इस्लामाबाद | ईरान और अमेरिका के बीच छिड़े भीषण युद्ध ने पूरी दुनिया को दो धड़ों में बांट दिया है, लेकिन इस तबाही के बीच ‘पाकिस्तान’ एक नई भूमिका में नजर आ रहा है। शनिवार को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच हुई एक घंटे लंबी फोन कॉल ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल मचा दी है। इस बातचीत से साफ हो गया है कि पाकिस्तान अब केवल मूकदर्शक नहीं, बल्कि इस युद्ध को रोकने के लिए ‘मध्यस्थ’ (Mediator) की भूमिका निभाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है।
शहबाज और पेजेश्कियन की बातचीत: ‘एक घंटा’ और शांति का एजेंडा
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी बयान के अनुसार, शहबाज शरीफ और मसूद पेजेश्कियन के बीच यह संवाद काफी विस्तृत रहा।
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निंदा: शरीफ ने ईरान के रिहायशी इलाकों और बुनियादी ढांचे पर इजरायल द्वारा किए जा रहे हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की।
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शांति पहल: पाकिस्तान ने ईरान को उन कूटनीतिक प्रयासों से अवगत कराया जो उप प्रधानमंत्री इशाक डार और सेना प्रमुख (फील्ड मार्शल) सैयद आसिम मुनीर के जरिए किए जा रहे हैं।
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शोक: पाकिस्तान ने युद्ध में अब तक जान गंवाने वाले 1,900 से अधिक लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायल व बेघर हुए नागरिकों के लिए एकजुटता प्रकट की।
पाकिस्तान का ‘बैलेंसिंग एक्ट’: अमेरिका और ईरान दोनों से संपर्क
हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान एक तरफ ईरान के साथ खड़ा दिख रहा है, तो दूसरी तरफ वह अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ भी लगातार संपर्क में है। शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति को भरोसा दिलाया कि पाकिस्तान एक ऐसा ‘अनुकूल माहौल’ बनाने की कोशिश कर रहा है, जहां बातचीत के जरिए दुश्मनी को खत्म किया जा सके। ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने भी पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना की, लेकिन साथ ही ‘आपसी विश्वास’ बहाली को मध्यस्थता की पहली शर्त बताया।
इस्लामाबाद बनेगा ‘शांति का केंद्र’: महाशक्तियों की बड़ी बैठक
मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान ने अपना ‘मास्टर प्लान’ तैयार कर लिया है। अगले 48 घंटे इस्लामाबाद के लिए बेहद अहम होने वाले हैं:
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राजनयिकों का जमावड़ा: सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की के विदेश मंत्री रविवार और सोमवार को इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं।
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त्रिपक्षीय वार्ता: रियाद, काहिरा और अंकारा के शीर्ष राजनयिक पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार के साथ मिलकर युद्ध विराम (Ceasefire) का रोडमैप तैयार करेंगे।
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शरीफ की मेजबानी: इन सभी नेताओं की मुलाकात पीएम शहबाज शरीफ से भी होगी, जिसमें खाड़ी देशों की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा संकट पर चर्चा की जाएगी।
क्या सफल होगी पाकिस्तान की मध्यस्थता?
पाकिस्तान के लिए यह राह आसान नहीं है। एक तरफ ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले तेज हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने भी अमेरिकी जहाजों पर हमले शुरू कर दिए हैं। ऐसे में पाकिस्तान का सऊदी अरब और तुर्की जैसे प्रभावशाली इस्लामिक देशों को एक मंच पर लाना, युद्ध की दिशा मोड़ने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है।
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