
तेहरान। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए इतिहास के सबसे काले पन्नों में से एक ‘वियतनाम युद्ध’ की याद दिलाई है। अराघची ने वाशिंगटन पर निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिका एक बार फिर उसी पुरानी गलती को दोहरा रहा है, जहां जमीनी हकीकत कुछ और होती है और दुनिया के सामने पेश की जाने वाली तस्वीर कुछ और। ईरानी विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां चरम पर हैं और दोनों देशों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
वियतनाम जैसी स्थिति में फंस रहा है अमेरिका?
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वियतनाम युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर में भी वाइट हाउस अपनी जनता और दुनिया से युद्ध की वास्तविक स्थिति छुपाता था। उन्होंने तर्क दिया कि जिस तरह वियतनाम के जंगलों में अमेरिकी सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा था, लेकिन प्रशासन जीत का दावा करता रहा, ठीक वैसा ही प्रोपेगेंडा आज ईरान को लेकर फैलाया जा रहा है। अराघची ने साफ किया कि ईरान की सीमाओं पर हकीकत वाइट हाउस के दावों से कोसों दूर है।
ट्रंप के दावों और फाइटर जेट्स के नुकसान पर तंज
अमेरिकी नेतृत्व, विशेषकर डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर पलटवार करते हुए अराघची ने कहा कि जीत के बड़े-बड़े दावे करना आसान है, लेकिन हकीकत में उनके लड़ाकू विमान (फाइटर जेट्स) नुकसान उठा रहे हैं। उन्होंने इशारा किया कि ईरान की रक्षा प्रणाली अमेरिकी आधुनिक हथियारों को कड़ी चुनौती दे रही है। ईरानी विदेश मंत्री के मुताबिक, अमेरिका अपने सैन्य नुकसान को छुपाने की कोशिश कर रहा है, जबकि उसके अत्याधुनिक विमानों को मोर्चे पर भारी क्षति झेलनी पड़ रही है।
क्षेत्र में युद्ध के बादलों के बीच बढ़ी कड़वाहट
अराघची का यह तीखा हमला अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान द्वारा वियतनाम युद्ध का जिक्र करना अमेरिका को मानसिक दबाव में लाने की एक रणनीति है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब वाइट हाउस की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका इन दावों को खारिज करेगा या तनाव कम करने की दिशा में कोई कदम उठाएगा।
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