोई बुनियादी ढांचा इंटरनेट से जुड़ता है, तो वह जितना सुविधाजनक होता है, उतना ही बड़ा सुरक्षा खतरा भी बन जाता है।

फूड सप्लाई चेन को पंगु बनाने का नया ‘साइबर वॉरफेयर’

साइबर सुरक्षा विश्लेषक इस हमले को केवल एक सामान्य वित्तीय अपराध या शरारत के रूप में नहीं देख रहे हैं, बल्कि इसे आधुनिक हाइब्रिड वॉरफेयर (छद्म युद्ध) का खतरनाक पूर्वाभ्यास माना जा रहा है। यदि किसी देश की खाद्य आपूर्ति श्रृंखला (फूड सप्लाई चेन), बड़े वेयरहाउस, दवा भंडारण केंद्र या ब्लड बैंकों के रेफ्रिजरेशन सिस्टम को एक साथ पंगु बना दिया जाए, तो वह देश बिना युद्ध लड़े ही भुखमरी और स्वास्थ्य आपातकाल के संकट में घिर सकता है। फ्रांसीसी पुलिस और साइबर क्राइम यूनिट इस हमले के पीछे सक्रिय हैकर ग्रुप की पहचान करने में जुटी हैं, जबकि यूरोपीय यूनियन के अन्य देशों ने भी अपने कोल्ड स्टोरेज और सुपरमार्केट नेटवर्क्स के लिए हाई अलर्ट और इमरजेंसी सुरक्षा ऑडिट के निर्देश जारी कर दिए हैं।

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