
इजरायल की 120 सदस्यीय संसद (नेसेट) के लिए हुए आम चुनावों में वोटों की 100% गिनती पूरी हो चुकी है। सेंट्रल इलेक्शंस कमेटी (CEC) के ताजा प्राथमिक आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी लिकुड (Likud) 20.42% वोटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है और 27 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। वहीं, पूर्व सेना प्रमुख और विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व कर रहे गाडी आइजेनकोट (Gadi Eisenkot) के नेतृत्व वाले मोर्चे ने भी कड़ी टक्कर दी है।
आइजेनकोट से जुड़ी प्रमुख विपक्षी पार्टी यशार! (Yashar!) 15.98% वोटों के साथ 21 सीटों पर आगे रही है। हालांकि, व्यक्तिगत तौर पर सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद नेतन्याहू और आइजेनकोट में से कोई भी अपने दम पर या अपने पारंपरिक गठबंधनों के साथ जादुई बहुमत के आंकड़े (61 सीटें) को छू नहीं पाया है, जिससे इजरायल में त्रिशंकु संसद (Hung Parliament) और सियासी गतिरोध की स्थिति पैदा हो गई है।
सीटों का गणित: दोनों में से किसी गठबंधन को नहीं मिला 61 का आंकड़ा
120 सीटों वाली नेसेट में सरकार बनाने के लिए न्यूनतम 61 सीटों की दरकार होती है। गिनती पूरी होने के बाद गठबंधनवार स्थिति इस प्रकार सामने आई है:
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नेतन्याहू का दक्षिणपंथी ब्लॉक: लिकुड (27 सीटें), यूनाइटेड तोराह जुदाइज्म (7 सीटें), ओत्जमा येहुदित (7 सीटें), शास (6 सीटें) और रिलीजियस जियोनिस्ट पार्टी (6 सीटें) को मिलाकर नेतन्याहू का खेमा लगभग 53 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है।
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गाडी आइजेनकोट का विपक्षी गठबंधन: मुख्य विपक्षी दल यशार! (21 सीटें), बेयाचद (12 सीटें), द डेमोक्रेट्स (8 सीटें) और इस्राइल बेयतेनु (7 सीटें) के साथ विपक्षी ब्लॉक लगभग 48 सीटों तक पहुंच पाया है।
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अरब दल और अन्य: द जॉइंट लिस्ट (11 सीटें) और राम (Ra’am – 8 सीटें) जैसी पार्टियों ने 19 सीटें हासिल कर किंगमेकर की स्थिति हासिल कर ली है।
किसने मारी बाजी?
यदि ‘सबसे बड़ी पार्टी’ के लिहाज से देखें, तो बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड ने बाजी मारी है और वे सबसे बड़े दल के नेता बने हुए हैं।
लेकिन यदि ‘सरकार बनाने के बहुमत’ की बात की जाए, तो नेतन्याहू या गाडी आइजेनकोट में से कोई भी स्पष्ट विजेता बनकर नहीं उभरा है। दोनों ही मुख्य धुरंधर बहुमत के आंकड़े (61) से 8 से 13 सीटें पीछे रह गए हैं।
अब आगे क्या? कैसे बनेगी इजरायल में नई सरकार?
100% गिनती पूरी होने के बाद अब गेंद राष्ट्रपति और गठबंधन वार्ताकारों के पाले में चली गई है:
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राष्ट्रपति का परामर्श: औपचारिक नतीजों के बाद इजरायल के राष्ट्रपति सभी दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे और जिस नेता के पास सबसे ज्यादा सांसदों का समर्थन होगा, उसे सरकार बनाने का पहला मौका (Mandate) देंगे।
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छोटे दलों और अरब पार्टियों पर दारोमदार: 61 का आंकड़ा जुटाने के लिए नेतन्याहू और आइजेनकोट दोनों को अन्य स्वतंत्र दलों को अपने पाले में खींचने के लिए भारी राजनीतिक समझौते करने होंगे।
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दोबारा चुनाव का खतरा: यदि कोई भी पक्ष तय समय-सीमा के भीतर 61 सीटों का गठबंधन तैयार नहीं कर पाता, तो इजरायल एक बार फिर नए सिरे से चुनाव की ओर बढ़ सकता है।
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