बर्तन मांजने वाली कलिता मांझी के लिए अमित शाह ने क्यों बजवाई ताली? शुभेंदु के साथ इस ‘बंगाली बेटी’ की जीत के पीछे की भावुक कहानी

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक नया इतिहास रचा गया है। भाजपा की प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए शुभेंदु अधिकारी के नाम का ऐलान करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भावुक नजर आए। कोलकाता के इस ऐतिहासिक मंच से शाह ने न केवल जीत का श्रेय कार्यकर्ताओं के बलिदान को दिया, बल्कि एक ऐसी महिला विधायक का जिक्र किया जिसकी संघर्ष गाथा सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गई। वह नाम है— कलिता मांझी।

100 साल का संघर्ष और 321 कार्यकर्ताओं का बलिदान

अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि 2015 में खाता खोलने से लेकर 2026 में 207 सीटों तक पहुंचने का यह सफर जितना आनंददायक है, उससे कहीं ज्यादा कष्टदायक रहा है। उन्होंने मंच से उन 321 भाजपा कार्यकर्ताओं को नमन किया जिन्होंने बंगाल में वैचारिक परिवर्तन के लिए अपनी जान गंवाई। शाह ने साफ शब्दों में कहा कि यह जीत श्यामा प्रसाद मुखर्जी की उस वैचारिक विरासत की विजय है, जिसकी शुरुआत 1950 में हुई थी।

कौन हैं कलिता मांझी? जिनके लिए शाह ने कहा- ‘जरा ताली बजाओ’

मंच से अमित शाह ने अचानक औसग्राम विधानसभा सीट का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “औसग्राम की प्रत्याशी कलिता मांझी… कलिता के लिए जरा ताली बजाओ।” कलिता की जीत कोई सामान्य चुनावी जीत नहीं है। वह कभी दूसरों के घरों में बर्तन मांजने का काम करती थीं। गरीबी के दारुण दुख को झेलते हुए उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेता श्यामा प्रसन्ना लोहार को 12,535 वोटों के बड़े अंतर से धूल चटा दी। शाह ने कलिता को बंगाल की उन करोड़ों शोषित माताओं-बहनों के लिए ‘आशा का बिंदु’ बताया।

नामांकन के बाद भी जारी रखा बर्तन मांजने का काम

कलिता मांझी के संघर्ष की कहानी किसी मिसाल से कम नहीं है। साल 2014 में वह भाजपा की एक साधारण बूथ एजेंट थीं। पार्टी के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए उन्हें बोलपुर जिले का महासचिव बनाया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपना पेट पालने के लिए दूसरों के घरों में घरेलू सहायिका के तौर पर काम करना बंद नहीं किया। 2021 में उन्हें हार मिली थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। कलिता ने बताया कि टिकट मिलने के एक हफ्ते बाद तक वह दूसरों के घरों में काम करने जाती रहीं। उन्होंने केवल नामांकन के बाद चुनाव प्रचार में व्यस्तता के कारण काम से ब्रेक लिया था।

संदेशखाली और अत्याचार के खिलाफ सत्याग्रह की जीत

शाह ने कलिता के साथ-साथ पानीहाटी की रत्नादेवनाथ और हिंगलगंज की रेखा पात्रा का भी उल्लेख किया। उन्होंने रेखा पात्रा को ‘संदेशखाली के अत्याचार के खिलाफ सत्याग्रह का प्रतीक’ बताया। शाह ने संदेश दिया कि अब विधानसभा में केवल रसूखदार लोग नहीं, बल्कि समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़ी महिलाएं भी बैठेंगी और अपनी आवाज उठाएंगी।

घुसपैठ और गौ-तस्करी पर पूर्ण विराम: शाह की हुंकार

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर बात करते हुए अमित शाह ने कहा कि बंगाल की यह जीत भारत की सुरक्षा के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब बंगाल में घुसपैठ और गौ-तस्करी बीते दौर की बात हो जाएगी। शाह ने गर्व से कहा, “अब गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक भाजपा की सरकार है।” यह जीत जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्मभूमि में उनकी विचारधारा की सच्ची वापसी है।

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