‘सत्ता बदलनी है तो चुनाव में जनता के पास जाओ’: ‘रिजीम चेंज’ की मांग पर भड़के बृजभूषण शरण सिंह; बोले- भारत में बांग्लादेश-पाकिस्तान जैसा खेल नहीं चलेगा

गोंडा/लखनऊ: देश के सियासी गलियारों में ‘रिजीम चेंज’ (शासन/सत्ता परिवर्तन) और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर छिड़ी तीखी बहस के बीच भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार किया है। गोंडा के नवाबगंज स्थित नंदिनी नगर महाविद्यालय में आयोजित ‘उत्तर प्रदेश छात्र संसद’ के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व सांसद ने साफ शब्दों में कहा कि यदि विपक्ष को सत्ता बदलनी ही है, तो वह सड़कों पर षड्यंत्र रचने या विदेशी तौर-तरीकों का सहारा लेने के बजाय चुनावी मैदान में जनता की अदालत में जाए।

बृजभूषण शरण सिंह ने दो-टूक कहा कि भारत एक परिपक्व और मजबूत लोकतंत्र है, जहां सत्ता का परिवर्तन किसी दबाव या अराजकता से नहीं, बल्कि केवल मतपेटी और जनता के वोटों से ही संभव है।

‘2027 और 2029 आ रहा है, जनता के पास जाओ और तैयारी करो’

विपक्ष द्वारा सरकार बदलने के बयानों और नैरेटिव पर प्रतिक्रिया देते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज में कहा:

“सत्ता बदलनी है तो चुनाव में जनता के पास जाओ। 2027 का (उत्तर प्रदेश विधानसभा) चुनाव आ रहा है, 2029 का (लोकसभा) चुनाव आ रहा है—बदल दो। घर बैठकर या बातें बनाकर कुछ नहीं होगा, जनता के बीच जाइए और अपनी तैयारी कीजिए।”

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता का फैसला देश के मतदाता करते हैं, न कि सोशल मीडिया पर चलाए जाने वाले एजेंडे या आंदोलनकारी दबाव।

‘बांग्लादेश, पाकिस्तान या नेपाल की तर्ज पर नहीं बदलेगी सत्ता’

पूर्व सांसद ने पड़ोसी देशों में हुए हालिया तख्तापलट और राजनीतिक अस्थिरता का हवाला देते हुए विपक्ष को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में किसी भी प्रकार के अलोकतांत्रिक प्रयोग की कोई गुंजाइश नहीं है:

  • भारत की अपनी लोकतांत्रिक मर्यादा: बृजभूषण ने कहा कि भारत का शासन परिवर्तन अमेरिका, बांग्लादेश, पाकिस्तान या नेपाल की तर्ज पर नहीं होगा।

  • चुनाव ही एकमात्र माध्यम: उन्होंने रेखांकित किया कि भारत में सरकारें केवल संवैधानिक नियमों, चुनाव आयोग द्वारा आयोजित निष्पक्ष चुनावों और आम जनता के जनादेश से ही चुनी या बदली जाती हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर विपक्ष को घेरा

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष द्वारा चलाए जा रहे अभियान पर भी बृजभूषण शरण सिंह ने कड़ा रुख अपनाया।

  • उन्होंने सवाल दागते हुए कहा, “ज्ञानेश कुमार को क्यों हटाया जाए? वे किसी की दया पर थोड़ी आए हैं।”

  • पूर्व सांसद ने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वायत्त और संवैधानिक संस्था है, जिसकी नियुक्ति तय कानूनी व पारदर्शी प्रक्रियाओं के तहत हुई है। जब भी विपक्ष चुनाव हारता है, तो वह चुनाव आयोग, ईवीएम और संवैधानिक प्रमुखों पर अनर्गल आरोप लगाकर संस्थाओं की साख गिराने का प्रयास करने लगता है।

मतदाता सूची और घुसपैठियों के मुद्दे पर बड़ा दावा

प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व सांसद ने मतदाता सूची पुनरीक्षण और संशोधन के मुद्दे पर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि मतदाता सूचियों से फर्जी नामों और अवैध घुसपैठियों को बाहर किया जाना देश की सुरक्षा और निष्पक्ष चुनाव के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के बयानों का संदर्भ देते हुए कहा कि जब संसद और सार्वजनिक मंचों पर इस विषय पर पहले ही विस्तार से चर्चा हो चुकी है, तो अब इस पर अनावश्यक विवाद खड़ा करने का कोई औचित्य नहीं है।

बृजभूषण शरण सिंह के इस बयान ने विपक्षी खेमे में चल रही ‘रिजीम चेंज’ की चर्चाओं को सीधे चुनावी चुनौती में तब्दील कर दिया है। उनका यह रुख दर्शाता है कि सत्तारूढ़ दल विपक्ष के किसी भी दबाव तंत्र को दरकिनार करते हुए 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव और 2029 के आम चुनाव की पिच पर ही निर्णायक मुकाबले के मूड में है।

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