
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर एक नया कानूनी विवाद छिड़ गया है। दिल्ली में हाल ही में आयोजित एक नागरिक विरोध प्रदर्शन के दौरान केरल के रहने वाले एक लॉ स्टूडेंट (विधि छात्र) को जबरन बस से नीचे उतारकर बेरहमी से पीटने और हिरासत में प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। दिल्ली में हुई इस कथित घटना के बाद गृह राज्य लौटे पीड़ित छात्र की लिखित शिकायत के आधार पर केरल पुलिस ने मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस के संबंधित और अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ औपचारिक प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कर ली है। अंतरराज्यीय स्तर पर दिल्ली पुलिस के कर्मियों पर दूसरे राज्य में आपराधिक मामला दर्ज होने से दोनों राज्यों के प्रशासनिक व कानूनी गलियारों में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला? बस से खींचकर पीटने और जबरन हिरासत के आरोप
पीड़ित छात्र, जो दिल्ली के एक प्रतिष्ठित संस्थान से वकालत की पढ़ाई कर रहा है और मूल रूप से केरल का निवासी है, ने अपनी शिकायत में घटना का विस्तृत और खौफनाक विवरण दिया है। छात्र के अनुसार, वह राजधानी के मध्य क्षेत्र में एक शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन के बाद अपने गंतव्य की ओर जाने के लिए सार्वजनिक बस (डीटीसी) में सवार हुआ था। आरोप है कि इसी दौरान सादे कपड़ों और वर्दी में तैनात दिल्ली पुलिस के जवानों ने बस को बीच रास्ते में रुकवाया और बिना किसी वैध कारण या पूर्व सूचना के उसे कॉलर पकड़कर जबरन बस से बाहर घसीट लिया। छात्र का दावा है कि जब उसने अपनी पहचान एक विधि छात्र के रूप में बताई और अपने कानूनी अधिकारों का हवाला देते हुए हिरासत का कारण पूछा, तो पुलिसकर्मियों ने उसके साथ गाली-गलौज की और लाठी-डंडों व जूतों से उसकी बुरी तरह पिटाई की, जिससे उसे अंदरूनी और गंभीर चोटें आईं।
हिरासत में मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का दावा, केरल पहुंचकर दर्ज कराई शिकायत
शिकायतकर्ता छात्र का आरोप है कि पिटाई के बाद उसे पुलिस वैन में डालकर अज्ञात स्थान या स्थानीय थाने ले जाया गया, जहां उसे कई घंटों तक गैर-कानूनी हिरासत में रखा गया और मेडिकल जांच या विधिक सहायता लेने से रोका गया। किसी तरह रिहा होने के बाद अपनी सुरक्षा को लेकर आशंकित छात्र तुरंत अपने गृह राज्य केरल लौट आया। केरल पहुंचकर उसने स्थानीय सरकारी अस्पताल में अपना चिकित्सकीय परीक्षण कराया, जहां डॉक्टरों द्वारा उसके शरीर पर चोटों के निशान और गंभीर कुंद आघात (Blunt Trauma) की पुष्टि की गई। इसके तुरंत बाद छात्र ने अस्पताल के मेडिकल लीगल सर्टिफिकेट (MLC) और घटना के साक्ष्यों के साथ स्थानीय थाने में शिकायत सौंपी, जिस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मामला दर्ज किया।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं में मामला दर्ज, ‘जीरो एफआईआर’ के तहत ट्रांसफर की तैयारी
केरल पुलिस ने पीड़ित छात्र की मेडिकल रिपोर्ट और प्राथमिक बयानों के आधार पर दिल्ली पुलिस के संबंधित कर्मियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। इनमें स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना, गैर-कानूनी तरीके से बंधक बनाना, आपराधिक धमकी और सार्वजनिक कर्तव्य के दुरुपयोग से जुड़ी धाराएं शामिल हैं। चूंकि अपराध का कथित घटनास्थल दिल्ली पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए केरल पुलिस के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले में प्राथमिक साक्ष्य और पीड़ित के बयान कलमबद्ध करने के बाद कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए इस मामले को ‘जीरो एफआईआर’ (Zero FIR) के रूप में जांच और अग्रिम कार्रवाई के लिए दिल्ली पुलिस कमिश्नर और संबंधित जिले के पुलिस उपायुक्त (DCP) को औपचारिक रूप से स्थानांतरित करेंगे।
दिल्ली पुलिस का रुख और छात्र संगठनों का आक्रोश
इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अभी तक केरल पुलिस की ओर से आधिकारिक दस्तावेज या एफआईआर की औपचारिक प्रति प्राप्त नहीं हुई है। अधिकारियों ने अनौपचारिक रूप से कहा कि प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केवल उन लोगों को डिटेन किया गया था जो निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर रहे थे और किसी के साथ ज्यादती नहीं की गई है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि आधिकारिक दस्तावेज मिलने के बाद विभागीय स्तर पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। दूसरी ओर, विभिन्न छात्र संगठनों, बार एसोसिएशनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की मांग की है, जिससे यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक व मानवाधिकार बहस का केंद्र बन सकता है।
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