तमिलनाडु में ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ की वापसी: AIADMK के 15 विधायक पुडुचेरी शिफ्ट, थालापति विजय की सरकार पर सस्पेंस

चेन्नई/पुडुचेरी: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में वो तूफान ला दिया है, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी। अभिनेता से नेता बने विजय (थालापति) की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े (118) से दूर रह गई है। इस बीच, हॉर्स ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) के डर से AIADMK ने अपने 15 विधायकों को आनन-फानन में पुडुचेरी के एक लग्जरी रिजॉर्ट में भेज दिया है। तमिलनाडु की राजनीति में सालों बाद एक बार फिर ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ का दौर लौट आया है।

बहुमत का गणित: विजय के पास 112, चाहिए 118

तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन अनिवार्य है। चुनाव नतीजों के बाद की स्थिति कुछ इस प्रकार है:

  • TVK (विजय): 108 सीटें

  • DMK: 59 सीटें

  • AIADMK: 47 सीटें

  • कांग्रेस: TVK को समर्थन का ऐलान (इसके बाद विजय का आंकड़ा 112 तक पहुंचा)

विजय ने राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा तो पेश कर दिया है, लेकिन राज्यपाल ने उन्हें स्पष्ट रूप से 118 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपने को कहा है। अब विजय को अपनी सरकार बचाने या बनाने के लिए केवल 6 और विधायकों की जरूरत है।

AIADMK में बगावत की आहट! क्यों डरी पार्टी?

सूत्रों के मुताबिक, AIADMK के भीतर एक बड़ा गुट ऐसा है जो ‘थालापति’ विजय के साथ जाने का मन बना चुका है। विधायकों का तर्क है कि जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है, इसलिए उन्हें TVK की सरकार को समर्थन देना चाहिए। इसी आंतरिक कलह और टूट की आशंका के बीच पार्टी नेतृत्व ने 15 विधायकों को पुडुचेरी के रिजॉर्ट में सुरक्षित कर दिया है। वहां 20 कमरे बुक किए गए हैं और विधायकों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

क्या DMK और AIADMK आएंगे साथ?

राजनीतिक गलियारों में एक और चौंकाने वाली चर्चा है—DMK और AIADMK का मिलन। धुर विरोधी रही ये दोनों पार्टियां बैक चैनल से बातचीत कर रही हैं ताकि विजय को सत्ता से दूर रखा जा सके। हालांकि, इन दोनों का कुल आंकड़ा (59+47 = 106) भी बहुमत के आंकड़े 118 के पास नहीं पहुंच रहा है। ऐसे में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में राज्यपाल की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो गई है।

थालापति विजय की सुरक्षा पर भी सवाल

इस सियासी खींचतान के बीच एक और बड़ी खबर आई है। विजय को दी गई ‘सीएम जैसी सुरक्षा’ अचानक वापस ले ली गई है, जिस पर TVK कार्यकर्ताओं ने भारी नाराजगी जताई है। वर्तमान में तमिलनाडु की सत्ता की चाबी AIADMK के उन विधायकों के हाथ में है जो पाला बदलने को तैयार बैठे हैं। क्या विजय अपनी पहली ही सियासी पारी में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच पाएंगे या गठबंधन का नया खेल उन्हें रोक देगा? अगले 48 घंटे तमिलनाडु के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं।

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