भारत में मॉनसून का आधिकारिक सीजन 1 जून से शुरू हो चुका है, लेकिन इस बार इसकी शुरुआत ने आम लोगों से लेकर नीति-निर्माताओं और मौसम वैज्ञानिकों तक को भारी उलझन में डाल दिया है। एक तरफ जहां भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) मॉनसून के तेजी से आगे बढ़ने के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ मौसम वैज्ञानिक और राज्य सरकारें इस पर गंभीर सवाल उठा रही हैं। अगर आप भी झुलसती गर्मी और उमस के बीच झमाझम बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं या खेती-किसानी से जुड़े हैं, तो यह कड़कती रिपोर्ट आपके लिए बेहद जरूरी है। आइए गहराई से समझते हैं कि देश में इस वक्त मॉनसून की असली जमीनी हकीकत क्या है।
देश में 12% कम बारिश: पहले हफ्ते का यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक है
मौसम विभाग के ही आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 जून से 8 जून के बीच देश में मॉनसून की शुरुआत उम्मीद से काफी कमजोर रही है। आंकड़ों के मुताबिक:
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लंबी अवधि का औसत: भारत में जून के इस शुरुआती हफ्ते में आमतौर पर जितनी बारिश होनी चाहिए, इस बार उससे 11.9% (लगभग 12%) कम बारिश दर्ज की गई है।
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आठ दिनों का रिकॉर्ड: मॉनसून सीजन के शुरुआती 8 दिनों में से 7 दिन पूरे देश को सामान्य से काफी कम बारिश का सामना करना पड़ा है। देश में अब तक केवल 24.7 मिलीमीटर बारिश ही रिकॉर्ड की गई है।
मौसम विभाग बनाम सरकार: क्यों आमने-सामने आए दोनों?
इस समय देश में सबसे बड़ा विवाद महाराष्ट्र में मॉनसून के आगमन और उसकी चाल को लेकर खड़ा हो गया है, जिसने नीति-निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है।
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मौसम विभाग (IMD) का दावा: मौसम विभाग ने बकायदा घोषणा की थी कि 4 जून को केरल पहुंचने के बाद मॉनसून ने बहुत तेजी से दूरी तय की और महज चार दिनों के भीतर 8 जून को महाराष्ट्र के सोलापुर तक अपनी दस्तक दे दी।
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सरकार की बड़ी चेतावनी: दूसरी तरफ, महाराष्ट्र सरकार ने इस दावे के बीच ही किसानों के लिए एक बड़ी और गंभीर चेतावनी जारी कर दी। सरकार ने किसानों से साफ लफ्जों में कहा कि ‘शुरुआती छिटपुट बारिश को देखकर जल्दबाजी में बुआई करने की गलती बिल्कुल न करें, क्योंकि मॉनसून के आगे बढ़ने की रफ्तार सुस्त पड़ने की पूरी आशंका है।’
वैज्ञानिकों का बड़ा खुलासा: अफ्रीका से आ रही सूखी हवा ने रोका मॉनसून का रास्ता
मौसम विभाग ने जिस मॉनसून के महाराष्ट्र पहुंचने का दावा किया है, उसे लेकर अंतरराष्ट्रीय और स्वतंत्र मौसम विशेषज्ञ बिल्कुल भी सहमत नहीं हैं। जाने-माने मौसम वैज्ञानिक अक्षय देवरस ने एक बेहद चौंकाने वाला वैज्ञानिक विश्लेषण साझा किया है।
अक्षय देवरस के मुताबिक, “वायुमंडल के निचले स्तर पर जो हवाएं इस समय सोलापुर और उसके आसपास के इलाकों में आ रही हैं, वे वास्तव में हिंद महासागर (Indian Ocean) से नहीं, बल्कि उत्तरी अफ्रीका (North Africa) के रेगिस्तानी इलाकों से आ रही हैं। यह पूरी तरह से सूखी हवा है। केवल मॉनसून-पूर्व (Pre-Monsoon) की गरज-चमक और स्थानीय बादलों की बारिश को देखकर मॉनसून के आने की आधिकारिक घोषणा करना जनता और किसानों को गुमराह करने जैसा हो सकता है।”
वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि इस सूखी हवा के कारण किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो सकती हैं, क्योंकि अगले 10 दिनों तक महाराष्ट्र और मध्य भारत में तापमान काफी ऊंचा रहने वाला है। हवा में नमी (Moisture) की भारी कमी के चलते 20 जून तक दक्षिण-पश्चिमी प्रायद्वीप से आगे मानसूनी बादलों का आगे बढ़ना पूरी तरह ठप हो गया है।
आपके राज्य का क्या है हाल? कहीं सूखा, तो कहीं बंपर बारिश
भले ही राष्ट्रीय स्तर पर बारिश के आंकड़ों में 12% की गिरावट दर्ज की गई हो, लेकिन जिन गिने-चुने राज्यों में मॉनसून की एंट्री हो चुकी है, वहां की मौसमी स्थिति काफी अलग और अजीब है। मॉनसून भले ही सरकारी कागजों पर तेजी से आगे बढ़ रहा हो, लेकिन मौसम के इस खतरनाक और अनप्रेडिक्टेबल पैटर्न को देखते हुए देश के मध्य, पश्चिम और उत्तर-पश्चिम हिस्सों में रहने वाले लोगों और विशेषकर किसानों को फिलहाल 20 जून तक फूंक-फूंक कर कदम रखने की जरूरत है। बुआई और खेती से जुड़ा कोई भी बड़ा फैसला मौसम के पूरी तरह स्थिर और सक्रिय होने के बाद ही लें, वरना भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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