PoK में भड़की विद्रोह की आग: पाकिस्तानी सेना ने किया बेगुनाहों का नरसंहार, जनरल आसिम मुनीर की शह पर 27 नागरिकों की मौत

मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इस वक्त हालात पूरी तरह बेकाबू हो चुके हैं। पिछले तीन दिनों से जारी भयंकर नागरिक असंतोष को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी हैं। संयुक्त अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ सड़कों पर उतरे निहत्थे नागरिकों पर पाकिस्तानी रेंजर्स और पुलिस ने अंधाधुंध गोलियां बरसाई हैं। इस खूनी दमन चक्र में अब तक कम से कम 27 बेगुनाह नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हैं। इस नरसंहार ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के उन दावों की हवा निकाल दी है, जिसमें वह खुद को ‘कश्मीरियों का हमदर्द और रक्षक’ बताते फिरते हैं।

क्यों सुलग रहा है PoK? जानिए क्या है JAAC और विवाद की असली वजह

दरअसल, सितंबर 2023 में गठित हुई संयुक्त अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) वहां के स्थानीय व्यापारियों, वकीलों, डॉक्टरों, छात्रों और आम नागरिकों का एक बहुत बड़ा और मजबूत संगठन है। जेएएसी ने अपनी 38 सूत्रीय मांगों को लेकर पूरे PoK में पूर्ण बंद और एक लंबी पदयात्रा का एलान किया था।

इनकी सबसे प्रमुख मांग PoK विधानसभा की उन 12 आरक्षित सीटों को खत्म करने की है, जिसे पाकिस्तान सरकार ‘भारतीय कश्मीर से आए शरणार्थियों’ के नाम पर रखती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुल 53 सीटों में से इन 12 सीटों के जरिए इस्लामाबाद सीधे धांधली करता है और वहां की सत्ता में अपने कठपुतली नेताओं को बैठा देता है, जबकि इन सीटों पर दावा करने वाले शरणार्थी वहां रहते ही नहीं हैं। इसी विरोध को कुचलने के लिए 6 जून को पाकिस्तान सरकार ने इस संगठन पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया, जिसके बाद पूरा क्षेत्र सुलग उठा।

रावलकोट नरसंहार: मुर्दाघर के बाहर अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे लोगों पर चलाईं गोलियां

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे डरावना और बर्बर चेहरा 8 जून को रावलकोट में देखने को मिला। जेएएसी के समर्थक अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा हुए थे। वे इससे पहले की झड़पों में मारे गए अपने साथियों के शवों का अंतिम संस्कार करने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान पाकिस्तानी रेंजर्स ने बिना किसी चेतावनी के भीड़ पर चारों तरफ से गोलियां चलानी शुरू कर दीं। जेएएसी के केंद्रीय नेता शौकत नवाज मीर ने एक वीडियो संदेश जारी कर रोते हुए कहा, “पाकिस्तानी हुकूमत और सेना ने रावलकोट में हमारे लोगों का खुलेआम नरसंहार शुरू कर दिया है, लेकिन हम झुकेंगे नहीं।”

रावलकोट में केवल एक सुबह के भीतर 23 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। हालांकि, पाकिस्तान सरकार हमेशा की तरह आंकड़े छिपा रही है और केवल 11 मौतों की पुष्टि कर रही है, लेकिन जमीनी हालात बता रहे हैं कि आंकड़ा 30 के पार जा चुका है।

मुजफ्फराबाद से कोटली तक इंटरनेट बंद; पर्यटकों को क्षेत्र छोड़ने का फरमान

हिंसा और विद्रोह की लपटें फैलती देख पूरे PoK में आपातकाल जैसे हालात हैं। मुजफ्फराबाद, मीरपुर, भीमबर, कोटली, टाटा पानी और प्लांदारी समेत तमाम बड़े इलाकों में पूरी तरह कर्फ्यू जैसा सन्नाटा है। इंटरनेट, मोबाइल डेटा और सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया है ताकि सेना की बर्बरता के वीडियो दुनिया के सामने न आ सकें। प्रशासन ने किसी भी प्रकार की जनसभा पर रोक लगा दी है और वहां मौजूद पर्यटकों को 20 जून तक हर हाल में PoK छोड़ने की सख्त हिदायत दी है।

भारत ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान को लताड़ा: “दुनिया ले कड़ा संज्ञान”

PoK में नागरिकों के इस कत्लेआम पर भारत सरकार ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की इस बर्बरता की तीखी निंदा की। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से आ रही पुलिस और सेना की बर्बरता की खबरें बेहद चिंताजनक हैं, जिसमें कई प्रदर्शनकारी मारे गए हैं। हम उम्मीद करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके इस गंभीर मानवाधिकार हनन और कुकर्मों के लिए दुनिया के सामने जवाबदेह ठहराएगा।” भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं को छिपाने के लिए हमेशा झूठ का सहारा लेता आया है।

दो साल में तीसरी बड़ी बगावत; अब स्वायत्तता की मांग पर अड़े लोग

यह कोई पहली बार नहीं है जब पाकिस्तानी सेना ने PoK के लोगों का खून बहाया हो। पिछले दो सालों में यह तीसरा बड़ा विद्रोह है। इससे पहले मई 2024 में आटे और बिजली की बढ़ी कीमतों को लेकर जनता सड़क पर उतरी थी, तब भी कई लोग मारे गए थे। इसके बाद सितंबर-अक्टूबर 2025 में मुजफ्फराबाद में हिंसक दमन हुआ था, जिसमें 9 लोगों की जान गई थी।

शुरुआत में पानी, बिजली, सड़क और रोजगार जैसी बुनियादी मांग करने वाली अवामी एक्शन कमिटी अब आर-पार के मूड में है। अब प्रदर्शनकारियों की मांग बदल चुकी है और वे पाकिस्तान सरकार और पाकिस्तानी सेना के प्रत्यक्ष शासन को पूरी तरह से समाप्त कर PoK की वास्तविक स्वायत्तता (आजादी) की मांग कर रहे हैं। हालात को बिगड़ता देख अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने अपने नागरिकों के लिए सख्त ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर उन्हें इस अशांत क्षेत्र से दूर रहने को कहा है।

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