
देश के कई हिस्सों में मौसमी बदलाव और संक्रामक बीमारियों के प्रसार के बीच स्वाइन फ्लू (Swine Flu / H1N1 इन्फ्लूएंजा) के मामलों ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में एक महिला मरीज की स्वाइन फ्लू के कारण हुई मौत के बाद आम जनता में डर और दहशत का माहौल देखने को मिल रहा है। इसके चलते अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब्स में बुखार या सर्दी-जुकाम से पीड़ित लोग बड़ी संख्या में स्वाइन फ्लू टेस्ट कराने की मांग कर रहे हैं।
इस स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों और वरिष्ठ डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि हर प्रकार के बुखार में स्वाइन फ्लू का टेस्ट कराना कतई आवश्यक नहीं है। पैनिक करने के बजाय इसके लक्षणों के वर्गीकरण और सही समय पर चिकित्सकीय परामर्श को समझना जरूरी है।
क्या हर बुखार में स्वाइन फ्लू टेस्ट जरूरी है?
स्वास्थ्य मंत्रालय और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के प्रोटोकॉल के अनुसार, सामान्य बुखार में तत्काल H1N1 आरटी-पीसीआर टेस्ट की जरूरत नहीं होती है।
रोगियों को तीन श्रेणियों (Categories) में बांटा जाता है:
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कैटेगरी-ए (हल्के लक्षण): इसमें हल्का बुखार, गले में खराश, नाक बहना और बदन दर्द शामिल हैं। ऐसे मरीजों को केवल घर पर आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ (हाइड्रेशन) और पेरासिटामोल जैसी सामान्य दवाओं की जरूरत होती है। इन्हें न तो टेस्ट की जरूरत होती है और न ही एंटी-वायरल दवाओं की।
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कैटेगरी-बी (मध्यम लक्षण): यदि बुखार तेज है और मरीज पहले से हाई-रिस्क ग्रुप में है (जैसे गर्भवती महिलाएं, 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग, 5 वर्ष से छोटे बच्चे, या डायबिटीज, किडनी व हृदय रोगी), तो डॉक्टर बिना टेस्ट के भी ‘टैमीफ्लू’ (Oseltamivir) जैसी एंटी-वायरल दवा शुरू कर सकते हैं।
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कैटेगरी-सी (गंभीर लक्षण): जब मरीज को सांस लेने में तकलीफ हो, सीने में दर्द हो, ऑक्सीजन लेवल गिरे, लगातार उल्टी हो या अत्यधिक सुस्ती आए, तब अस्पताल में भर्ती और स्वाइन फ्लू का आरटी-पीसीआर (RT-PCR) टेस्ट अनिवार्य होता है।
स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण और सामान्य फ्लू में अंतर
स्वाइन फ्लू एक श्वसन संबंधी संक्रामक वायरल बीमारी है, जो H1N1 इन्फ्लूएंजा ए वायरस के कारण फैलती है।
इसके प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं:
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अचानक तेज बुखार (101°F से 104°F तक) और कंपकंपी छूटना।
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लगातार सूखी खांसी और गले में गंभीर खराश या चुभन।
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मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द, सिरदर्द व अत्यधिक थकान।
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भूख न लगना, उल्टी या दस्त की शिकायत होना।
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सांस फूलना और फेफड़ों में जकड़न महसूस होना।
बचाव और सावधानी के लिए क्या करें?
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वाइन फ्लू से डरने के बजाय सतर्कता बरतना सबसे बड़ा बचाव है:
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मास्क का उपयोग: भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाते समय मास्क जरूर पहनें, खासकर यदि आपको सर्दी-खांसी की शिकायत हो।
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हाथों की सफाई: समय-समय पर साबुन और पानी से हाथ धोएं या हैंड सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
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स्वयं दवा (Self-Medication) न लें: बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या ओवर-द-काउंटर एंटी-वायरल दवाएं कतई न खाएं।
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समय पर परामर्श: यदि बुखार 3 दिन से अधिक समय तक लगातार बना रहे या सांस लेने में भारीपन महसूस हो, तो तुरंत नजदीकी सरकारी या मान्यता प्राप्त अस्पताल में संपर्क करें।
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