सिडनी की मस्जिद में ऑस्ट्रेलियाई PM का विरोध: ईद की नमाज के बीच एंथनी अल्बनीस को झेलनी पड़ी नाराजगी…

सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस के लिए इस साल की ईद कुछ कड़वे अनुभव लेकर आई। सिडनी की एक प्रमुख मस्जिद में ईद की नमाज के दौरान शिरकत करने पहुंचे प्रधानमंत्री को स्थानीय मुस्लिम समुदाय के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि मस्जिद में मौजूद लोगों ने प्रधानमंत्री की नीतियों पर सवाल उठाते हुए उन्हें वहां से चले जाने तक कह दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

नीतियों पर सवाल और इजरायल-मुस्लिम संतुलन की आलोचना

प्रधानमंत्री अल्बनीस जब मस्जिद पहुंचे, तो उन्हें उम्मीद थी कि वह समुदाय के साथ त्योहार की खुशियां साझा करेंगे, लेकिन वहां का माहौल कुछ और ही था। स्थानीय लोगों ने उन पर इजरायल और मुस्लिम देशों के बीच दोहरा रवैया अपनाने और केवल संतुलन बनाने की राजनीति करने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारी लोगों का कहना था कि गाजा और मध्य पूर्व के हालातों पर ऑस्ट्रेलियाई सरकार का रुख स्पष्ट नहीं है, जिससे मुस्लिम समुदाय में गहरी नाराजगी है। लोगों ने नारे लगाते हुए कहा कि उन्हें केवल चुनावी फोटो खिंचवाने वाले नेता नहीं, बल्कि न्याय की बात करने वाले प्रतिनिधि चाहिए।

मस्जिद से बाहर जाने के लगे नारे

जैसे ही प्रधानमंत्री ने मस्जिद परिसर में प्रवेश किया, वहां मौजूद कुछ लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। भीड़ ने अल्बनीस को संबोधित करते हुए “बाहर निकलिए” (Get out) के नारे लगाए। सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन लोगों का आक्रोश कम नहीं हुआ। स्थानीय निवासियों का तर्क था कि एक तरफ युद्ध की विभीषिका झेल रहे लोगों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता कम है, और दूसरी तरफ प्रधानमंत्री त्योहारों पर केवल औपचारिक उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है असर

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सिडनी जैसी जगहों पर जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अच्छी-खासी है, वहां प्रधानमंत्री का इस तरह विरोध होना लेबर पार्टी के लिए खतरे की घंटी हो सकता है। आगामी चुनावों को देखते हुए एंथनी अल्बनीस के लिए यह घटना एक बड़ा सबक है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर उनकी सरकार का रुख घरेलू राजनीति को भी प्रभावित कर रहा है। फिलहाल, प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस घटना पर कोई आधिकारिक तीखी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विपक्षी दलों ने सरकार की विदेश नीति को लेकर हमले तेज कर दिए हैं।

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