‘ईरान भी हुआ भारतीय कूटनीति का मुरीद’: अमेरिका से युद्ध और ट्रंप की धमकी के बीच भारत की विदेश नीति की वैश्विक स्तर पर जय-जयकार

नई दिल्ली/तेहरान: पश्चिम एशिया में बारूद की गंध और गहराते युद्ध के बादलों के बीच भारतीय कूटनीति का लोहा पूरी दुनिया मान रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दिए गए ’48 घंटे के अल्टीमेटम’ और ‘पावर प्लांट डे’ की चेतावनी के बावजूद, ईरान ने भारत की ‘संतुलित विदेश नीति’ पर अटूट भरोसा जताया है। ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) के भारत में प्रतिनिधि, अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मौजूदा वैश्विक संकट को सुलझाने में भारत की भूमिका सबसे अहम और प्रभावी हो सकती है।

‘भारतीय कूटनीति सबसे बेहतरीन’: ईरान का बड़ा बयान

समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) के अनुसार, इलाही ने भारत की सराहना करते हुए कहा, “भारतीय कूटनीति बहुत अच्छी है और वे इस जटिल मुद्दे में एक बड़ी और सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं।” यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को एक महीने से अधिक का समय हो गया है और तनाव अपने चरम पर है। इससे पहले भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने भी भारत को ‘ग्लोबल साउथ’ का नेतृत्वकर्ता बताते हुए एक ‘भरोसेमंद खिलाड़ी’ करार दिया था, जो गलतफहमियों को कम करने की क्षमता रखता है।

जयशंकर की ‘फोन कॉल डिप्लोमेसी’: मिडिल ईस्ट के दिग्गजों से संवाद

भारत की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर लगातार क्षेत्र के प्रभावशाली नेताओं के संपर्क में हैं। रविवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने खुद जयशंकर को फोन कर मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। इसके तुरंत बाद, जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान और यूएई (UAE) के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी बातचीत की। इन चर्चाओं के केंद्र में न केवल युद्ध विराम था, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति (Energy Supply) को बहाल करना भी मुख्य एजेंडा रहा।

ट्रंप का ‘मंगलवार’ अल्टीमेटम और होर्मुज का संकट

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि 7 अप्रैल (मंगलवार) तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के बिजली घरों और पुलों को निशाना बनाकर ‘पावर प्लांट डे’ और ‘ब्रिज डे’ मनाएगा। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ‘लाइफलाइन’ है, जहाँ से दुनिया का 20% कच्चा तेल गुजरता है। फरवरी 2026 में युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान के कड़े नियंत्रण के कारण तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में ईरान का भारत की तारीफ करना यह दर्शाता है कि वह भारत को एक ऐसे मध्यस्थ के रूप में देख रहा है जो अमेरिका और ईरान के बीच ‘ब्रिज’ का काम कर सकता है।

क्यों अहम है भारत की भूमिका?

भारत के ईरान और अमेरिका, दोनों के साथ ही गहरे सामरिक और ऐतिहासिक संबंध हैं। जहाँ एक तरफ भारत क्वाड (QUAD) के जरिए अमेरिका का करीबी है, वहीं दूसरी तरफ चाबहार पोर्ट और ऊर्जा जरूरतों के लिए ईरान के साथ उसके रिश्ते अटूट हैं। यही ‘बैलेंसिंग एक्ट’ भारत को दुनिया का एकमात्र ऐसा देश बनाता है जिसकी बात वाशिंगटन और तेहरान, दोनों ही गंभीरता से सुनते हैं। अब सबकी नजरें सोमवार को होने वाली संभावित ‘डील’ पर टिकी हैं, जिसके बारे में ट्रंप ने संकेत दिए हैं।

Check Also

फ्लाईदुबई कॉकपिट में खूनी खेल: ओमानी को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित पर कुल्हाड़ी से किया वार

दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान संख्या FZ1073 में हवा के बीच …