‘अजीत डोभाल पाकिस्तान में फैला रहे हैं अस्थिरता’, शहबाज शरीफ के परमाणु सलाहकार के बिगड़े बोल; भारतीय NSA के खौफ में दिया यह बयान

पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा, बलूचिस्तान में जारी व्यापक असंतोष और खैबर पख्तूनख्वा में लगातार हो रहे आतंकी हमलों के बीच इस्लामाबाद के हुक्मरानों में भारत और विशेष रूप से भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल का खौफ साफ नजर आ रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के परमाणु और रणनीतिक मामलों के सलाहकार ने एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी और पाकिस्तानी मीडिया से बातचीत के दौरान सनसनीखेज और बेबुनियाद आरोप लगाते हुए कहा कि पाकिस्तान के भीतर मौजूदा राजनीतिक और सुरक्षा अस्थिरता के पीछे सीधे तौर पर भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की नीतियां काम कर रही हैं।

पाकिस्तानी सलाहकार ने दावा किया कि भारतीय सुरक्षा तंत्र तथाकथित ‘डोभाल डॉक्ट्रिन’ के जरिए पाकिस्तान को आंतरिक रूप से इतना कमजोर और उलझा हुआ रखना चाहता है कि वह अपनी बाहरी सीमाओं और रणनीतिक परमाणु प्रतिरोधक क्षमता पर ध्यान केंद्रित न कर सके।

‘डोभाल डॉक्ट्रिन’ का पुराना खौफ: पाकिस्तानी प्रतिष्ठान क्यों रहता है हमेशा बेचैन?

पाकिस्तानी रक्षा और राजनीतिक हलकों में अजीत डोभाल का नाम हमेशा एक मनोवैज्ञानिक दबाव का कारण रहा है। अपने आधिकारिक बयान में पाकिस्तानी सलाहकार ने वर्ष 2014-15 के दौरान दिए गए अजीत डोभाल के उस बहुचर्चित भाषण का फिर से रोना रोया, जिसमें उन्होंने ‘डिफेंसिव ऑफेंस’ (Defensive Offense) की रणनीति समझाई थी।

पाकिस्तानी सलाहकार ने आरोप लगाया कि भारत अब सीधे युद्ध लड़ने के बजाय छद्म युद्ध, डिजिटल वॉरफेयर और आंतरिक अलगाववादी गुटों को नैतिक व कूटनीतिक हवा देकर पाकिस्तान की रीढ़ तोड़ रहा है। उन्होंने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) द्वारा पाकिस्तानी सेना पर किए जा रहे लगातार घातक हमलों का ठीकरा भी अपनी सैन्य नाकामियों को छुपाने के लिए नई दिल्ली और डोभाल की रणनीति पर फोड़ दिया।

अपनी आंतरिक असफलताओं पर पर्दा डालने की पुरानी पाकिस्तानी रणनीति

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों का मानना है कि शहबाज शरीफ के सलाहकार का यह बयान पाकिस्तान की गहरी हताशा और घरेलू मोर्चे पर विफलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। वर्तमान समय में पाकिस्तान अभूतपूर्व चुनौतियों से घिरा हुआ है:

  • बलूचिस्तान में सेना की लाचारी: बलूचिस्तान में चीनी नागरिकों, सुरक्षा चौकियों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर स्थानीय विद्रोही लगातार हमले कर रहे हैं, जिससे सीपीईसी (CPEC) परियोजना ठप पड़ी है।

  • टीटीपी का कहर: अफगानिस्तान सीमा से सटे इलाकों में पाकिस्तानी सेना और पुलिस चौकियों पर तहरीक-ए-तालिबान के आतंकी भारी पड़ रहे हैं, जिन्हें रोकने में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) पूरी तरह विफल साबित हुई है।

  • आर्थिक बदहाली और राजनीतिक संकट: देश भारी कर्ज, महंगाई और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। जनता का ध्यान इन असल मुद्दों से भटकाने के लिए पाकिस्तानी हुक्मरान हर विफलता के पीछे ‘विदेशी हाथ’ और अजीत डोभाल का हौव्वा खड़ा करने का पुराना पैंतरा अपनाते हैं।

परमाणु ब्लैकमेलिंग की हवा निकालने से बौखलाया है पाकिस्तान

सलाहकार के इस बयान का एक और बड़ा पहलू भारत की आक्रामक और सख्त विदेश नीति से जुड़ा है। दशकों तक पाकिस्तान भारत को अपने परमाणु हथियारों का डर दिखाकर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है। लेकिन 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद भारत ने स्पष्ट कर दिया कि परमाणु ब्लैकमेलिंग के साए में आतंकवाद को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भारत सीमा पार जाकर सटीक प्रहार करने से पीछे नहीं हटेगा।

इसके साथ ही, अज्ञात हमलावरों द्वारा पाकिस्तान के सुरक्षित ठिकानों में छिपे भारत-विरोधी दुर्दांत आतंकियों के एक-एक कर मारे जाने के सिलसिले ने भी पाकिस्तानी खुफिया तंत्र के पसीने छुड़ा दिए हैं। पाकिस्तानी हुक्मरानों को हर घटना के पीछे भारतीय एजेंसियों की सटीक रणनीति नजर आती है, जिससे उनकी असुरक्षा की भावना चरम पर पहुंच गई है।

भारत का स्पष्ट रुख: पाकिस्तान अपने गिरेबान में झांके

भारतीय विदेश मंत्रालय और सुरक्षा रणनीतिकारों ने बार-बार स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान को अपने देश में पनप रहे आतंकवाद, गृहयुद्ध जैसी स्थितियों और प्रशासनिक विफलता के लिए दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय अपनी ही धरती पर पाले गए आतंकी भस्मासुरों पर लगाम लगानी चाहिए। भारत अपनी संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम और प्रतिबद्ध है। शहबाज शरीफ के सलाहकार के इस ताजा प्रलाप ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारतीय रणनीतिकारों का नाम ही सीमा पार बैठे षड्यंत्रकारियों की रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी है।

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