
आमतौर पर लोग दिल से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति के लिए ‘हार्ट अटैक’ और ‘कार्डियक अरेस्ट’ शब्दों का इस्तेमाल एक जैसे अर्थ में कर देते हैं। लेकिन मेडिकल साइंस के मुताबिक, ये दोनों पूरी तरह से अलग स्थितियां हैं। आसान शब्दों में समझें तो हार्ट अटैक दिल की ‘प्लंबिंग’ (रक्त प्रवाह) की समस्या है, जबकि कार्डियक अरेस्ट दिल की ‘इलेक्ट्रिकल’ (धड़कन तंत्र) की गड़बड़ी है।
सीने का तेज दर्द हमेशा दोनों स्थितियों का संकेत नहीं होता। कई बार हार्ट अटैक आगे चलकर कार्डियक अरेस्ट की वजह जरूर बन सकता है, लेकिन हर सीने का दर्द कार्डियक अरेस्ट ही हो, यह जरूरी नहीं है। सही समय पर इन दोनों के अंतर को पहचानना किसी मरीज की जान और मौत के बीच का फर्क तय कर सकता है।
हार्ट अटैक (Heart Attack): जब दिल तक खून पहुंचना बंद हो जाए
हार्ट अटैक तब होता है जब दिल की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन और खून पहुंचाने वाली कोरोनरी धमनियों (Arteries) में किसी थक्के (ब्लड क्लॉट) या प्लाक के जमने से रुकावट आ जाती है।
मुख्य लक्षण:
-
सीने में दबाव या भारीपन: सीने के बीचों-बीच या बाईं तरफ ऐसा महसूस होना जैसे कोई भारी पत्थर रख दिया गया हो या कोई निचोड़ रहा हो।
-
दर्द का फैलना: यह दर्द केवल सीने तक सीमित नहीं रहता; यह बाएं हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े, पीठ या पेट के ऊपरी हिस्से तक फैलता है।
-
ठंडा पसीना और घबराहट: बिना किसी गर्मी या मेहनत के अचानक ठंडा पसीना छूटना और बेचैनी होना।
-
सांस फूलना और जी मिचलाना: सांस लेने में तकलीफ, उल्टी जैसा महसूस होना या चक्कर आना।
पहचानने की कुंजी: हार्ट अटैक के दौरान मरीज होश में रहता है, बात कर सकता है और उसकी नब्ज (Pulse) चल रही होती है। लक्षण अचानक भी आ सकते हैं या कई घंटों/दिनों से हल्के रूप में उभर रहे हो सकते हैं।
कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest): जब दिल अचानक धड़कना बंद कर दे
कार्डियक अरेस्ट दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम में अचानक आई खराबी की वजह से होता है। इसमें दिल की धड़कन अचानक अनियंत्रित (वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन) हो जाती है या दिल पूरी तरह पंप करना बंद कर देता है। इसके चलते दिमाग, फेफड़ों और बाकी अंगों तक खून का प्रवाह एक सेकंड में रुक जाता है।
मुख्य लक्षण:
-
अचानक बेहोश होकर गिरना: व्यक्ति बिना किसी पूर्व चेतावनी के अचानक गिर पड़ता है।
-
कोई रिस्पॉन्स न देना: आवाज देने या हिलाने पर मरीज कोई प्रतिक्रिया नहीं देता।
-
सांस का रुकना: सांस या तो पूरी तरह बंद हो जाती है या केवल घबराहट भरी धीमी घरघराहट (Gasping) जैसी आवाज आती है।
-
नब्ज का गायब होना: कलाई या गले (Carotid Artery) पर छूने पर नब्ज बिल्कुल नहीं मिलती।
पहचानने की कुंजी: कार्डियक अरेस्ट में मरीज तुरंत अचेत हो जाता है और सीने में दर्द की शिकायत करने का मौका भी नहीं मिलता। दिल रक्त पंप करना बंद कर चुका होता है।
दोनों के बीच सीधा तुलनात्मक अंतर
| लक्षण / स्थिति | हार्ट अटैक (Heart Attack) | कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest) |
| मूल कारण | रक्त वाहिकाओं में ब्लॉकेज (रक्त प्रवाह रुकना) | इलेक्ट्रिकल सिस्टम फेल होना (धड़कन रुकना) |
| मरीज की चेतना | मरीज होश में रहता है और दर्द महसूस करता है | मरीज तुरंत बेहोश हो जाता है |
| नब्ज और धड़कन | नब्ज चल रही होती है (तेज या अनियमित हो सकती है) | नब्ज और धड़कन पूरी तरह बंद हो जाती है |
| सीने का दर्द | अत्यधिक तेज दबाव, भारीपन और दर्द | अक्सर दर्द बताने का समय ही नहीं मिलता |
| पहला कदम | तुरंत एंबुलेंस बुलाएं, मरीज को शांत बैठाएं | तुरंत CPR शुरू करें और डिफाइब्रिलेटर (AED) खोजें |
आपातकालीन स्थिति में क्या करें? गोल्डन मिनट में जान बचाने का तरीका
-
अगर हार्ट अटैक के लक्षण दिखें:
-
मरीज को घबराने न दें, तुरंत आरामदायक स्थिति में बैठाएं (लेटाने से बचें ताकि सांस लेने में दिक्कत न हो)।
-
तुरंत आपातकालीन एंबुलेंस को कॉल करें।
-
यदि डॉक्टर की पूर्व सलाह हो या मेडिकल निर्देश मिले, तो मरीज को पानी के बिना 300 mg एस्पिरिन (Aspirin) चबाने को दी जा सकती है।
-
-
अगर कार्डियक अरेस्ट हो (मरीज अचेत हो और नब्ज न मिले):
-
एक सेकंड भी बर्बाद किए बिना किसी से एंबुलेंस बुलाने को कहें और खुद तुरंत सीपीआर (CPR) शुरू करें।
-
मरीज की छाती के बीचों-बीच दोनों हथेलियां रखकर प्रति मिनट 100 से 120 बार की गति से 2 से 2.5 इंच गहरा दबाव (Chest Compressions) दें।
-
यदि आसपास ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफाइब्रिलेटर (AED) उपलब्ध हो, तो तुरंत उसके निर्देशों का पालन करते हुए इलेक्ट्रिक शॉक दें।
-
कार्डियक अरेस्ट के मामलों में हर बीतता हुआ मिनट बचने की संभावना को 10% तक कम कर देता है, इसलिए समय रहते सही कदम उठाना ही जीवन की सबसे बड़ी गारंटी है।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया