हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी के व्रत को बेहद पवित्र और संकटों को टालने वाला माना गया है। लेकिन जब यही चतुर्थी तीन साल में एक बार आने वाले अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास में पड़ती है, तो इसका आध्यात्मिक महत्व सौ गुना ज्यादा बढ़ जाता है। इस साल ज्येष्ठ अधिकमास के शुक्ल पक्ष में आने वाली चतुर्थी को वरदा विनायक चतुर्थी के रूप में मनाया जाएगा। ज्योतिषविदों के अनुसार, अधिकमास साक्षात भगवान विष्णु की कृपा का महीना है और इस दौरान विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा करने से सामान्य दिनों के मुकाबले अनंत गुना फल की प्राप्ति होती है। अगर आपके जीवन में परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं, तो इस बार की चतुर्थी आपके लिए भाग्य बदलने का सुनहरा मौका साबित हो सकती है।
वरदा विनायक चतुर्थी 2026: तिथि और पूजा का सटीक मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 19 मई 2026 को दोपहर 02 बजकर 18 मिनट पर हो जाएगी। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन 20 मई 2026 को सुबह 11 बजकर 06 मिनट पर होगा। सनातन धर्म में उदया तिथि की महत्ता के कारण वरदा विनायक चतुर्थी का पावन व्रत 20 मई 2026, दिन बुधवार को रखा जाएगा। बुधवार का दिन स्वयं भगवान गणेश को समर्पित है, जिससे इस व्रत का फल और भी अधिक बढ़ गया है।
स्कंद पुराण के अनुसार क्यों दुर्लभ है अधिकमास की यह चतुर्थी?
भविष्य पुराण और स्कंद पुराण में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि अधिकमास के भीतर आने वाले सभी व्रत और त्योहार सीधे ईश्वर के परम धाम तक पहुंचाते हैं। इस दिन गणेश जी की आराधना करने से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं देखते ही देखते दूर हो जाती हैं। जो भी जातक इस दिन पूरी निष्ठा के साथ उपवास रखता है, उसे सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, धन, यश और संतान सुख का वरदान प्राप्त होता है।
इस आसान विधि से करें भगवान गणेश का पूजन
वरदा विनायक चतुर्थी के दिन शुभ फलों की प्राप्ति के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद अपने पूजा घर को साफ करके एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला साफ कपड़ा बिछाएं। इस चौकी पर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें। बप्पा को सिंदूर का तिलक लगाएं और उनकी सबसे प्रिय चीज यानी दूर्वा (दूब घास), लाल फूल, केला, मोदक, गुड़ और चने की दाल अर्पित करें। इसके बाद गाय के घी का दीपक जलाकर ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करें। पूजा के समय वरदा विनायक चतुर्थी की व्रत कथा का पाठ करना बिल्कुल न भूलें और अंत में आरती कर अपनी मनोकामना कहें।
व्रत रखने वाले इन नियमों का अवश्य करें पालन
यदि आप इस दिन व्रत रख रहे हैं, तो सुबह पूजा के समय ही हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन मन ही मन भगवान का ध्यान करें और केवल फलाहार का ही सेवन करें। शाम के समय दोबारा गणेश जी की आरती उतारें और उसके बाद चंद्रमा के उदय होने पर उन्हें अर्घ्य देकर ही अपना व्रत खोलें। जो लोग अस्वस्थ हैं, वे पूर्ण उपवास की जगह केवल सात्विक फलाहार खाकर भी इस पूजा का पुण्य कमा सकते हैं।
बप्पा की असीम कृपा बरसाएंगे ये 7 विशेष उपाय
अधिकमास के इस पावन संयोग पर अगर आप नीचे दिए गए सात उपायों को आजमाते हैं, तो पूरे वर्ष आपके घर में रिद्धि-सिद्धि का वास रहेगा:
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अधिकमास के विशेष फल के लिए पूजा के दौरान 11 या 21 बार ‘गणेश अथर्वशीर्ष’ का पाठ अवश्य करें।
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बप्पा के शक्तिशाली मंत्र ‘ॐ गं गणपतये नमः’ का कम से कम एक माला (108 बार) जाप करें।
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भगवान गणेश को बूंदी के लड्डू या मोदक का भोग जरूर लगाएं।
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पूरी पूजा और व्रत के दौरान अपने मन को शांत रखें और किसी के प्रति द्वेष न लाएं।
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व्रत के नियमों का पालन करते हुए काम, क्रोध, लोभ और झूठ बोलने जैसी आदतों से दूर रहें।
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रात में चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना व्रत का पारण (व्रत खोलना) न करें।
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पूजा संपन्न होने के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों या गरीबों को अन्न और वस्त्र का दान करें।
अधिकमास की इस वरदा विनायक चतुर्थी पर किए गए ये छोटे-छोटे बदलाव और उपाय आपके जीवन से हर तरह के अमंगल को दूर कर खुशहाली का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
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